AISA अध्यक्ष नेहा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी। पुलिस ने उन्हें डिटेन किया था और अगले दिन सुबह छोड़ दिया। लेकिन नेहा को अब 17 अक्टूबर को नया नोटिस जारी किया। उन्हें 19 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा गया।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति (पीस बॉन्ड) बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया है। संगठन के मुताबिक, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के साथ धारा 135(3) के तहत यह नोटिस जारी किया है। नेहा की कानूनी टीम इस मामले में तत्काल सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क करने की तैयारी में है।
AISA के अनुसार, नोटिस 17 अक्टूबर को जारी किया गया था और 18 अक्टूबर को नेहा को दिया गया। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली जिले के विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था। नोटिस में जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार प्रस्तुत करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट में नोटिस पर रोक लगाने की मांग
कानूनी सलाह लेने के बाद नेहा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नोटिस पर तत्काल रोक लगाने और उसे वापस लेने की मांग की है। याचिका में नोटिस को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है।AISA के मुताबिक, अधिवक्ता अभिक चिन्मय, प्रांजल अबरोल, मोक्षा और अन्य वकीलों की टीम मामले में तत्काल सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पहुंचेगी। कानूनी टीम विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में भी नेहा की ओर से पेश होकर नोटिस का जवाब देगी और हाईकोर्ट में दायर याचिका की जानकारी देगी।
रिहाई के बाद सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा पीछा किए जाने का आरोप
AISA ने यह सवाल भी उठाया है कि 16 अक्टूबर को हिरासत से रिहा होने के बाद से दिल्ली पुलिस के जवान कथित तौर पर सादे कपड़ों में नेहा का पीछा क्यों कर रहे हैं। संगठन ने पूछा है कि क्या प्रदर्शनकारियों को डराने और उन पर दबाव बनाने के लिए पुलिस इस तरह की कार्रवाई करती है। हालांकि, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा पीछा किए जाने के आरोप और इसके पीछे की वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती है। दिल्ली पुलिस का इस आरोप पर पक्ष भी सामने आना बाकी है।CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद
AISA ने इस नोटिस को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सीमित करने के लिए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर रही है। संगठन का दावा है कि दिल्ली पुलिस पहले भी BNSS की धारा 163, जो पहले सीआरपीसी की धारा 144 के नाम से जानी जाती थी, का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों के जमावड़े पर प्रतिबंध लगाती रही है। AISA के मुताबिक, अब शांति बनाए रखने के लिए मुचलका भरने का नोटिस जारी करना विरोध-प्रदर्शनों पर दबाव बनाने की एक और कोशिश है।संगठन ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। AISA के अनुसार, प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। ये संगठन की ओर से लगाए गए आरोप हैं। नोटिस जारी करने के पीछे पुलिस का आधिकारिक पक्ष और उसके आधार पर दर्ज तथ्यों की जानकारी सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
40 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का भी दावा
AISA ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 40 हजार से अधिक अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई, धारा 163 लागू की गई और कुछ स्थानों पर मेट्रो स्टेशनों तथा इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया। संगठन का यह भी दावा है कि प्रदर्शनकारियों को दक्षिणपंथी समूहों के निशाने पर छोड़ा गया। AISA का कहना है कि जब प्रशासन बड़े पैमाने पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती कर रहा है तथा प्रदर्शनकारियों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा रहा है, तब शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड मांगना सवाल खड़े करता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित प्रशासनिक आदेशों की जांच जरूरी है।AISA बोला- अदालत और शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए लड़ेंगे
AISA ने कहा है कि वह इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देगा और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेगा। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को दबाना है।अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की संभावित सुनवाई और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष नेहा की पेशी महत्वपूर्ण होगी। अदालत नोटिस पर क्या रुख अपनाती है और दिल्ली पुलिस अपने कदम के समर्थन में क्या दलील देती है, इससे आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।