जंतर मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन लंबा चला लेकिन इस दौरान वहां आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग दूर-दूर तक नहीं दिखे। लेकिन 8 अगस्त को झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में मार्च निकालने जा पहुंचे।
रांची में एबीवीपी का मार्च
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं (JPSC) में गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ जारी छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करने की कोशिश की। इस दौरान सिधो-कान्हू पार्क के पास बैरिकेडिंग तोड़ने को लेकर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प और हाथापाई हुई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए 8 से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। लेकिन सवाल पूछा जा रहा है कि जंतर मंतर के छात्र आंदोलन दिखाई न पड़ने वाली एबीवीपी रांची में छात्रों के आंदोलन में कैसे पहुंच गई।
यह विरोध मार्च रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से शुरू होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहा था। मुख्यमंत्री आवास से लगभग 500 मीटर पहले सिधो-कान्हू पार्क के समीप पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। ABVP कार्यकर्ताओं ने जब बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को लालपुर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में ABVP के प्रमुख पदाधिकारी प्रदीप शेखावत, पशुपतिनाथ उपमन्यु और प्रकाश तुरी शामिल हैं।
ABVP की मांगें और रणनीति
ABVP के प्रदेश मंत्री प्रकाश तुरी ने मीडिया को बताया कि संगठन प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़ा है। प्रकाश तुरी ने कहा- हमारी लड़ाई पुलिस से नहीं, बल्कि सरकार और उसकी नीतियों से है। 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार चुप है। हम छात्रों की वाजिब मांगों को लेकर सवाल पूछने आए थे। अब ABVP 11 अगस्त को विधानसभा मार्च निकाले वाले हैं। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस बलपूर्वक छात्रों तथा युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।मामले की जानकारी देते हुए उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्य ने बताया: "ABVP कार्यकर्ताओं द्वारा विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री आवास की ओर निकाले जा रहे मार्च को किसी भी अप्रिय घटना से बचाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिधो-कान्हू पार्क के पास रोका गया। 8 से 10 लोगों को एहतियातन हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"
झारखंड में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पिछले दो हफ्तों से (जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में) हजारों छात्र और अभ्यर्थी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं: 14वीं JPSC परीक्षा का तत्काल रद्द किया जाना। मामले की CBI जांच या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से निष्पक्ष जांच। PSC और JSSC चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना हाल ही में राज्य सरकार के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारी संगठनों के साथ वार्ता की थी, लेकिन कोई नतीजा न निकलने के कारण गतिरोध बरकरार है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ चले लंबे छात्र आंदोलन से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) पूरी तरह दूर रही थी। वहां हुए प्रदर्शनों के दौरान संगठन का कोई समर्थन या उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। हालांकि, शनिवार 8 अगस्त को रांची में आंदोलन कर रहे झारखंड के अभ्यर्थियों के समर्थन में अचानक एबीवीपी के उतरने और मुख्यमंत्री आवास घेराव के प्रयास ने सभी को हैरान कर दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन एबीवीपी के इस बदले रुख पर अब वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आइसा का पूछना है कि देशभर के छात्रों के मुद्दों पर अब तक गायब रही एबीवीपी अचानक सिर्फ रांची में ही क्यों सक्रिय दिखाई दे रही है। आइसा ने इस कदम के समय और मंशा दोनों पर सवाल खड़े किए हैं।
झारखंड में छात्रों के इस आंदोलन को केवल एबीवीपी ही नहीं, बल्कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी अपना समर्थन दे चुके हैं। राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्रों के असंतोष के बीच प्रमुख राजनीतिक चेहरों और संगठनों की इस सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन लंबे समय से झारखंड के छात्रों के इस आंदोलन में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे थे। आलोचकों का दावा है कि इस तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप से मूल छात्र आंदोलन को नुकसान पहुंच सकता है और अभ्यर्थियों की वास्तविक मांगों को राजनीतिक एजेंडे के तहत प्रभावित किया जा रहा है।
झारखंड में दूसरे दौर की बातचीत में गतिरोध बरकरार
उधर, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों और झारखंड सरकार के बीच गतिरोध शनिवार को भी जारी रहा। हालांकि, राज्य सरकार ने कई छात्र समूहों से बातचीत की और सुधारों पर सुझाव मांगने की पेशकश की। शनिवार को झारखंड सरकार ने गतिरोध को सुलझाने के प्रयास में प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई समूहों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।
पीटीआई के अनुसार, तीन मंत्रियों सहित पांच सदस्यीय सरकारी पैनल ने सबसे पहले जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले जेपीएससी-जेएसएससी उम्मीदवार मंच के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसके बाद पैनल ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, अखिल छात्र संघ (एसीएस) और झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) के प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा की।
हालांकि, बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। राज्य मंत्री संजय प्रसाद यादव ने प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों की मांगों को "वास्तविक" बताया और कहा कि इन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा जाएगा।
सरकार ने क्या प्रस्ताव रखा है?
राज्य सरकार ने कहा है कि सुधार नीति बनाने से पहले वह विभिन्न छात्र संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखेगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार ने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधारों के संबंध में छात्रों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए एक विशेष ईमेल पता बनाया है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि छात्रों द्वारा उजागर की गई कमियों की जांच की जाएगी और उनका समाधान किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।