हजारों करोड़ का लोन फ्रॉड का मामला और फ्रॉड के वर्षों बाद भी कार्रवाई नहीं! क्या सीबीआई और ईडी निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीक़े से जाँच नहीं कर रही हैं? क्या यह प्रक्रिया बेहद धीमी है? देरी क्यों हो रही है? ये सवाल सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से ही उठते हैं जिसमें इसने ईडी और सीबीआई को अनिल अंबानी ग्रुप के लोन फ्रॉड मामले में धीमी जांच के लिए फटकार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को कहा कि वह सीनियर अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाए और मामले की तेजी से जाँच करे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से साफ कहा कि सीबीआई और ईडी को जाँच निष्पक्ष, स्वतंत्र और बहुत तेज करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। जांच में देरी समझ से बाहर है।
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यह सुनवाई पूर्व आईएएस अधिकारी ईएएस सरमा की जनहित याचिका पर हो रही थी। सरमा ने आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारियों और अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के बीच मिलीभगत से कर्ज दिए गए, जबकि कंपनियां पहले से ही डिफॉल्ट कर चुकी थीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा बैंक लोन फ्रॉड है।

याचिका में कहा गया है कि 1.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ कर दिया गया और शेल कंपनियों के ज़रिए पैसे निकाल लिए गए। फ्रॉड 2007-08 से शुरू हुआ, लेकिन एफ़आईआर 2025 में दर्ज हुई। जांच एजेंसियों ने बैंकों और उनके अधिकारियों की भूमिका ठीक से नहीं देखी।

ईडी के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम जैसी कंपनियों ने 2013 से 2017 के बीच एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों से कर्ज लिया। डिफॉल्ट की रक़म क़रीब 78000 करोड़ रुपये है।

कोर्ट ने सीबीआई की उस दलील पर सख्ती दिखाई कि वह प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट की धारा 17ए के तहत मंजूरी का इंतजार कर रही है। बेंच ने कहा कि यह रवैया पूरी तरह गलत है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सीबीआई को किसी भी प्रावधान की परवाह किए बिना बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत, साजिश या कनेक्शन की जाँच करनी चाहिए और मामले को तार्किक नतीजे तक ले जाना चाहिए।

अब अनिल अंबानी कर्ज चुकाने को तैयार क्यों?

अनिल अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि उनके क्लाइंट कर्ज चुकाने को तैयार हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एक कमिटी बनाई जाए जिसमें एसबीआई, आरबीआई जैसे फाइनेंस एक्सपर्ट हों, जो तय करें कि कितना कर्ज बाकी है और उसे किस तरह किस्तों में चुकाया जा सकता है। लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट से फ्रॉड और फंड निकाले जाने की बात साबित हुई है, इसलिए सिर्फ पैसे लौटाने से अपराध माफ नहीं होगा।
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अनिल अंबानी देश छोड़कर भाग गए तो क्या होगा?

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अनिल अंबानी देश छोड़कर भाग सकते हैं। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की ओर से आश्वासन लिया कि सभी ज़रूरी क़दम उठाए जाएंगे ताकि जाँच में कोई रुकावट न आए। रोहतगी ने भी कहा कि अनिल अंबानी कोर्ट की इजाजत के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।

कोर्ट ने ईडी की एफिडेविट पर ध्यान दिया जिसमें कहा गया कि अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों ने फर्जी बैंक गारंटी दीं। बेंच ने ईडी और सीबीआई से हर महीने स्टेटस रिपोर्ट मांग ली है। कोर्ट ने कहा, 'चार हफ्तों में रिपोर्ट दें, हम देखेंगे कि जाँच कितनी आगे बढ़ी है।'

यह मामला सार्वजनिक पैसे के दुरुपयोग से जुड़ा है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि जांच तेज, निष्पक्ष और पूरी होनी चाहिए ताकि सच सामने आए। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्तों बाद होगी।