भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत सोमवार को नई दिल्ली में हो रही है। यह पांच दिनों तक चलेगा, यानी 16 से 20 फरवरी तक। यह दुनिया का सबसे बड़ा AI से जुड़ा कार्यक्रम है, जहां दुनिया भर के नेता, कंपनी के बड़े अधिकारी और विशेषज्ञ इकट्ठा हो रहे हैं। भारत इस समिट के ज़रिए AI के भविष्य पर अपनी मजबूत आवाज रखना चाहता है, खासकर ग्लोबल साउथ की तरफ से।

समिट में क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को समिट का उद्घाटन करेंगे। वे सीईओ राउंडटेबल को भी संबोधित करेंगे और एक डिनर भी होस्ट करेंगे। 100 से ज्यादा देशों के लोग आएंगे। 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 50 से ज्यादा मंत्री और 40 से ज्यादा बड़े सीईओ हिस्सा लेंगे। गूगल के सुंदर पिचाई, ओपनAI के सैम ऑल्टमैन, एंथ्रोपिक के डेरियो अमोडी, माइक्रोसॉफ्ट के ब्रैड स्मिथ, एडोब के शांतनु नारायण आदि शामिल होंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा जैसे नेता भी आ रहे हैं। चीन की टीम भी आई है, क्योंकि भारत ने निमंत्रण दिया था।

दुर्भाग्य से Nvidia के सीईओ जेंसन हुआंग आखिरी समय में नहीं आ पाए, क्योंकि कुछ अनपेक्षित वजहें आईं। Nvidia AI चिप्स में बहुत बड़ा नाम है। समिट में 500 से ज्यादा AI स्टार्टअप दिखेंगे। 500 से ज्यादा सेशन होंगे। मुख्य जगहें भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन हैं।

AI के बढ़ते इस्तेमाल से क्या सवाल उठ रहे हैं?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इससे कई बड़े सवाल सामने आ रहे हैं-
  • क्या AI से नौकरियां कम हो जाएंगी या नई नौकरियां आएंगी?
  • भारत का आईटी सेक्टर AI के इस दौर के लिए तैयार है या नहीं?
  • क्या भारत को ChatGPT जैसे बड़े लार्ज लैंग्वेज मॉडल खुद बनाने चाहिए, या छोटे-छोटे सेक्टर जैसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए खास AI टूल पर फोकस करना चाहिए?
  • क्या ज्यादातर भारतीय AI वाली दुनिया में काम करने लायक स्किल्ड हैं?
  • AI को चलाने के लिए बहुत सारे डेटा सेंटर चाहिए, जो बिजली और पानी बहुत इस्तेमाल करते हैं। क्या इससे पर्यावरण को नुकसान होगा?

एआई से जुड़े बड़े सवालों पर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। अब यह चर्चा भारत में हो रही है। भारत चाहता है कि AI सिर्फ बड़े देशों का खेल न रहे, बल्कि सभी देशों के लिए फायदेमंद हो।

भारत की सोच: 'पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस'

पिछले सालों में AI पर कई समिट हुए हैं। 2023 में ब्रिटेन के ब्लेटचली पार्क में AI सेफ्टी समिट हुआ, जहां 28 देशों ने AI के खतरों पर Bletchley घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। 2024 में सियोल में समिट हुआ, जिसमें इनोवेशन और सबको शामिल करने पर बात हुई। 2025 में पेरिस में AI एक्शन समिट हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। वहां आर्थिक फायदों पर ज्यादा जोर था।

लेकिन भारत की सोच अलग है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेक्रेटरी एस कृष्णन कहते हैं कि फोकस 'पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस' पर है। यानी AI ऐसे बने जो आम लोगों की समस्याएं हल करे, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए और प्रगति करे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इंडियाAI मिशन के CEO अभिषेक सिंह ने कहा, 'अभी AI कुछ ही देशों में बनता है और बाकी दुनिया सिर्फ इस्तेमाल करती है। अगर डेटा सबको शामिल न करे तो AI में बायस आ जाता है। इसलिए समिट में AI को लोकतांत्रिक बनाने पर जोर है। डेटासेट, कंप्यूट, मॉडल और ऐप्लिकेशन सबके लिए उपलब्ध हों।'

क्या उम्मीद है?

भारत में बने कुछ बड़े और छोटे लैंग्वेज मॉडल लॉन्च हो सकते हैं, जैसे सरवम AI और भारतजेन के सोवरेन AI मॉडल। डेटा सेंटर बढ़ाने पर कुछ ऐलान हो सकते हैं। काम, ट्रस्ट और सेफ्टी, अलग-अलग इंडस्ट्री में AI के इस्तेमाल पर ग्रुप डिस्कशन होंगे। समिट के आखिर में 20 फरवरी को एक घोषणा-पत्र अपनाया जाएगा। इसमें बाइंडिंग नियम नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए AI इनोवेशन और गवर्नेंस के सुझाव होंगे।

भारत चाहता है कि यह घोषणा सब देशों को साथ लाए, जैसा पिछले समिट में अमेरिका और ब्रिटेन ने कुछ पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। यह समिट भारत के लिए बड़ा मौका है। भारत AI पावर बनना चाहता है और ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा। समिट से उम्मीद है कि AI सबके लिए फायदेमंद और सुरक्षित बने।