राष्ट्रपति को लिखे खत में राहुल गांधी ने कहा है कि अंकिता भंडारी ने एक VIP के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार तो हत्या कर दी गई। चार साल बाद भी CBI की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो VIP कौन था।
अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ राहुल गांधी
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने इसको लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। राहुल ने राष्ट्रपति से अपील की है कि जब तक CBI अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच पूरी नहीं कर लेती है तब तक दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल का पद संभालने की अनुमति नहीं दी जाए।
अपने पत्र में राहुल ने कहा कि 19 साल की अंकिता ने एक कथित VIP के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया था और इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के करीब चार साल बाद भी उस VIP की पहचान को लेकर सवाल क्यों बने हुए हैं। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अपनी असंवेदनशीलता दिखाई है। इस मामले से दुष्यंत कुमार गौतम के कथित संबंध को लेकर परिवार और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे ख़त में भी इस बात का ज़िक्र किया है।
राष्ट्रपति से राहुल गांधी की मांग क्या?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा है कि दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से केंद्र सरकार को नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह देने और सीबीआई जांच पूरी होने तक गौतम को पद संभालने से रोकने की अपील की है।
राहुल ने अपने पत्र में अंकिता के परिवार की न्याय की मांग का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसके माता-पिता और दूसरे लोग लंबे समय से इस मामले में कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्ति से परिवार की न्याय की उम्मीद को झटका लग सकता है। राहुल ने लिखा कि दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि उन्हें महिलाओं की सुरक्षा की बिल्कुल परवाह नहीं है।
अंकिता हत्याकांड में VIP का सवाल क्यों?
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। उनकी उम्र 19 साल थी। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। पुलकित आर्य, बीजेपी से निष्कासित नेता विनोद आर्य का बेटा है।मामले में आरोप सामने आए थे कि अंकिता पर एक VIP को विशेष सेवाएं देने के लिए दबाव डाला जा रहा था। इसी कथित VIP की पहचान को लेकर अंकिता के परिवार और कुछ प्रदर्शनकारियों ने लगातार सवाल उठाए हैं। अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत कुमार गौतम को कथित VIP से जोड़ने के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने भी उनकी भूमिका की जांच की मांग की है। हालाँकि, अभी तक गौतम की इस हत्याकांड में संलिप्तता का कोई सबूत नहीं सामने आया है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में इसी सवाल को उठाया है कि जब मामले को कई साल बीत चुके हैं तो कथित VIP की पहचान को लेकर स्थिति साफ़ क्यों नहीं हुई।
तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी हत्याकांड में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रीना नेगी ने रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।हत्या के मामले में तीन आरोपियों को सजा मिल चुकी है। लेकिन अंकिता के परिवार की मांग है कि VIP की भूमिका से जुड़े सवालों की भी जाँच की जाए। राहुल गांधी ने भी अपने पत्र में CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग इसी के मद्देनज़र की है।
अंकिता के माता-पिता हिरासत में
राष्ट्रपति को पत्र लिखने से पहले अंकिता भंडारी के माता-पिता और दूसरे प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया था। उनकी मांग थी कि अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका की जांच पूरी की जाए और दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। गुरुवार तड़के दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता, कांग्रेस नेताओं और दूसरे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इंडिया गेट पर चल रहे धरने को ख़त्म कराया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया। पुलिस कार्रवाई के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF के जवान भी मौजूद थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई और न्याय की मांग कर रहे लोगों को निशाना बनाया गया। कांग्रेस नेताओं सुप्रिया श्रीनेत, उदय भानु चिब, विनोद जाखड़ और वरुण चौधरी को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता के लिए न्याय मांगने वालों और दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
CBI जांच को लेकर उठ रहे सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को सजा मिलने के बावजूद कथित VIP की पहचान को लेकर विवाद जारी है। अंकिता के परिवार और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस पहलू की जाँच होनी चाहिए। राहुल गांधी ने भी CBI की जांच की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चार साल बाद भी कथित VIP को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि परिवार की न्याय की उम्मीद को टूटने न दिया जाए।
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा
राहुल गांधी ने इस मामले को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है। उनका कहना है कि जिस मामले में एक युवती की हत्या हुई और परिवार अब भी कथित VIP की भूमिका को लेकर जवाब मांग रहा है, उसमें नियुक्ति का फ़ैसला सही नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि जाँच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि परिवार की आशंकाओं का समाधान हो सके और न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।
अंकिता भंडारी मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि क्या कथित VIP की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आएगा। अंकिता के माता-पिता न्याय की मांग कर रहे हैं और विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। हत्या के मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित VIP की पहचान और उससे जुड़े आरोपों को लेकर विवाद अब भी राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी का राष्ट्रपति को लिखा पत्र इसी विवाद को फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ले आया है।