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मनमोहन सिंह पर बनी फ़िल्म विवादों में, कांग्रेस रिलीज़ के ख़िलाफ़

यह ट्रेलर है फ़िल्म 'द एक्सीडेंट प्राइम मिनिस्टर' का।  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बनी यह फ़िल्म विवादों के केंद्र में आ गई है। इसके साथ ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने एक दूसरे पर हमला कर दिया है। 

विवाद की जड़ में बीजेपी का ट्वीट है। बीजेपी ने एक साथ फ़िल्म की तारीफ़ और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह फ़िल्म दिलचस्प कहानी है उस परिवार की, जिसने देश को 10 साल तक बंधक बना कर रखा। उसने यह भी  पूछा है कि क्या डा. मनमोहन सिंह सिर्फ एक रीजेंट थे जो प्रधामंत्री की कुर्सी पर तब तक बैठे रहे जब तक इसके लिए दूसरे तैयार नहीं हो गए?

महाराष्ट्र कांग्रेस ने माँग की है कि फ़िल्म रिलीज़ करने से पहले कांग्रेस को दिखाया जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि फ़िल्म में जानबूझ कर कांग्रेस, गाँधी परिवार और मनमोहन सिंह के बारे में ग़लत बातें दिखाई गई हैं। महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सत्यजित ताम्बे पाटिल ने फ़िल्म के प्रड्यूसर को चिट्ठी लिख कर कहा है कि 11 जनवरी को रिलीज़ होने से पहले फ़िल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग कांग्रेस के नेताओं के लिए रखी जाए। 

फ़िल्म में सोनिया गाँधी की भूमिका जर्मन अभिनेत्री सुज़ेन बर्नर्ट और प्रियंका की भूमिका अहाना कमरा ने निभाई है। इसके अलावा अर्जुन माथुर राहुल गाँधी और अक्षय खन्ना संजय बारू बने हैं। फ़िल्म पर पहले भी चर्चा हुई थी। इसमें अनुपम खेर के अभिनय की तारीफ़ की गई थी। खेर मंझे हुए कलाकार हैं। मूल रूप से अराजनीतिक खेर ने कई बार ऐसी बातें कही है, जिससे  लगता है कि उनकी सहानुभूति बीजेपी के प्रति है। 
यह फ़िल्म मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' पर आधारित है। इसमें मनमोहन सिंह की भूमिका अनुपम खेर ने की है।  मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पत्रकार बारू को अपना मीडिया सलाहकार नियु्क्त किया, पर बाद में बारू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। उसके बाद उन्होंने यह पुस्तक लिखी। लेकिन यह किताब लिखने के पहले उन्होंने डॉक्टर सिंह की राय नहीं ली थी न ही उन्हें किताब दिखाई थी। इस किताब पर कांग्रेस, सोनिया गाँधी और सिंह की काफ़ी किरकिरी हुई थी, क्योंकि इसमें मनमोहन सिंह के कामकाज और सोनिया गाँधी के हस्तक्षेप के बारे में काफ़ी कुछ लिखा गया था। 
डॉक्टर सिंह ने इस फ़िल्म पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल पूछे जाने पर सिर्फ़ इतना कहा, 'नो कमेंट!'  लेकिन इसके पहले एक बार उन्होने कहा था कि वे 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ही नहीं, एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी थे।' फ़िल्म पर तो उनकी राय का पता नहीं चला, पर इसी नाम से छपी किताब से खुश नहीं थे।  
विवादों की परवाह किए बग़ैर काेंग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी मनमोहन सिंह के साथ पार्टी की स्थापना दिवस मनाते हुए दिखे। उन्होंने इस मौके पर जो ट्वीट किया, उसमें एक तस्वीर में उनके साथ सिंह भी दिख रहे हैं। 
फ़िल्म में मनमोहन सिंह की भूमिका निभाने वाले अनुपम खेर ने भी ट्वीट किया है। पर उन्होंने महज इतना कहा कि लोग उनकी  जिस फ़िल्म का बहुत दिनोें से इंतजार कर  रहे थे, वह रिलीज़ होने वाली है। 
अनुपम खेर ने यह भी कहा है कि लोग फ़िल्म का जितना विरोध करेंगे, उसका उतना ही प्रचार होगा। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किताब तो बहुत पहले छप कर आई, उस समय तो उसका विरोध नहीं हुआ था, फिर आज इतनी हाय तौबा क्यों?
कुछ लोग ट्वीटर पर बीजेपी कौ भी निशाने पर ले रहे है ंऔर उसकी नीयत पर सवाल कर रहे हैं। कुछ लोगों ने पूछा है कि बीजेपी का आधिकारिक ट्वीटर हैंडल भला फ़िल्म रिलीज़ के बारे में जानकारी कब से देने लगा? साफ़ है, बीजेपी चुनाव के पहले विपक्ष को बदनाम करना चाहती है।  
केद्रीय खेलकूद मंत्री राज्यवर्द्धन राठौड़ ने कांग्रेस पर तंज करते हुए ट्वीट किया कि वह तो हमेशा आज़ादी की बात करती रही है, अब क्या हुआ। 
इस फ़िल्म के अपने राजनीतिक निहितार्थ हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। यह फ़िल्म आम चुनावों के ठीक पहले आ रही है। इसमें कांग्रेस पार्टी और सोनिया गाँधी की जो छवि पेश की गई है, वह कांग्रेस के लिए असुविधानजक है। बीजेपी इसका पूरा फ़ायदा उठाएगी। वह यह प्रचारित करेगी कि मनमोहन सिंह के नाम पर सोनिया गाँधी शासन कर रही थीं। वह चुनाव के दौरान इसे मुद्दा बना सकती है और सोनिया को कटघरे में खड़ा कर सकती है। 
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