अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी, 2026 तक का समय मांगा है ताकि एसईसी के साथ ईमेल के ज़रिए समन तामील करने के समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके। यह मामला अडानी समूह के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़ा है।
गौतम अडानी और सागर अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी तक अतिरिक्त समय मांगा है। वे यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ चल रही चर्चाओं पर 30 जनवरी तक अदालत को अपडेट देंगे। यह मामला नवंबर 2024 में SEC द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें गौतम अडानी और सागर अडानी पर रिश्वतखोरी की साजिश का आरोप है।
अमेरिकी कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क में दाखिल एक अपडेट में अडानी पक्ष के वकीलों (सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP) ने बताया कि दोनों पक्षों (अडानी और SEC) के बीच एक स्टिपुलेशन (सहमति पत्र) पर चर्चा चल रही है। इसमें SEC की ओर से ईमेल के माध्यम से समन की मांग पर सहमति बनाई जा रही है। वकीलों ने कहा, “दोनों पक्षों के वकील स्टिपुलेशन पर टिप्पणियां साझा कर चुके हैं। मुवक्किल भारत में हैं, समयांतर के कारण चर्चा जारी है। हम इसे शीघ्र अंतिम रूप देंगे और 30 जनवरी की सुबह तक फाइल कर देंगे।”
यह अनुरोध 26 जनवरी को दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले 23 जनवरी को अदालत ने दोनों पक्षों को 26 जनवरी तक चर्चा की स्थिति पर अपडेट देने का आदेश दिया था।
SEC ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और सागर अडानी पर नागरिक मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि सितंबर 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी की 750 मिलियन डॉलर की नोट ऑफरिंग (जिसमें करीब 175 मिलियन डॉलर अमेरिकी निवेशकों से आए) में रिश्वतखोरी की साजिश रची गई। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को बार-बार बेबुनियाद करार दिया है।
अडानी ग्रीन एनर्जी ने 24 जनवरी 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्ट किया कि कंपनी इस कार्यवाही में पक्षकार नहीं है और उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं हैं। साथ ही, आरोपितों पर अमेरिकी फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट (FCPA) का उल्लंघन नहीं बताया गया है। यह कार्यवाही पूरी तरह सिविल तरीके की है।
भारत में समन तामील में बाधा
SEC ने फरवरी 2025 से हेग कन्वेंशन के तहत भारत सरकार के जरिए समन भेजने की कोशिश की, लेकिन भारत के कानून मंत्रालय ने दो बार (अप्रैल 2025 और दिसंबर 2025 में) इसे अस्वीकार कर दिया। पहली बार दस्तावेजों में सील और हस्ताक्षर की कमी बताई गई, दूसरी बार SEC की आंतरिक प्रक्रियाओं (रूल 5(b)) का हवाला दिया गया।
इसके बाद 21 जनवरी 2026 को SEC ने अदालत से ईमेल और अडानी के अमेरिकी वकीलों के माध्यम से समन बेजने की अनुमति मांगी। अडानी के वकीलों ने 22 जनवरी को SEC से संपर्क किया और 23 जनवरी को अदालत से SEC की मांग पर फैसला टालने की गुहार लगाई, जबकि दोनों पक्ष चर्चा कर रहे हैं।
अदालत ने अडानी पक्ष की मांग मान ली है और अब 30 जनवरी तक स्टिपुलेशन फाइल करने की समयसीमा दी है। यह विकास अडानी ग्रुप के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे समन सेवा का मुद्दा सुलझ सकता है और आगे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
पूरा मामला विस्तार से जानिए
यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका के सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड कमिशन यानी एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी के ज़रिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी या देने का वादा किया। यह सब सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए किया गया। कंपनी ने 2021 में 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे, जिसमें अमेरिकी निवेशकों से क़रीब 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए। एसईसी का कहना है कि बॉन्ड बेचते समय कंपनी ने अपनी भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी। इसके साथ ही अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने आपराधिक केस भी दर्ज किया था, जिसमें सिक्योरिटीज फ्रॉड, वायर फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी पर अमेरिकी न्याय विभाग में अटॉर्नी ने नवंबर 2024 में 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) के रिश्वत घोटाले का आरोप लगाया था। इसमें अडानी और उनके सहयोगियों पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने का इल्जाम है। इसमें अमेरिकी निवेशकों को भी धोखा दिया गया। इस मामले ने भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपति को गहरा झटका दिया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं।
नवंबर 2024 में, अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice, DOJ) तथा प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने अडानी और अन्य सहयोगियों पर आरोप लगाए कि उन्होंने लगभग $265 मिलियन की रिश्वत (“bribery scheme”) दी थी। ताकि भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स और सरकारी ऊर्जा आपूर्ति के ठेकों को हासिल किया जा सके। आरोप यह भी है कि अडानी समूह ने अमेरिकी निवेशकों को इस मामले की जानकारी छुपाई थी — अर्थात्, कंपनी ने यह दावा किया कि सब कुछ वैधानिक है, जबकि आंतरिक तौर पर रिश्वत और धोखाधड़ी की गतिविधियाँ चल रही थीं।
हालांकि ये सब अभी आरोप हैं। कोई मामला साबित नहीं हुआ है। साबित होने पर सज़ा सुनाई जाएगी।