क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।
आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई जानकारों, देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य ने साफ़ कर दिया है कि आप को तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फ़ैसला लेने वाले सात लोगों की सदस्यता ख़त्म होगी। ये बहुत साफ़ तौर पर है।'
संजय सिंह ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे संविधान के जानकारों की राय लेकर राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक याचिका भेजी है जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक इन सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए, इसके बारे में अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय से मांग की है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई करके अपनी ओर से न्यायपूर्ण फैसला दें। संविधान की 10वीं अनुसूची में भी साफ़ तौर पर लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी तोड़फोड़ की इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।

राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा

इससे पहले आम आदमी पार्टी ने अपने सात राज्‍यसभा सांसदों के बागी होने और बीजेपी में शामिल होने के खिलाफ बड़ा क़दम उठाने का संकेत दिया था। पहले रिपोर्ट आई थी कि पार्टी राज्‍यसभा के सभापति और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग अपील करने वाली है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने सभापति से अपील कर दी है और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी से मुलाक़ात के लिए समय मांगा है।
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क्या हुआ घटनाक्रम?

आप के पूर्व राज्‍यसभा उपनेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्‍यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए वे एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून से बच सकते हैं।

बागी सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हो गए। स्वाति मालीवाल ने शनिवार को बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि की।

आप के इन सात सांसदों की बगावत के बाद अब आप के पास राज्‍यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल।

आप की पूरी तैयारी

इन सात सांसदों की बगावत पर आप के वरिष्ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था, 'यह गैरकानूनी, गलत, असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। हम इनकी पूरी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।'

संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग रहे हैं और वे पंजाब से चुने गए 6 बागी सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे। हालांकि, संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
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क्या कहते हैं संविधान के विशेषज्ञ?

वरिष्ठ वकील और संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल ने एचटी से कहा कि पार्टी खुद पहले मर्जर का फैसला नहीं ले ले तब तक कोई भी खुद से मर्जर नहीं कर सकता। पार्टी स्तर पर रेजॉल्यूशन पास करना ज़रूरी है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एचटी से कहा कि ये 7 सांसद अयोग्यता से बच नहीं सकते। हालाँकि, सांसदों को वापस बुलाने यानी हटाने के अधिकार पर पूर्व पंजाब एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने साफ़ किया कि 'राइट टू रिकॉल' यानी वोटर द्वारा सांसद को बीच में हटाने का अधिकार संविधान में कहीं नहीं है।

ऑपरेशन लोटस का आरोप

आप नेताओं ने बीजेपी पर 'ऑपरेशन लोटस' चलाने का आरोप लगाया है। संजय सिंह ने कहा कि अशोक मित्तल पर ED छापे के बाद चीजें साफ हो गईं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी उन्हें चोर कह रही थी, अब वे साफ हो गए। बीजेपी की वॉशिंग मशीन काम कर रही है।' दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र की एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर दबाव डालने के लिए हो रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से हौसला बनाए रखने की अपील की। भगवंत मान ने भी बीजेपी पर AAP तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि पंजाब के लोग इन 7 नेताओं को कभी माफ नहीं करेंगे।
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बीजेपी का जवाब

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सच्चदेवा ने आप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि AAP नेतृत्व निराशा में भड़क रहा है। उन्होंने कहा कि ये 7 सांसद पढ़े-लिखे और सम्मानित लोग हैं, जो AAP में काफी समय से दम घुटने की वजह से चले गए। उन्होंने कहा, 'वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर गए हैं।'

पंजाब चुनाव से पहले क्यों अहम है यह घटना?

यह विद्रोह दिल्ली में आप की सत्ता जाने के एक साल बाद हुआ है और 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। AAP की राज्‍यसभा में ताकत बहुत कम हो गई है। पार्टी अब अपने बचे हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आप ने साफ़ कहा है कि वह कानूनी और संवैधानिक रास्ते से इस मामले को लड़ेंगी। पूरी जांच और फैसले आने में समय लग सकता है।

यह घटना भारतीय राजनीति में दलबदल और पार्टी आंतरिक कलह की एक नई मिसाल बन गई है। आम आदमी पार्टी अब मुश्किल दौर से गुजर रही है, लेकिन उसके नेता कह रहे हैं कि वे हार नहीं मानेंगे और लड़ाई जारी रखेंगे।