बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाले लोकपाल ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसने दुबे को प्राइवेसी या मानहानि के उल्लंघन के लिए शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने की भी छूट दी है। पूर्व आईपीएस अफ़सर अमिताभ ठाकुर ने निशिकांत दुबे और उनके परिवार के खिलाफ आय से ज़्यादा संपत्ति की शिकायत की थी। लोकपाल ने कहा कि निशिकांत दुबे के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद और परेशान करने वाले हैं।

भारत के भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल का 134 पन्नों का यह आदेश मंगलवार को जारी किया गया। ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाले लोकपाल ने कहा कि शिकायतकर्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने सांसद दुबे पर आय से ज़्यादा संपत्ति इकट्ठा करने का कोई ठोस सबूत नहीं दिया। इसलिए लोकपाल ने आगे जांच शुरू करने की कोई वजह नहीं देखी। लोकपाल के इस फ़ैसले के कुछ अंशों को सोशल मीडिया पर शेयर कर उस हिस्से को उभारा जा रहा है जिसमें शिकायतकर्ता के खिलाफ़ कार्रवाई की छूट होने की बात कही गई है।

शिकायत क्या थी?

लखनऊ के रहने वाले अमिताभ ठाकुर आजाद अधिकार सेना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने मई 2025 में लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई थी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया था कि निशिकांत दुबे ने अपनी ज्ञात आय से ज्यादा संपत्ति बनाई है। ठाकुर ने दुबे के 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावी हलफनामों का हवाला दिया।

उनका मुख्य दावा यह था कि सांसद दुबे की खुद की चल-अचल संपत्ति लगभग स्थिर रही, लेकिन उनकी पत्नी अनामिका गौतम की संपत्ति में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ठाकुर ने इसे संदिग्ध बताया और जांच की मांग की।
ताज़ा ख़बरें

लोकपाल ने क्या कहा?

लोकपाल के आदेश में साफ लिखा है कि शिकायतकर्ता ने बार-बार आरोप बदलते रहे, लेकिन कोई मजबूत आधार नहीं दिया। लोकपाल ने दुबे के पक्ष को सही ठहराया कि पत्नी की संपत्ति में बढ़ोतरी मुख्य रूप से बाजार मूल्य बढ़ने की वजह से हुई है, न कि नई संपत्ति खरीदने से।

निशिकांत दुबे ने लोकपाल से कहा कि उनकी पत्नी एक पेशेवर हैं, जो कंसल्टेंसी सर्विस देती हैं और नियमित रूप से इनकम टैक्स रिटर्न भरती हैं। इसलिए कोई गलत आय का सबूत नहीं मिला।

लोकपाल ने यह भी माना कि शिकायत राजनीतिक रूप से प्रेरित लगती है और इसमें व्यक्तिगत दुश्मनी की बू आती है। इसमें यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता कई जगहों पर दुबे के खिलाफ बेमानी केस दायर कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता की अन्य मांगें

एक सुनवाई से पहले ठाकुर ने कोर्ट से कहा था कि उन्हें सुनवाई में आने के लिए पैसे की मदद दी जाए, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मदद कर रहे हैं। अगर पैसे नहीं, तो सुनवाई ऑनलाइन हो। लोकपाल ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
देश से और ख़बरें

ठाकुर पर क्या फैसला?

लोकपाल ने ठाकुर को जारी किया गया शो-कॉज नोटिस भी वापस ले लिया। शिकायत के कंटेंट को सार्वजनिक करने के लिए यह नोटिस जारी किया गया था। इसके साथ ही लोकपाल ने कहा कि दुबे चाहें तो ठाकुर के खिलाफ प्राइवेसी या बदनामी के लिए अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

अमिताभ ठाकुर की मौजूदा स्थिति

अमिताभ ठाकुर फिलहाल उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला जेल में बंद हैं। उन्हें 10 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने 1999 में देवरिया के एसपी रहते हुए फर्जी दस्तावेजों से अपनी पत्नी के नाम पर एक औद्योगिक प्लॉट हथिया लिया था। हाल ही में उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां कार्डियक का इलाज हुआ। अब उनकी हालत स्थिर है और वे वापस जेल में हैं। उनकी जमानत याचिका पर 17 जनवरी को सुनवाई होनी है।