पटना के कोचिंग सेंटर पर फायरिंग मामले में अदालत ने खान सर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। खान सर की कोचिंग पर फायरिंग हुई थी। पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। court stayed arrest of Khan Sir in patna coaching firing incident.
पटना की एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर खान सर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके कोचिंग संस्थान के बाहर हुई गोलीबारी के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।
पटना में 2 जून की रात को क्या हुआ था
यह मामला 2 जून 2026 की रात का है, जब पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान 'खान ग्लोबल स्टडीज' (KGS) के बाहर लगभग 15-20 लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। इस भीड़ ने कोचिंग के सुरक्षाकर्मी चुनचुन कुमार के साथ बुरी तरह मारपीट की। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें खान सर के दो बॉडीगार्ड हवा में फायरिंग करते नजर आए। पुलिस ने इन दोनों बॉडीगार्ड्स को हिरासत में ले लिया और उनके हथियार फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिए। पूछताछ में सुरक्षाकर्मियों ने दावा किया था कि उन्होंने खान सर के "निर्देश" पर हवा में गोलियां चलाई थीं। मौके पर पुलिस को खान सर ने ही बुलाया था।इसके बाद, 4 जून को पटना के कदमकुआं थाने में खान सर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद से वह पुलिस की पहुंच से दूर (लापता) बताए जा रहे थे। लेकिन अब उन्हें अग्रिम ज़मानत मिल गई है।
अदालत का फैसला और कानूनी राहत- कोई दबावपूर्ण कार्रवाई न की जाए
खान सर के वकील अरविंद कुमार महावर ने पटना जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि जांचकर्ता इस मामले में खान सर से पूछताछ करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, लेकिन जब तक यह अंतरिम संरक्षण (गिरफ्तारी पर स्टे) प्रभावी है, तब तक उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई भी दंडात्मक या दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं की जा सकती।अदालत ने पटना पुलिस को मामले की केस डायरी और सबूत पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, इस मामले में पहले गिरफ्तार हो चुके प्रतिद्वंदी कोचिंग संस्थान 'ज्ञान बिंदु' के डायरेक्टर रौशन आनंद और दो अन्य (अभिषेक कुमार और गौरव कुमार) की जमानत याचिका पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पुलिस का मानना है कि यह पूरा विवाद कोचिंग संस्थानों के बीच आपसी रंजिश (Coaching Rivalry) का नतीजा है।
सरकारी नीतियों और पत्रकारों पर बरसे खान सर: अदालत से राहत मिलने के बाद मीडिया से बातचीत और अपने बयानों में खान सर ने अपनी छवि को धूमिल (malign) करने के प्रयासों पर गहरी नाराजगी और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सरकारी नीतियों की नाकामी और कुछ पत्रकारों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को आड़े हाथों लिया।
सरकारी नीतियों पर तीखा हमला: खान सर ने शिक्षा विभाग और सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य में कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने में नीतियां पूरी तरह विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि जब उनके संस्थान पर हमला हुआ और सुरक्षाकर्मी को पीटा गया, तब सुरक्षा देने के बजाय उलटे उन्हीं को फंसाने की कोशिश की गई। (बता दें कि इस घटना के बाद बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बयान दिया है कि सरकार अगले तीन महीनों के भीतर कोचिंग प्रतिद्वंद्विता को रोकने के लिए एक नई नीति तैयार करेगी)।
पत्रकारों और मीडिया ट्रायल पर निशाना: खान सर ने कुछ पत्रकारों और मीडिया घरानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना किसी पुख्ता सबूत और बिना जांच पूरी हुए कुछ पत्रकारों ने उन्हें "अपराधी" की तरह पेश करना शुरू कर दिया, जिससे समाज में उनकी वर्षों से कमाई गई छवि को गहरा धक्का लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीआरपी (TRP) और सनसनीखेज खबरें बनाने के चक्कर में मीडिया ने एकतरफा कहानियां दिखाईं और उनके बॉडीगार्ड्स द्वारा आत्मरक्षा में की गई हवाई फायरिंग को गलत तरीके से पेश किया।
खान सर के वकील ने भी स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल की इस हिंसक झड़प में कोई सीधी संलिप्तता नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।