सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ने पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। दिपके ने पीएम मोदी को लेकर इतना सख्त बयान इससे पहले कभी नहीं दिया था।
अभिजीत दिपके और नरेंद्र मोदी
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दिपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार विरोध करने वाले युवाओं को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि 26 वर्षीय सौरव दास को जेल में रखकर सरकार को बहुत ताकतवर महसूस हो रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर युवाओं को पीटना, दिल्ली में बैरिकेड लगाना और छात्रों को घसीटना सरकार की ताकत नहीं, बल्कि विरोध से डरने का संकेत है।
दिपके ने कहा, “क्या यही ताकत है? पुलिस और अदालतों के पीछे छिपना, क्या यही नरेंद्र मोदी की ताकत है?” उन्होंने प्रधानमंत्री को कायर बताते हुए सवाल किया कि क्या युवा प्रदर्शनकारियों को जेल में रखकर कोई प्रधानमंत्री खुद को शक्तिशाली साबित कर सकता है।
सौरव दास की मुस्कान को बताया असली ताकत
दिपके ने सौरव दास के धैर्य और हौसले की तारीफ करते हुए कहा कि दास ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह जेल में एक दिन भी बिता पाएंगे। इसके बावजूद पांच दिन हिरासत में रहने के बाद वह अदालत में मुस्कुराते हुए पहुंचे। दिपके के मुताबिक, न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद भी दास के चेहरे पर डर नहीं था।दिपके ने दास की अदालत में पेशी के दौरान मुस्कुराते हुए तस्वीर भी साझा की। उन्होंने आशुतोष रांका और दोनों युवाओं के परिवारों की भी तारीफ की। दिपके ने सौरव की मां के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने कहा था कि उनका बेटा इतनी आसानी से टूटने वाला नहीं है।
'जेल भेजकर हमारी आवाज नहीं दबा सकते'
अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें खुद भी दो बार जेल भेजा जा चुका है, लेकिन इससे उनका विरोध खत्म नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार को लगता है कि जेल में डालकर युवाओं को चुप कराया जा सकता है, तो ऐसा नहीं होने वाला। दिपके ने फिल्म मैरी कॉम के एक संवाद का हवाला देते हुए कहा कि किसी को इतना मत डराओ कि उसके भीतर का डर ही खत्म हो जाए। उनके मुताबिक, युवाओं को इतना डराया जा चुका है कि अब वे डरने वाले नहीं हैं।क्या है पूरा मामला?
सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेड पार कर उस स्थान पर पहुंचे थे, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।मजिस्ट्रेट ने कहा- आरोपियों ने कानून का सम्मान नहीं किया
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने सौरव और रांका की हिरासत अवधि बढ़ाते हुए सोमवार को कहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने "कानून के लिए कोई सम्मान नहीं दिखाया।" अदालत के आदेश में जांच अधिकारी (आईओ) के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा गया है, "आईओ ने आगे कहा है कि दोनों प्रतिवादी सीजेपी के सदस्य हैं और उन्होंने आम जनता को जंतर-मंतर पर जमा होने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए उकसाया और प्रेरित किया, जिसे विरोध स्थल के रूप में रद्द कर दिया गया है।"
इस बात पर जोर देते हुए कि दोनों ने 'कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया', मजिस्ट्रेट आदेश में कहा गया, "इस स्तर पर, मेरे सामने पेश आशंकाओं के आधार से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि आरोपियों का आचरण उचित नहीं है; बल्कि यह कानून के प्रति अनादर और प्रतिबंधित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करने की उनकी आदत को दर्शाता है।"
दोनों नेताओं को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। पुलिस ने अदालत के सामने अपनी आशंकाओं और आगे पूछताछ की जरूरत का हवाला दिया। दूसरी ओर, सीजेपी ने हिरासत बढ़ाने और जमानत प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कार्यवाही को अनुचित बताते हुए आदेश को उच्च न्यायिक मंच पर चुनौती देने की बात कही।
विवाद की जड़: मतदाता सूची और एसआईआर
सीजेपी और विपक्ष के कई दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विवाद का केंद्र मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) है। आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और पंजीकरण से जुड़े बदलावों में अनियमितताएं हुई हैं, जिनका राजनीतिक असर पड़ सकता है।चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वैध चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।
सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ने के बाद सीजेपी ने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकेत दिया है। दिपके के बयान से साफ है कि पार्टी इस कार्रवाई को केवल दो नेताओं की गिरफ्तारी के रूप में नहीं, बल्कि विरोध करने के अधिकार और सरकारी जवाबदेही के बड़े सवाल के रूप में पेश कर रही है।