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राम मंदिर ट्रस्ट ने फिर जारी की सफाई, कहा- दुष्प्रचार में यकीन न करें 

अयोध्या में चल रहे राम मंदिर निर्माण के लिए ज़मीन ख़रीद में कथित घपले को लेकर एक बार फिर श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सफाई आई है। ट्रस्ट ने मंगलवार को कहा है कि जिस ज़मीन की बात कही जा रही है, वह रोड से लगी हुई है। भविष्य में यह रोड फ़ोर लेन होगी और राम जन्म भूमि मंदिर के लिए यह मुख्य सड़क होगी, ऐसे में यह ज़मीन बेहद अहम है। 

ट्रस्ट ने कहा है कि इस ज़मीन का कुल एरिया 1.2080 हेक्टेयर है और इसे प्रति स्क्वायर फ़ीट 1423 रुपये के दाम पर ख़रीदा गया था, जो कि अयोध्या में चल रहे मार्केट रेट से बहुत कम है। 

ट्रस्ट ने कहा है कि इस ज़मीन के लिए कुछ और लोगों के बीच 2011 से ही एग्रीमेंट करने की कोशिश चल रही थी और ट्रस्ट इसे खरीदना चाहता था। लेकिन ट्रस्ट चाहता था कि पहले सभी पुराने एग्रीमेंट को फ़ाइनल कर लिया जाए जिससे इस ज़मीन के स्वामित्व के मामले को सुलझाया जा सके।

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ट्रस्ट का कहना है कि पिछले दस साल में इस प्रक्रिया में 9 लोग शामिल थे और इन सभी से बात की गई। इनकी सहमति मिलने और पुराने एग्रीमेंट्स को फ़ाइनल किए जाने के बाद ट्रस्ट ने ज़मीन के अंतिम मालिकों के साथ तुरंत एग्रीमेंट किया और यह पूरी तरह पारदर्शी ढंग से किया गया। 

ट्रस्ट का कहना है कि सभी वित्तीय देनदारी बैंकिंग के जरिये ही की जाएगी, मतलब कि चैक व कैश का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ट्रस्ट का कहना है कि वह यह भी सुनिश्चित करता है कि सरकार की ओर से लगाए गए सभी करों का भुगतान हो जाए। 

देखिए, इस विषय पर चर्चा- 

ट्रस्ट ने इस ज़मीन को लेकर हुए इन एग्रीमेंट्स की जानकारी दी है। 

1- ट्रस्ट ने बताया है कि 4 मार्च, 2011 को अयोध्या के बरवाड़ी टोला के रहने वाले महफूज़ आलम, जावेद आलम, नूर आलम, फ़िरोज़ आलम ने कुसुम पाठक, हरीश पाठक और मोहम्मद इरफ़ान उर्फ़ नन्हें मियां के साथ गाटा नंबर 242, 243, 244 और 246 के लिए एग्रीमेंट किया। तब इसकी क़ीमत 1 करोड़ थी और यह एग्रीमेंट 3 साल के लिए किया गया था और स्वाभाविक रूप से 4 मार्च, 2014 को रद्द हो गया। 

2- 20 नवंबर, 2017 को महफूज़ आलम, जावेद आलम, नूर आलम, फ़िरोज़ आलम ने इस ज़मीन को कुसुम पाठक और उनके पति हरीश पाठक को बेच दिया और यह ज़मीन 2.334 हेक्टेयर थी। तब इसकी क़ीमत 2 करोड़ रुपये थी। 

Alleged scam in ram mandir land in ayodhya - Satya Hindi

3- ट्रस्ट कहता है कि 21 नवंबर, 2017 को कुसम और हरीश ने इस ज़मीन को लच्छा राम सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह और राकेश कुमार सिंह को बेच दिया। तब इसकी क़ीमत 2.16 करोड़ तय की गई और 17 सितंबर, 2019 को इस एग्रीमेंट को रद्द कर दिया गया। 

4- 17 सितंबर, 2019 को कुसुम और हरीश पाठक ने इस ज़मीन को बेचने के लिए एक और एग्रीमेंट लच्छा राम सिंह, विश्व प्रताप उपाध्याय, मनीष कुमार, सूबेदार, बलराम यादव, रवींद्र कुमार दुबे, सुल्तान अंसारी और राशिद हुसैन के साथ किया। तब इसकी क़ीमत 2 करोड़ तय की गई और यह एग्रीमेंट 3 साल के लिए वैध था लेकिन यह 18 मार्च, 2021 को रद्द हो गया। 

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5- 18 मार्च, 2021 को कुसुम और हरीश पाठक ने गाटा नंबर 243, 244 और 246 का 1.2080 हेक्टेयर एरिया रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी को बेच दिया और तब भी इसकी क़ीमत 2 करोड़ थी लेकिन सर्किल रेट के हिसाब से यह 5.80 करोड़ थी और इसके लिए इतनी ही रकम का स्टांप बनवाया गया। 

 

6- ट्रस्ट कहता है कि उसी दिन यानी 18 मार्च, 2021 को रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी भी इस ज़मीन को राम जन्मभूमि ट्रस्ट को बेचने के एग्रीमेंट में शामिल हुए और तब इसकी क़ीमत 18.50 करोड़ तय की गई। इसमें से 17 करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिये दिए जा चुके हैं। 

ट्रस्ट ने कहा है कि आरोप लगाने वाले व्यक्तियों ने तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के किसी भी पदाधिकारी से तथ्यों की जानकारी नहीं ली और इस वजह से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। ट्रस्ट ने सभी राम भक्तों से अपील की है कि वे ऐसे किसी दुष्प्रचार में यकीन न करें।

राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस ट्रस्ट को कायम किए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ ही यह ट्रस्ट बनाया जाएगा और राम मंदिर के निर्माण से जुड़े सभी विषयों को लेकर फ़ैसले लेगा। इस ट्रस्ट का नाम श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र रखा गया था। 

हरक़त में आई योगी सरकार 

इस मामले में विवाद के बढ़ने के बाद योगी सरकार भी हरक़त में आ गई है और उसने राजस्व विभाग के अधिकारियों को तलब कर इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी ली है। वहीं, ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमलनयन दास ने भी आवाज़ उठाई है और कहा है कि पिछले एक साल से जो कुछ भी ट्रस्ट में हो रहा है, उसकी जानकारी अध्यक्ष को नहीं दी गई और सारे निर्णय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ही ले रहे हैं। 

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