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तेजस्वी का मुर्मू पर तंज- राष्ट्रपति चाहिए मूर्ति नहीं, कभी बोलते नहीं सुना

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू द्वारा कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं किए जाने पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि 'राष्ट्रपति भवन में हमें कोई मूर्ति तो नहीं चाहिए, हम राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं।' उन्होंने तो पत्रकारों से यहाँ तक कह दिया कि क्या कभी आपने मुर्मू को कुछ बोलते सुना है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शनिवार को शिवहर में एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल के जवाब में प्रतिक्रिया दे रहे थे। 

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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'हम राष्ट्रपति का चुनाव कर रहे हैं, राष्ट्रपति भवन में हमें कोई मूर्ति नहीं चाहिए। आपने यशवंत सिन्हा को हमेशा सुना होगा लेकिन एनडीए उम्मीदवार को कभी नहीं सुना। उम्मीदवार बनने के बाद से उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की है।'

बता दें कि राजद ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को समर्थन देने की घोषणा की है। बिहार में वाम दलों और कांग्रेस ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया है। एक दिन पहले ही दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने भी सिन्हा को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। हालाँकि राजद के सहयोगी जेएमएम ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा की है। 

बीजेपी प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने द्रौपदी मुर्मू पर तेजस्वी के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मुर्मू पर उनका बयान आदिवासी समाज का अपमान है। 

तेजस्वी यादव मुर्मू की आलोचना करने वाले पहले राजनेता नहीं हैं। हाल ही में कांग्रेस नेता अजय कुमार ने कहा था कि मुर्मू भारत के एक बहुत ही बुरे दर्शन का प्रतिनिधित्व करती हैं और उन्हें आदिवासी का प्रतीक नहीं बनाया जाना चाहिए। जब इस टिप्पणी पर विवाद हुआ था तो कांग्रेस नेता ने सफाई दी कि उन्होंने हमेशा कहा है कि मुर्मू एक सभ्य महिला हैं और उनकी आलोचना मुर्मू के बारे में नहीं बल्कि बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा के बारे में थी।

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एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उनके नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस की पुडुचेरी इकाई ने पहले मुर्मू को 'डमी राष्ट्रपति' कहा था।

विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि चुनाव असाधारण परिस्थितियों में हो रहा है। उन्होंने कहा, 'देश विभिन्न मोर्चों पर कई समस्याओं का सामना कर रहा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समस्या जिसका हम सामना कर रहे हैं, वह हमारे संविधान की रक्षा और सुरक्षा की है।' उन्होंने कहा कि चुनाव दो व्यक्तियों के बीच नहीं बल्कि दो विचारधाराओं के बीच का चुनाव है।

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क़मर वहीद नक़वी
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