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पुलिस की ऐसी क्रूरता, पीट-पीटकर बेजान कर दो और फिर गवाओ राष्ट्रगान!

दिल्ली के जाफराबाद में सोमवार को हिंसा के बीच एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जो आपको झकझोर देगा। कुछ युवाओं पर क्रूरता! वह भी देशभक्ति के नाम पर। सड़क पर कुछ युवा ऐसे पड़े हुए हैं मानो बेजान हों। शायद काफ़ी ज़्यादा पीटा गया हो। वर्दी में कुछ लोग डंडे से तो कुछ हाथ-पैर से मारते हुए कहते हैं देशभक्ति दिखाओ। वीडियो में युवा राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाते सुने जा सकते हैं। उनसे जबरन गवाया जा रहा है। कोई पुलिसकर्मी कहता है 'अच्छी तरह गा'। कोई कहता है राष्ट्रगान गा तो कोई कहता है वंदे मातरम गा। फिर आवाज़ आती है 'आज़ादी' 'आज़ादी'। इस बीच वे उनकी पिटाई करते रहते हैं। इस वीडियो में पुलिसकर्मियों का चेहरा नहीं दिखता। 

इस वीडियो को जेएनयू में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन यानी डीएसएफ़ की एक्टिविस्ट स्वाति सिंह ने ट्वीट किया है और उन्होंने इस तरह से राष्ट्रगान गवाए जाने की आलोचना की है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना की। हालाँकि उन्होंने यह साफ़ नहीं किया है कि यह वीडियो किस जगह का है और कब का है। टीवी शो 'सावधान इंडिया' के होस्ट रहे अभिनेता सुशांत सिंह ने इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा है, 'आत्मा मर चुकी है देश की। इस वीडियो से कहीं ज़्यादा शर्मनाक यह है कि एक बहुत बड़ी भीड़ इसे देख ख़ुशी से पागल हुई जा रही है। ख़त्म कर दिया है देश को।'

ये सुशांत सिंह वही हैं जिन्होंने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का न सिर्फ़ समर्थन किया है बल्कि वह ख़ुद इसमें शामिल भी रहे हैं। वह इस पर अपनी बेबाक राय रखते रहे हैं। जब वह प्रदर्शन में शामिल हुए थे उसी दौरान ख़बर आई थी कि उन्हें टीवी शो 'सावधान इंडिया' से निकाल दिया गया है। तब उन्होंने कहा था, '...मेरा बड़ा सामान्य सा सिद्धांत है- मैं अपना टैलेंट बेचता हूँ अपना ईमान नहीं। जब मेरे बच्चे बड़े होंगे और मुझसे पूछेंगे कि जब छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा था तब आप कहाँ थे तब मेरे पास उसका उत्तर होना चाहिए।'

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हालाँकि, जो यह ताज़ा वीडियो आया है उसकी यह पुष्टि फ़िलहाल नहीं हो पाई है कि क्या यह जाफराबाद-मौजपुर में हिंसा के दौरान का है या नहीं, लेकिन जैसा कि ट्वीट से लगता है कि यह उसी दौरान का है। बता दें कि हिंसा रविवार को तब शुरू हुई जब जाफराबाद में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों और नागरिकता क़ानून के समर्थन में रैली निकालने वाले आमने-सामने आ गए। सीएए के समर्थक चाहते थे कि विरोध करने वाले लोग अपना प्रदर्शन ख़त्म कर सड़क को खाली कर दें। सड़क पर बैठ कर किया जा रहा यह प्रदर्शन रविवार को तब तक शांतिपूर्ण था जब तक कि बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों के विरोध में वहाँ नागरिकता क़ानून के समर्थन में रैली नहीं निकाली थी। बाद में उन्होंने चेतावनी भी दी और अगले ही दिन यानी सोमवार को हिंसा हुई। इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई और 60 से ज़्यादा लोग घायल हुए। हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई और कई घायल हुए। 
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इस ताज़ा वीडियो में जिस तरह से राष्ट्रगान गवाया जा रहा है उससे विचलित होना लाजिमी है। यह इसलिए कि देशभक्ति किसी से जबरन नहीं करायी जा सकती है। वैसे भी, पुलिस की वर्दी में लोगों का काम है सुरक्षा करना या क़ानून तोड़ने वाले को दंड देना। लेकिन जिस तरह से सड़क पर पुलिस व्यवहार कर रही है वह बेहद शर्मनाक है। एक बात जो इस वीडियो में दिखती है, वह यह कि एक युवा राष्ट्रगान गा भी रहा है। क्या इससे पुलिस को यह बात समझ नहीं आई होगी कि वह यदि देशभक्त नहीं था तो राष्ट्रगान कैसे गा रहा था? और यदि राष्ट्रगान गाने का मतलब यह नहीं है कि वह राष्ट्रभक्त ही हो तो फिर राष्ट्रगान क्यों गवाया जा रहा था? क्या युवकों के साथ अमानवीयता करने के लिए?
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