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खेल के बहाने मुश्किलों से लड़ना सिखाती है 'छलांग'

फ़िल्म- छलांग

डायरेक्टर- हंसल मेहता

स्टार कास्ट- राजकुमार राव, नुसरत भारुचा जीशान अली अयूब, सतीश कौशिक, सौरभ शुक्ला, ईला अरुण

स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म- अमेज़ॉन प्राइम वीडियो

रेटिंग- 3.5/5

निर्देशक हंसल मेहता द्वारा निर्देशित वेब सीरीज़ 'स्कैम 1992' पिछले महीने रिलीज़ हुई थी, जिसकी चर्चा अभी तक सिनेमा की गलियों में चल रही है। सीरीज़ के बाद निर्देशक ने फ़िल्म पर 'छलांग' लगा दी है। हंसल मेहता और एक्टर राजकुमार राव की जोड़ी हिट हो चुकी है और अब हंसल मेहता ने अपनी फ़िल्म में खेलकूद को दिखाते हुए ज़िंदगी को लेकर मैसेज दिया है। जिसमें मुख्य भूमिका में राजकुमार राव हैं। एक्टर के अलावा नुसरत भारुचा, जीशान अयूब, सतीश कौशिक, सौरभ शुक्ला और अन्य स्टार्स भी लीड रोल में हैं। तो आइये जानते हैं फ़िल्म 'छलांग' की क्या है कहानी-

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फ़िल्म की कहानी

हरियाणा के झज्जर में सर छोटूराम स्कूल में पीटी टीचर हैं महेंदर उर्फ मोंटू (राजकुमार राव), जिनके पिता (सतीश कौशिक) वकील हैं। पिता के एक फ़ोन पर मोंटू को प्रिंसिपल ऊषा (ईला अरुण) ने नौकरी पर रख लिया है। मोंटू की नौकरी बस नाम की ही है, पीटी टीचर में जैसे न कोई गुण है और न ही वह बच्चों के खेलकूद पर कोई ख़ास ध्यान देता है। मोंटू दिनभर स्कूल टीचर शुक्ला जी (सौरभ शुक्ला) के साथ टहलता रहता है और उसकी ज़िंदगी ऐसे ही मस्त कट रही है। स्कूल में टीचर नीलिमा (नुसरत भरुचा) आती है, जो बच्चों को कम्प्यूटर पढ़ाती है। मोंटू को नीलिमा से लगाव होने लगता है लेकिन इसी बीच स्कूल में दूसरे पीटी टीचर आईएम सिंह (जीशान अयूब) की भी एंट्री होती है।

सीनियर पीटी टीचर के आने से मोंटू की नौकरी तो ख़तरे में पड़ती ही है, साथ ही नीलिमा भी मिस्टर सिंह से इंप्रेस होने लगती है और इससे वह परेशान हो जाता है। नौकरी को बचाने के लिए मिस्टर सिंह और मोंटू में एक शर्त लग जाती है, जिसकी भी टीम बास्केट बॉल, कबड्डी और रिले रेस प्रतियोगिता में जीतेगी वही पीटी टीचर स्कूल में रहेगा। अब सवाल यह है कि जिस मोंटू को खेलकूद में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी, वह यह प्रतियोगिता कैसे जीतेगा? इसके अलावा क्या नीलिमा मोंटू से इंप्रेस होगी या मिस्टर सिंह के साथ चली जायेगी? यह सब जानने के लिए आपको अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर जाना पड़ेगा और 2 घंटे की फ़िल्म 'छलांग' को देखना पड़ेगा।

chhalaang review - Satya Hindi

निर्देशन

निर्देशक हंसल मेहता एक मंझे हुए निर्देशक हैं और उनकी फ़िल्में हमेशा से ही लीक से हटकर होती है। राजकुमार राव के साथ फ़िल्म शाहिद, ओमर्टा, सिटी लाइट्स और अलीगढ़ जैसी फ़िल्में बना चुके हंसल मेहता ने इस बार खेल प्रतियोगिता के ईर्द-गिर्द कहानी को बुना है। निर्देशक ने फ़िल्म में खेलकूद को लेकर तो मैसेज दिया ही है साथ ही जिंदगी में किस तरह से आगे बढ़ते रहना चाहिए यह भी बताया है। फ़िल्म का निर्देशन काफ़ी अच्छे से किया गया है और इसकी सिनेमैटोग्राफ़ी भी कमाल की है। फ़िल्म 'छलांग' के गाने कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाते हैं।

एक्टिंग

राजकुमार राव अब सीरियस फ़िल्मों की लीग से हट चुके हैं और अब वह कॉमेडी फ़िल्मों में भी कमाल की एक्टिंग कर रहे हैं। आलसी और कामचोर पीटी टीचर के किरदार को राजकुमार राव को बख़ूबी निभाया है। नुसरत भारुचा ने अध्यापिका के किरदार में काफ़ी अच्छी एक्टिंग की है। जीशान अयूब ने काफ़ी शानदार एक्टिंग की है और अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। सतीश कौशिक, सौरभ शुक्ला और ईला अरुण ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर फ़िल्म में चार चांद लगा दिये हैं। इसके अलावा जतिन शर्मा, बलजिंदर कौर, सुपर्णा मारवाह, राजीव गुप्ता, नमन जैन और अन्य स्टार्स ने भी अच्छी एक्टिंग की है।

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फ़िल्म 'छलांग' में भले ही खेल प्रतियोगिता को लेकर कहानी गढ़ी गई हो लेकिन फ़िल्म में यह भी बताया जाता है कि ज़िंदगी में हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। कोई भी काम शुरू करें तो उसे मन लगाकर पूरा करना चाहिए और मंजिल मिलने के पहले आने वाली मुश्किलों का डटकर सामना करना चाहिये। इसके अलावा फ़िल्म में यह भी बताया जाता है कि लोग सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, साइना नेहवाल, विश्वनाथन आनंद और कपिल देव की तरह अपने बच्चों को बढ़ते देखना चाहते हैं लेकिन उनके मां-बाप बनकर सोचना नहीं चाहते, बच्चों को खेल में आगे बढ़ने के लिए सपोर्ट नहीं करना चाहते।

फ़िल्म एक हल्की-फुल्की कॉमेडी के साथ पर्दे पर दिखाई गई है, जिसमें रोमांस को भी ज़्यादा जगह नहीं दी गई है। फ़िल्म की कहानी अच्छी है और फर्स्ट हाफ में धीमी चलती कहानी सेकंड हाफ में ट्रैक पकड़ती है लेकिन इसके साथ ही बीच में कहानी भागती हुई भी नज़र आती है। फ़िल्म की इन कमियों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है और आप अपने परिवार के साथ फ़िल्म 'छलांग' को देख सकते हैं।

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दीपाली श्रीवास्तव
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