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विरोधी हैं तो क्या, चिदंबरम- अमित शाह में हैं काफ़ी समानताएँ!

क्या अमित शाह और पी चिदंबरम एक जैसे हैं? यदि गिरफ़्तारी की बात को छोड़ भी दें तो क्या अमित शाह और चिदंबरम में कुछ और समानताएँ नहीं हैं? 2010 में जब पी. चिदंबरम गृह मंत्री थे तो अमित शाह की गिरफ़्तारी हुई थी और अब 2019 में जब अमित शाह गृह मंत्री हैं तो पी. चिदंबरम की गिरफ़्तारी हुई है। दोनों की गिरफ़्तारी, उससे पहले की घटनाएँ और उनके आरोप क़रीब-क़रीब एक जैसे हैं। अपनी-अपनी गिरफ़्तारी से पहले दोनों ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी। इनके आरोपों और भाषा में काफ़ी हद तक समानताएँ हैं।

जिस तरह से कांग्रेस अभी राजनीतिक बदले की कार्रवाई किए जाने का आरोप लगा रही है उसी तरह से शोहराबुद्दीन एनकाउंटर में आरोपी रहे अमित शाह भी 2010 में आरोप लगा रहे थे। जिस तरह से आईएनएक्स मीडिया मामले में पी. चिदंबरम की गिरफ़्तारी के लिए एक दिन पहले तक ईडी-सीबीआई ढूंढते फिर रही थी उसी तरह से तब 2010 में अमित शाह की गिरफ़्तारी के लिए सीबीआई ढूँढते फिर रही थी। 25 जुलाई 2010 को अमित शाह को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ़्तारी से पहले अमित शाह ने बीजेपी ऑफ़िस में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी। बिलकुल ऐसा ही चिदंबरम के मामले में भी हुआ। सीबीआई चिदंबरम को ढूंढ रही थी, इसी बीच कांग्रेस मुख्यालय में उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की।

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फँसाने के आरोप

  • पी. चिदंबरम

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने आईएनएक्स मामले में अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से नकार दिया। चिदंबरम ने कहा कि उन्हें मामले में फँसाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 

‘मैं या मेरे परिवार का कोई आदमी आईएनएक्स मामले में अभियुक्त नहीं है। आईएनएक्स मामले मे न तो मेरे ख़िलाफ़ कोई मामला बनता है न ही मेरे परिवार के किसी आदमी के ख़िलाफ़। एफ़आईआर में न तो मेरा नाम है न ही मेरे बेटे का, हम लोगों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार चलाया जा रहा है।'

  • अमित शाह

अमित शाह ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा और राजनीति से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में यह मामला टिक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा था, 

‘उनका जवाब देने के लिए कार्यालय से सीधे सीबाआई के ऑफ़िस जा रहा हूँ। चार्जशीट अभी तक तो किसी को नहीं मिली है। मगर मीडिया को जो चार्जशीट मिली है उसके माध्यम से मेरी जानकारी में जो बातें आईं हैं उसमें मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं वे सभी के सभी आरोप फैबरिकेटेड हैं। पोलिटिकली मोटिवेटेड हैं। और कांग्रेस सरकार के इशारे पर बनाया गया कच्चा चिट्ठा है। जब यह चार्जशीट न्याय की अदालत में चर्चा में आएगी तब हमें विश्वास है कि तब इसमें से एक भी आरोप सच नहीं निकलेगा।’

भागने के आरोपों पर

  • चिदंबरम- 

'मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं क़ानून का सामना करने से बचते हुए भाग रहा हूँ। लेकिन, मैं क़ानून के साथ हूँ और बीते एक दिन से मैं वकीलों के साथ हूँ। रात भर मैं वकीलों के साथ दस्तावेज़ तैयार कर रहा था। मैंने हमेशा क़ानून का पालन किया है और आगे भी करता रहूँगा, भले ही मेरे साथ कैसा भी व्यवहार क्यों न हो।'

  • अमित शाह-

'जहाँ तक मुझे समन देने का सवाल है यह किसी तरह का माहौल बनाया गया कि जैसे मैं बहुत बड़ा गुनहगार हूँ, भगोड़ा हूँ। 22 तारीख़ को मुझे समन दिया गया कि मैं एक बजे हाज़िर हो जाऊँ। आप ही जस्टिफ़ाई कीजिए कि 11 बजे समन देकर एक बजे बुलाने का मतलब क्या है? एक बजे फिर से समन दिया गया कि 23 तारीख़ को हाज़िर हो जाओ। एक दिन में मैं लीगल एडवाज लूँ या न लूँ। किसी से सलाह करूं इससे पहले 23 की शाम को मेरे ख़िलाफ़ चार्जशीट पेश कर दी गई मेरा जवाब लिए बगैर। इसका मतलब चार्जशीट पहले से तैयार थी। मुझ पर आरोप पहले से बनाए गए थे। जो पूछताछ और समन की बात है वह कोरा नाटक थी।'

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चार्जशीट, न्यायपालिका पर

  • चिदंबरम-

'न तो सीबीआई और न ही प्रवर्तन निदेशालय यानी एनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट ने मेरे ख़िलाफ़ कोई चार्जशीट दाखिल की है। देश में लोकतंत्र ख़तरे में है। यदि मुझे आज़ादी और ज़िंदगी में से किसी एक को चुनना हो तो मैं आज़ादी ही चुनूँगा। उन्होंने कहा कि हमें यह उम्मीद करनी चाहिए कि शुक्रवार (कोर्ट में सुनवाई) और उसके बाद भी आज़ादी की रोशनी बरक़रार रहेगी।'

  • अमित शाह-

'मुझे मालूम है कि चार्जशीट पहले से तैयार थी और इसे कांग्रेस पार्टी के इशारों पर तैयार किया गया था। और फैबरिकेटेड चार्जशीट थी जिसको मेरे समन से कोई लेना देना नहीं है। मैं कोई क़ानूनी प्रक्रिया से डरता नहीं हूँ। हम क़ानूनी लड़ाई पूरी ज़ोर से लड़ेंगे। जिन्होंने यह ग़लत काम करने का प्रयास किया है उनको पूरी तरह से एक्सपोज हम कोर्ट में करेंगे।'

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चिदंबरम की कल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस और अमित शाह की 2010 की प्रेस कॉन्फ़्रेंस, दोनों का निचोड़ यही था कि वे निर्दोष हैं, उन्हें फँसाया गया है और यह राजनीतिक षडयंत्र है। जिस तरह से बीजेपी अमित शाह के मामले में राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगा रही थी उसी तरह से कांग्रेस अब पी चिदंबरम के मामले में वैसा ही आरोप लगा रही है। दोनों नेता अपनी-अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंसों में न्यायपालिका में लड़ाई लड़ने और आरोपों से मुक्त हो जाने की बात भी कहते हैं। अमित शाह तो शोहराबुद्दीन केस में बरी भी कर दिए गए हैं, तो क्या चिदंबरम के साथ भी ऐसा ही कुछ होगा या इस मामले में कार्रवाई अलग तरह से होगी?

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