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कोर्ट के आदेश के बाद कथित शराब घोटाला हवा-हवाई निकला: आप

आबकारी नीति से जुड़े मामले में दिल्ली की एक अदालत की टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर साज़िश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि अब साफ़ हो गया कि आबकारी मामला हवा हवाई निकला! आप नेता और सांसद संजय सिंह का यह बयान तब आया है जब दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में दो आरोपियों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनके ख़िलाफ़ मामले को प्रथम दृष्टया 'वास्तविक' माने जाने के लिए सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

कोर्ट के फ़ैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें आप नेता संजय सिंह ने दावा किया कि बीजेपी का तथाकथित शराब घोटाला 'हवा हवाई' निकला! उन्होंने कहा, 'कोर्ट के आदेश के बाद पूरी दुनिया को पता चल गया कि शराब घोटाला झूठ है। पीएम मोदी के कहने पर केजरीवाल जी को बदनाम करने की गहरी साज़िश रची गई थी।'

उन्होंने दावा किया कि ईडी का आरोप है- राजेश जोशी के माध्यम से 30 करोड़ लेकर गोवा चुनाव में ख़र्च किया गया। आप नेता ने दावा किया कि 'लेकिन कल इडी ने कोर्ट में कहा कि आप ने केवल 19 लाख ख़र्च किये।'

संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कोर्ट ने कहा - ये घोटाला फ़र्ज़ी है। 30 करोड़ के साक्ष्य नहीं हैं तो आरोपियों को गिरफ़्तार क्यों किया है? कोर्ट ने राजेश जोशी, गौतम मल्होत्रा को जमानत दी। पीएम मोदी, केजरीवाल जी को बदनाम करने की साज़िश रचने के लिए माफ़ी मांगें।'

संजय सिंह ने दावा किया, 'चंदन रेड्डी के कान फाड़ दिए, जबरदस्ती बयान लिया! अरुण पिल्लई से जबरदस्ती बयान लिया! बीजेपी वाले चिल्लाते रहे टीवी पर 14 फोन तोड़ दिए मनीष सिसोदिया ने। सारे फोन जिंदा हैं! ईडी को मानहानि नोटिस दिया तो कहते गलती हो गई लिखने में। पीएमओ को माफ़ी मांगनी चाहिए!'
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आप सांसद ने कहा, 'ईडी सबको नोटिस भेजती है, मैंने ईडी को नोटिस भेज दिया। ईडी ने लिखित में माना कि राहुल सिंह लिखना था, लिखा संजय सिंह गया...। बेईमानो, कभी नीरव मोदी की जगह नरेंद्र मोद लिख दो तो मुश्किल हो जाएगी...।'

बहरहाल, संजय सिंह का बीजेपी पर यह हमला तब हुआ है जब इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दो आरोपियों को राहत दी है। विशेष न्यायाधीश एम के नागपाल ने राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा को दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत दी। इन्हीं जजों ने 28 अप्रैल को मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका और 31 मार्च को सीबीआई द्वारा जांच की जा रही संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

जोशी की जमानत याचिका के संबंध में अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह विचार है कि सबूत यह मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि उनके खिलाफ मामला वास्तविक है या उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी ठहराया जाए।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार गौतम मल्होत्रा पर अदालत ने कहा कि मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर अभियोजन पक्ष के मामले को 'प्रथम दृष्टया एक वास्तविक मामला नहीं माना जा सकता है'।

न्यायाधीश ने 6 मई को पारित आदेश में कहा कि केवल यह आशंका कि आरोपी फिर से अपराध का सहारा ले सकता है, जमानत का विरोध करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने गौर किया कि जोशी शराब के कारोबार में नहीं थे और यह स्वीकार किया गया कि वह किसी भी उस बैठक में भागीदार नहीं थे, जो कथित रूप से अन्य सह-अभियुक्तों या साजिशकर्ताओं के बीच आबकारी नीति या इसके कार्यान्वयन में आपराधिक साजिश रचने के संबंध में हुई हो।

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अदालत ने यह भी गौर किया कि जोशी पर किसी क्षेत्र की 'दक्षिणी लॉबी' या 'शराब लॉबी' का सदस्य होने का भी आरोप नहीं है और इसलिए, माना जाता है कि वह उन लोगों में शामिल नहीं हैं, जिन पर कथित रूप से सह-आरोपी मनीष सिसोदिया या उनके अन्य सहयोगी को घूस देने या रिश्वत पाने का आरोप है।

ईडी के इस दावे पर कि जोशी लगभग 20-30 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत राशि के हस्तांतरण में शामिल थे, जिसका कथित तौर पर इस्तेमाल 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में आप के चुनाव अभियान में किया गया था, अदालत ने कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है जो इन भुगतानों से लिंक बताए।

बता दें कि आबकारी नीति मामले में ही मनीष सिसोदिया को 9 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने 28 अप्रैल को मामले में उनकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि सबूत प्रथम दृष्टया 'अपराध में उनकी संलिप्तता की बात करते हैं'।

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क़मर वहीद नक़वी
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