दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अधिकारियों के तबादले के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन बाकी किसी पुलिसकर्मी पर एक्शन नहीं हुआ। पुलिस और वकीलों में तनाव बढ़ रहा है।
दिल्ली पुलिस के एसीपी मानस्वी वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस में अधिकारियों के तबादले को लेकर उठे असंतोष ने अब गंभीर रूप ले लिया है। पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने ही विभाग के अधिकारियों के तबादले के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सोमवार को दिल्ली पुलिस के करीब 150 कर्मियों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई है। उधर, वकीलों की संस्था ने पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बोली गई भाषा पर सख्त आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
पुलिसकर्मियों ने शाहदरा पुलिस स्टेशन में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी पोस्टिंग पर वापस भेजा जाए।
पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की पुष्टि की। हालांकि, निलंबन के संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कार्रवाई प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के सिलसिले में की गई है।
पुलिस और वकीलों के बीच तनाव जारी
रोहिणी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव तहलान ने आज मंगलवार 3 नवंबर को कहा कि “कल पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) में विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पूरी तरह से अस्वीकार्य है और हम इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैंने कल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था। वकीलों का स्पष्ट रुख यह है कि ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वकीलों को 'काले कोट वाले लोग' कहकर उन्होंने भारत के चीफ जस्टिस से लेकर जिला और तालुका अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले आम वकीलों तक सभी को इसमें शामिल कर लिया है।
बार अध्यक्ष ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान वहां कहा गया कि इन काले कोट वाले लोगों से निपटा जाना चाहिए। किसी ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें एके-47 से गोली मार देनी चाहिए। लोकतंत्र में ऐसी भाषा पूरी तरह से अस्वीकार्य है और मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर जाती है। कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। अगर पुलिसकर्मी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं या गुंडागर्दी की बात करते हैं, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। यही कारण था कि वकीलों में आक्रोश था और वे कल हड़ताल पर चले गए। हमने पुलिस आयुक्त को भी स्पष्ट संदेश दिया था कि तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई की और हम इसके लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि, कुछ अन्य लोग भी थे। जिन पुलिस अधिकारियों की भाषा भी अनुचित थी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को दिल्ली के शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक घटना से हुई थी। यहां पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच झड़प के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल को सिर में गंभीर चोट लगने की खबर सामने आई थी। घटना के बाद पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया। शाहदरा और दूसरे जिला अदालतों के वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की मांगों के बीच दिल्ली पुलिस ने 28 अक्टूबर को दो अधिकारियों का तबादला कर दिया।
- - ACP मनस्वी वशिष्ठ: गांधी नगर में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर के पद पर तैनात थे। उन्हें स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में भेज दिया गया।
- - इंस्पेक्टर अरुण कुमार: शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO थे। उन्हें सिक्योरिटी यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया। इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर इन फैसलों को लेकर असंतोष उभरने लगा।
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनः सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस के करीब 150 कर्मी, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर दोनों अधिकारियों के तबादले रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने नारे लगाए: “वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे।”
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिसकर्मियों को अदालतों और पुलिस थानों में ड्यूटी के दौरान धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप था कि वकीलों के एक वर्ग की ओर से पुलिस अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाया जाता है। प्रदर्शन में शामिल ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कहा कि यह प्रदर्शन पुलिसकर्मियों की ओर से स्वाभाविक रूप से शुरू किया गया था और वह भी इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराने की मांग की थी और इसके लिए औपचारिक आवेदन भी दिया गया था। वशिष्ठ के मुताबिक, पुलिस थानों में सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि अगर पुलिस स्टेशन ही सुरक्षित नहीं होंगे तो समाज में सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।
पुलिस कमिश्नर से मुलाकात, पांच मांगें रखीं
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा समेत अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की मांग की और पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के साथ 'संपर्क सभा' आयोजित करने पर जोर दिया। बाद में पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पुलिस मुख्यालय में संपर्क सभा आयोजित की। इसमें विशेष पुलिस आयुक्तों और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों की शिकायतें सुनीं।करीब सात पुलिसकर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल ACP वशिष्ठ के नेतृत्व में पुलिस कमिश्नर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने पांच प्रमुख मांगें रखीं।
इनमें शामिल थीं:
- 1. शाहदरा पुलिस स्टेशन की घटना में कथित तौर पर शामिल वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- 2. पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार करने वाले वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
- 3. अदालत परिसरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किया जाए।
- 4. पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले वकीलों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- 5. शाहदरा पुलिस स्टेशन की घटना में दर्ज FIR के आधार पर जांच और आरोपपत्र दाखिल करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।
पुलिसकर्मियों ने यह भी मांग की कि अदालतों और पुलिस थानों में वकीलों के साथ होने वाले विवादों से निपटने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न रैंकों के पुलिसकर्मियों की शिकायतों और चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुना। बयान के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने विभाग की गरिमा, वर्दी के सम्मान और शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्थित तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस कमिश्नर ने पुलिसकर्मियों के पेशेवर रवैये, प्रतिबद्धता और अनुशासन की सराहना की। उन्होंने खास तौर पर कानून-व्यवस्था की ड्यूटी और BRICS समिट के सफल आयोजन में पुलिसकर्मियों की भूमिका की तारीफ की। पुलिस कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि पुलिसकर्मियों की वास्तविक शिकायतों पर उचित और समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि बार एसोसिएशनों और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में एक संयुक्त समन्वय समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। यह समिति जिला स्तर और पुलिस मुख्यालय में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का समाधान तलाशेगी। इसके अलावा, प्रमोशन, MACP, आवास और अन्य सेवा संबंधी मामलों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
2019 के पुलिस प्रदर्शन की यादें फिर ताजा
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों का यह प्रदर्शन नवंबर 2019 में हुए विरोध प्रदर्शन की याद दिलाता है। उस समय दिल्ली पुलिस के 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य वकीलों के साथ विवाद और पुलिसकर्मियों पर हमलों के विरोध में मुख्यालय के बाहर जमा हुए थे। तिस हजारी अदालत में पार्किंग विवाद के बाद पुलिस और वकीलों के बीच टकराव ने उस समय गंभीर रूप ले लिया था। 2019 के प्रदर्शन को वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया था। उस दौरान पुलिसकर्मियों को कानूनी और चिकित्सा सहायता देने का भरोसा दिया गया था। इस बार भी पुलिसकर्मियों ने विभाग के भीतर शिकायतों के समाधान के लिए एक औपचारिक व्यवस्था की मांग की है।