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दिल्ली में होगा आम आदमी पार्टी का मेयर: आदेश गुप्ता

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली में अगला मेयर आम आदमी पार्टी का होगा। उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि बीजेपी का यह फैसला है कि वह एक मजबूत विपक्ष की भूमिका अदा करेगी। 

एमसीडी के 250 वार्ड में आम आदमी पार्टी को 134 वार्ड में जीत मिली है जो बहुमत के लिए जरूरी 126 के आंकड़े से थोड़ा सा ही ज्यादा है। बीजेपी को 104, कांग्रेस को 9 और अन्य को 3 वार्डों में जीत मिली है। इस तरह 15 साल से एमसीडी की सत्ता में बैठी बीजेपी की विदाई हो गई थी।

आदेश गुप्ता ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि दिल्ली के मतदाताओं ने बीजेपी को जो भूमिका दी है उस भूमिका को अदा करेंगे। 

गुप्ता ने कहा है कि चूंकि बहुमत आम आदमी पार्टी को मिला है तो मेयर भी उन्हीं का होगा। 

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बताना होगा कि आदेश गुप्ता का यह बयान बीजेपी नेताओं के बीते दिनों आए उन बयानों से बिल्कुल उलट है जिनमें कहा गया था कि भले ही नगर निगम में उनकी सीटें कम आई हैं लेकिन मेयर बीजेपी का ही बनेगा। इन दावों को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा था कि बीजेपी उनके पार्षदों में तोड़फोड़ की कोशिश कर रही है। 
बीजेपी नेताओं का कहना था कि ज्यादा वार्ड जीतने का यह मतलब नहीं है कि उसी पार्टी का मेयर होगा। लेकिन अब बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि वह एमसीडी में विपक्ष में बैठेगी।

अप्रैल में होगी बैठक!

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एमसीडी के एक अफसर ने बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल नगर निगम की बैठक अप्रैल 2023 में ही बुला सकते हैं क्योंकि अप्रैल में ही निगम का नया कार्यकाल शुरू होगा और तब तक निर्वाचित पार्षदों के पास कोई ताकत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले 1997 में भी ऐसा ही हुआ था और तब फरवरी में हुए चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी लेकिन नगर निगम की पहली बैठक अप्रैल में हो सकी थी। 

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नगर निगम की बैठक से पहले सभी 250 पार्षदों को शपथ दिलाई जाएगी और इसके बाद मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। हालांकि एमसीडी में आम आदमी पार्टी के प्रभारी दुर्गेश पाठक ने कहा है कि क्योंकि चुनाव हो चुके हैं इसलिए नगर निगम की पहली बैठक को अप्रैल तक टाले जाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता और अगर ऐसा कुछ होता है तो उनकी पार्टी उस हिसाब से आगे की कार्रवाई करेगी। 

बता दें कि साल 2012 तक दिल्ली में एकीकृत नगर निगम था लेकिन दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार ने इसे उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी नगर निगमों में बांट दिया था। मौजूदा केंद्र सरकार ने इन्हें फिर से एकीकृत कर दिया था। 

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