प्रशांत किशोर
ब्राह्मण प्रशांत किशोर की दलितों-मुसलमानों से अपीलः चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर खुद ब्राह्मण हैं, लेकिन वो दलितों और मुसलमानों से जाति और धार्मिक आधार पर मतदान बंद करने और "अपने बच्चों के भविष्य" को ध्यान में रखने की अपील कर रहे हैं। लेकिन प्रशांत किशोर जिस जाति से आते हैं, वो खुद आंख बंद कर भाजपा को वोट देती है, उसके लिए प्रशांत किशोर का कोई संदेश नहीं है। यानी अगर दलित और मुस्लिम वोट बैंक के रूप में किसी पार्टी को वोट देते हैं तो उस पर सभी को ऐतराज है, लेकिन ऐतराज करने वाले अपने जाति समूह या समुदाय पर ध्यान नहीं देते जो खुलकर दक्षिणपंथी भाजपा का समर्थन करते हैं। प्रशांत किशोर ने दलितों और मुस्लिमों से जो अपील की है, उसकी खास वजह कुछ और भी है। 1990 के बाद से, बिहार का नेतृत्व उन नेताओं ने किया है जो सामाजिक न्याय की राजनीति से निकले हैं, चाहे वह आरजेडी के लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी हों, या वर्तमान मुख्यमंत्री और जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार हों। इन सभी की दलितों और मुस्लिमों में पहचान है। प्रशांत किशोर वहां अपनी जगह बनाना चाहते हैं।
मुस्लिमों को आकर्षित करने के लिए प्रशांत किशोर ने कहा है कि मुस्लिम बिहार की आबादी का 17% हैं, यादवों से 3% अधिक लेकिन उनके पास पूरे बिहार का कोई नेता नहीं है।
प्रशांत किशोर कुछ इस तरह की बात दलितों से भी कहते हैं। उनके नेताओं का कहना है कि पार्टियों ने दलित नेताओं का केवल "इस्तेमाल" किया है। दलित वोट वर्तमान में बिखरे हुए हैं क्योंकि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेता उन्हें अपने ढंग से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसीलिए प्रशांत किशोर दलित मुस्लिमों की 37 फीसदी आबादी को अपने मंच पर लाना चाहते हैं, ताकि आरजेडी और जेडीयू के वोट बैंक पर कब्जा किया जा सके।