अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले में अहम सुराग मिलने के बाद पुलिस ने चंपतराय के ड्राइवर टिन्नू यादव और उसके रिश्तेदार मनीष यादव से 39 घंटे पूछताछ करने का फैसला किया है।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी (गबन) के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव को हिरासत में ले लिया है। शनिवार (18 जुलाई 2026) को दोनों आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के लिए पुलिस लाइंस ले जाया गया।
इससे पहले, विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत (Anti-Corruption Court) ने दोनों मुख्य आरोपियों की 39 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर की थी। हालांकि, पुलिस ने पूछताछ के लिए अदालत से सात दिनों की रिमांड मांगी थी।
जांच में मिले नए सुराग
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच टीम (SIT) को इस मामले में कुछ नए सुराग मिले थे, जिसके आधार पर उन्होंने रिमांड की अर्जी दाखिल करने से पहले गुरुवार को जेल में ही दोनों आरोपियों से पूछताछ की थी। टिन्नू को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता था। अधिकारियों के मुताबिक, टिन्नू मंदिर के दान पात्रों (Donation Boxes) की देखरेख करता था, जबकि उसका भतीजा मनीष यादव चढ़ावे की गिनती करने के काम में शामिल था।अब तक की बरामदगी और कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में पहले ही बड़ी कार्रवाई की है: आरोपी टिन्नू के घर से 1 लाख रुपये कैश बरामद किए गए हैं। मनीष यादव के आवास से 2 लाख रुपये की नकदी मिली है। रिमांड के दौरान पुलिस दोनों आरोपियों को विभिन्न स्थानों पर ले जा सकती है, ताकि चोरी किए गए अन्य कैश, आभूषण और चोरी के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाया जा सके।इससे पहले पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार छह अन्य आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। जांच टीम ने इस हफ्ते की शुरुआत में बैंक के दो पूर्व कर्मचारियों सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा की निशानदेही पर बरामद किए गए आभूषण, नकदी और संपत्ति के दस्तावेज भी अदालत में पेश किए हैं।
राजनीतिक तूल पकड़ रहा है मामला
राम मंदिर में दान की चोरी का यह मामला जून के पहले हफ्ते में सामने आया था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है।इस बीच, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि वे 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर दान चोरी का मुद्दा जोर-शोर से उठाएंगे। एसआईटी (SIT) इस मामले में सोमवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपने वाली ।
क्या है राम मंदिर चढ़ावा घोटाला
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में हेराफेरी (गबन) का यह मामला जून 2026 के पहले हफ्ते में तब सामने आया, जब मंदिर प्रशासन को दान में मिली राशि और खातों के मिलान (अकाउंटिंग) में बड़ी विसंगतियां मिलीं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद हड़कंप मच गया। इसके बाद मंदिर का प्रबंधन देखने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की शिकायत पर 25 जून 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने औपचारिक एफआईआर दर्ज की और मामले की तह तक जाने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
एसआईटी (SIT) की नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट और पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह कोई एक बार की चोरी नहीं थी, बल्कि 40 दिनों के भीतर कम से कम 70 बार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया गया था। जांच के अनुसार, ये चोरियां मुख्य रूप से दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे की शाम वाली शिफ्ट में की जाती थीं। नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचते हुए नोटों की गड्डियों और खुले पैसों को अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर बाहर ले जाते थे। कई बार तो एक ही दिन में दो से तीन बार चोरी की गई।
इस हाई-प्रोफाइल घोटाले का जाल ट्रस्ट के भीतर तक फैला हुआ था। पुलिस ने अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। टिन्नू यादव को ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी और उनका ड्राइवर बताया जा रहा है, जो बिना किसी लिखित आदेश के दान पात्रों (Donation Boxes) की चाबियों और पहुंच को नियंत्रित करता था। वहीं, उसका भतीजा मनीष नोटों की गिनती में शामिल था। जांच का दायरा अब उन 30 से अधिक अन्य कर्मचारियों तक बढ़ गया है, जिन्हें ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सिफारिशों पर तदर्थ (ad-hoc) आधार पर भर्ती किया गया था। आरोपियों के पास से अब तक करीब 80 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा (अमेरिकी डॉलर) और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जा चुके हैं।
इस घोटाले के सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के भीतर बड़ी प्रशासनिक उथल-पुथल मची है। चौतरफा दबाव और भारी फजीहत के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे करोड़ों रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं, सुरक्षा और पारदर्शिता को सुधारने के लिए मंदिर प्रशासन ने दो शिफ्टों में नोटों की गिनती की व्यवस्था को बंद कर अब केवल एक ही डे-शिफ्ट (सुबह 9 से शाम 6 बजे) लागू कर दी है और पूरे सिस्टम का नए सिरे से फोरेंसिक व वित्तीय ऑडिट कराया जा रहा है।