राजधानी दिल्ली में चल रहे भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को लेकर अव्यवस्था की कई शिकायतें सामने आ रही हैं। इसमें अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई और ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन जैसे वैश्विक नेता शामिल हुए। हालांकि, पहले दिन ही लंबी कतारें, पानी की कमी, वीआईपी मूवमेंट के कारण रुकावटें और यहां तक कि चोरी की घटनाएं सुर्खियां बन गईं। आयोजकों की ओर से अभी तक इन मुद्दों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर नाराजगी साफ झलक रही है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया आने के बाद केंद्रीय रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आगे से ऐसा नहीं होने पाएगा। सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी सम्मेलन स्थल पर 6 घंटे रहे, इससे ज्यादा अव्यवस्था फैली। कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि मोदी ने अपनी फोटो खिंचवाने और रील बनवाने के लिए सम्मेलन में अव्यवस्था फैला दी।

चोरी की घटना: स्टार्टअप के एआई वियरेबल्स गायब

समिट के पहले दिन एक बड़ी घटना तब घटी जब नियो-सैपियन नामक स्टार्टअप के सीईओ और सह-संस्थापक धनंजय यादव ने आरोप लगाया कि उनके बूथ से भारत का पहला पेटेंटेड एआई वियरेबल चोरी हो गया। यादव के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजिट के कारण दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक सिक्योरिटी लॉकडाउन लगा था। इस दौरान सिक्योरिटी पर्सनल ने प्रदर्शकों को बूथ छोड़ने का आदेश दिया और आश्वासन दिया कि सामान सुरक्षित रहेगा। लेकिन लॉकडाउन खत्म होने पर वियरेबल्स गायब मिले। यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा जाहिर की, जिसमें उन्होंने उड़ान, आवास और बूथ फीस पर हुए खर्च का जिक्र किया। नेटिजन्स ने उन्हें दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी है। 
इस घटना ने स्टार्टअप कम्युनिटी में बहस छेड़ दी है, जहां कई फाउंडर्स ने ऐसे हाई-सिक्योरिटी इवेंट्स की उपयोगिता पर सवाल उठाए। उदाहरण के लिए, इंटरव्यूरेडी के सीईओ गौरव सेन ने कहा कि राजनीतिक मौजूदगी से स्टार्टअप्स को फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है।
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लंबी कतारें, पानी की कमी और वीआईपी मूवमेंट की परेशानियां

सम्मेलन में आए प्रदर्शकों ने समिट में प्रवेश के लिए घंटों इंतजार करने की शिकायत की। स्टार्टअप चलाने वाले पुनीत जैन ने बताया कि सुबह 7 बजे से कतारें लगी थीं, लेकिन दोपहर 12 बजे पूरे हॉल को खाली करा दिया गया, जिससे प्रदर्शक और डेलिगेट्स बाहर फंस गए। आशुतोष रंका ने गेट्स के अचानक बंद होने का जिक्र किया, जिससे हजारों लोग बाहर रह गए। पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनी, जहां फंसे हुए लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिला।
वीआईपी मूवमेंट, खासकर पीएम मोदी की विजिट के कारण सिक्योरिटी चेक और एरिया कॉर्डन ऑफ ने स्थिति को और बिगाड़ा। कृतिका कपूर ने बताया कि भीड़ इतनी थी कि चलना मुश्किल हो गया था, और एआई शोकेस की बजाय यह एक "मार्केटेड इवेंट" लग रहा था। यवनिका शाह ने कैश-ओनली फूड काउंटर्स पर तंज कसा, कहते हुए कि "एआई को समिट मैनेज करने के लिए यूज करना चाहिए था।"
समिट के दूसरे दिन भी अव्यवस्था की खबरें जारी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट्स में नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी, यूपीआई पेमेंट्स न होने और इंटरनेट सिग्नल्स के कमजोर होने की बात की गई है। एक यूजर अनुराग ने लिखा, "एआई समिट में वाई-फाई नहीं? 3 घंटे की कतारें, रजिस्ट्रेशन क्रैश और फाउंडर्स के प्रोडक्ट्स चोरी। यह डिजिटल इंडिया का फ्लैगशिप इवेंट है?"
करण सिंह अरोड़ा ने 27 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई इन कमियों को "शर्मनाक" बताया, जिसमें लैपटॉप्स और पानी तक पर बैन का जिक्र है। एक अन्य पोस्ट में वीना जैन ने ओवरक्राउडिंग और मिसमैनेजमेंट पर वीडियो शेयर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2.5 लाख डेलिगेट्स की उम्मीद थी, लेकिन क्यूआर कोड फेलियर और डिजी यात्रा इंटीग्रेशन की समस्या ने हालात बिगाड़ दिए।