केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि दिल्ली की जहरीली हवा से लोगों की उम्र 10 साल कम हो सकती है। दिल्ली में इस समय बीजेपी सरकार है। आम आदमी पार्टी की सरकार के समय बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया था।
दिल्ली की हवा फिर से चर्चा में है, और इस बार केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राजधानी के "भयंकर प्रदूषण" पर गहरी चिंता जताई है। गडकरी ने कहा कि दिल्ली में केवल तीन दिन ठहरने से ही इंफेक्शन होने का खतरा है, और यह प्रदूषण दिल्लीवासियों की औसत आयु को 10 साल तक कम कर रहा है। बीजेपी ने दिल्ली राज्य के चुनाव से पहले और सरकार में आने के बाद प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने का वादा किया था। क्योंकि इससे पहले आम आदमी पार्टी की सरकार में बीजेपी दिल्ली के प्रदूषण पर पूर्व की केजरीवाल सरकार को घेरती रही है। लेकिन अब जब दिल्ली में बीजेपी की सरकार है तो गडकरी ने यह मुद्दा उठा दिया है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "दिल्ली में प्रदूषण इतना भयंकर है कि वहां तीन दिन रहने से इंफेक्शन हो सकता है। मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, दिल्ली का प्रदूषण लोगों की औसत उम्र को 10 साल तक कम कर रहा है।" गडकरी ने पहले भी दिल्ली की हवा को अपनी सेहत के लिए हानिकारक बताया था। दिसंबर 2024 में उन्होंने कहा था कि दिल्ली आने से पहले उन्हें दो घंटे प्राणायाम करना पड़ता है, क्योंकि प्रदूषण के कारण उन्हें इंफेक्शन हो जाता है।
गडकरी ने प्रदूषण के लिए जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) पर भारत की निर्भरता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि भारत हर साल 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात करता है, जो न केवल अर्थव्यवस्था पर बोझ है, बल्कि प्रदूषण का भी प्रमुख कारण है। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और हरित हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की वकालत की। गडकरी ने कहा, "अगर हमारी सरकार दिल्ली में बीजेपी की मशीनरी को और मजबूत करती है, तो हम पांच साल में दिल्ली को प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से मुक्त कर देंगे।"
दिल्ली का प्रदूषण
दिल्ली में आए दिन AQI “बहुत खराब” या “गंभीर” श्रेणी में चला जाता है, जिससे हवा सभी के लिए खतरनाक हो जाती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। सर्दियों में हालात बदतर हो जाते हैं। सर्दियों में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 400 तक पहुँच जाता है, जिसे "गंभीर" श्रेणी में रखा जाता है। हवा में अक्सर PM2.5 का उच्च स्तर होता है - छोटे कण जो फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर देते हैं।
हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रदूषण को लेकर कई वादे किए थे। नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक कार्यक्रम में कहा, "इस सर्दी में आपको दिल्ली छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।" उन्होंने प्रदूषण और यमुना नदी की सफाई को अपनी प्राथमिकता बताया। गुप्ता ने तीन साल के भीतर यमुना को स्वच्छ करने का वादा किया और कहा, "तीन साल बाद आप यमुना पर क्रूज का आनंद ले सकेंगे।"
बीजेपी के 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में प्रदूषण को आधा करने का लक्ष्य रखा गया था। घोषणापत्र में निम्नलिखित कदमों का उल्लेख किया गया:
दिल्ली स्वच्छ हवा मिशन: 2030 तक दिल्ली का औसत AQI आधा करने और PM 2.5 व PM 10 के स्तर को 50% तक कम करने का लक्ष्य।
रोड-स्वीपिंग और पानी छिड़काव मशीनें: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रोड-स्वीपिंग मशीनें और प्रत्येक नगरपालिका वार्ड में पानी छिड़काव मशीनें तैनात की जाएंगी, खासकर आनंद विहार, आरके पुरम और मुंडका जैसे अति प्रदूषित क्षेत्रों में।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों, कारों और स्कूटरों को बढ़ावा देना, क्योंकि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली के कुल प्रदूषण का 40% है।पराली जलाने पर रोक: पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर पराली जलाने की समस्या का समाधान करना।
सीएम रेखा गुप्ता ने 25 मार्च 2025 को दिल्ली का बजट पेश करते हुए प्रदूषण से निपटने के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए। उन्होंने एक एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा, जो वायु गुणवत्ता, जल प्रदूषण, शोर और कचरा प्रबंधन की रीयल-टाइम निगरानी करेगा।
दिल्ली में प्रदूषण को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच लंबे समय से तकरार चल रही है। नवंबर 2024 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी ने केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश) पर पराली जलाने को नियंत्रित न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसे "मेडिकल इमरजेंसी" करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली का प्रदूषण एक जटिल समस्या है, जिसके लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की जरूरत है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, जनवरी 2025 में दिल्ली का औसत PM 2.5 स्तर 165 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, और शहर में 23 दिन "बहुत खराब" AQI के साथ गुजरे। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना क्षेत्रीय सहयोग के, जैसे कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर रोक, दिल्ली की हवा को साफ करना मुश्किल होगा। इसके अलावा, दिल्ली में बढ़ते वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक उत्सर्जन भी चुनौतियां बढ़ा रहे हैं। गडकरी ने सितंबर 2024 में कहा था कि अगले दो सालों में परिवहन से होने वाले प्रदूषण को 50-60% तक कम किया जाएगा, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों की लागत को डीजल बसों से कम करने पर जोर दिया गया।