बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले जदयू के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार ने गुरुवार को रिकॉर्ड दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ उनके दो उपमुख्यमंत्री– बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी शपथ ग्रहण की।

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा एनडीए के अन्य घटक दलों के शीर्ष नेता मौजूद रहे। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार सहित कुल 27 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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चुनाव से पहले नीतीश कुमार की उम्र और राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन शानदार जीत के बाद उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिहार की सत्ता की चाबी अभी भी उनके पास ही है। रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नीतीश कुमार देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने इतनी बार किसी राज्य की कमान संभाली हो।

शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'एनडीए की यह जीत बिहार के लोगों का विकास और सुशासन पर भरोसा है। हम सब मिलकर बिहार को फिर से नंबर-1 राज्य बनाएंगे।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंच से नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार ने एक बार फिर दिखा दिया है कि विकास और स्थिरता ही जनता की पहली पसंद है।

बिहार के अब तक के मुख्यमंत्री

कुल 26 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें से 14 बीजेपी से, 8 जेडीयू से, 2 एलजेपी (आरवी) से और एक-एक एचएएम (एस) और आरएलएम से हैं।

एनडीए सरकार ने कैबिनेट में नौ नए चेहरों को शामिल किया है, जिसमें एलजेपी (आरवी) के संजय कुमार सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने महुआ विधानसभा सीट पर लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव को हराया था। 26 मंत्रियों में से सिर्फ़ एक मुस्लिम सदस्य हैं।
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इन्होंने ली मंत्री पद की शपथ

भारतीय जनता पार्टी के दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, संजय सिंह टाइगर, रामा निषाद, अरुण शंकर प्रसाद, राम कृपाल यादव, नितिन नबीन और सुरेंद्र प्रसाद मेहता ने मंत्री पद की शपथ ली। जेडीयू की लेसी सिंह, मदन साहनी, सुनील कुमार, मोहम्मद जमा खान और एचएएम (एस) के संतोष सुमन ने भी मंत्री पद की शपथ ली। वहीं दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा से और संजय कुमार सिंह और संजय कुमार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से हैं।

चुनाव परिणाम आने के बाद बुधवार को ही नीतीश कुमार ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात कर पुरानी सरकार से इस्तीफा दिया और एनडीए की स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था। राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार बनाने का न्योता दिया था।

विधायक दल के नेता चुने गए

शपथ ग्रहण से एक दिन पहले बुधवार को नीतीश कुमार को उनके सरकारी आवास पर हुई जेडीयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके तुरंत बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में भी उन्हें एनडीए का नेता चुना गया। इस तरह नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी पूरी तरह तय हो गई।

इसी दिन बीजेपी मुख्यालय में हुई बैठक में सम्राट चौधरी को बीजेपी विधायक दल का नेता और विजय कुमार सिन्हा को उपनेता चुना गया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया था, जिन्होंने दोनों नाम प्रस्तावित किए और विधायकों ने तालियाँ बजाकर समर्थन दिया।
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एनडीए की प्रचंड जीत

2025 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 243 में से 202 सीटें जीतीं। इसमें बीजेपी को सबसे ज़्यादा 89 सीटें और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। विपक्ष महागठबंधन को महज 35 सीटें ही मिलीं। इसमें से आरजेडी को 25 सीटें मिलीं।

मतदान में महिलाएँ आगे

6 और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए चुनाव में कुल 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ। यह 1951 के बाद सबसे अधिक है। खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं का प्रतिशत 71.6% रहा, जबकि पुरुष मतदाता 62.8% ही वोट डाल सके।