बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रियांक खड़गे और कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलापाद को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में एक अन्य आरोपी और कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही को समाप्त (ड्रॉप) कर दिया है।

अदालत का फैसला और धाराएं

बेंगलुरु शहर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत ने शनिवार (27 जून) को इस संबंध में दायर एक निजी शिकायत पर सुनवाई की। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 (आपराधिक मानहानि) के तहत अपराध का संज्ञान लिया।
कोर्ट की वेबसाइट पर दर्ज मामले के विवरण के अनुसार: "आरोपी नंबर 1 (प्रियांक खड़गे) और आरोपी नंबर 3 (मोहम्मद हारिस नलापाद) के खिलाफ बीएनएस, 2023 की धारा 356 के तहत अपराध का संज्ञान लिया गया है। आरोपी नंबर 2 (दिनेश गुंडू राव) के खिलाफ कार्यवाही को हटा दिया गया है। कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि वह इस मामले को रजिस्टर नंबर-III में क्रिमिनल केस (C.C) के रूप में दर्ज करे और आरोपियों को समन जारी करे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तय की गई है।"
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क्या है पूरा विवाद?

यह मामला तेजस ए. नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई एक निजी शिकायत (PCR 18986/2025) से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने दिसंबर 2025 में दर्ज कराए गए अपने बयानों में गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और अन्य नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया था।

प्रियांक खड़गे के किन बयानों पर आपत्ति

सरकारी परिसरों में आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग: शिकायतकर्ता ने बताया कि 4 अक्टूबर 2025 को प्रियांक खड़गे ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर पोस्ट किया था कि, "सरकारी स्थानों और स्कूल परिसरों में आरएसएस के किसी भी तरह के समारोहों और शाखा गतिविधियों के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। वे लोगों को गलत संदेश दे रहे हैं, देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं और युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं।"

रिश्ते तोड़ने की अपील: इसके बाद, 14 अक्टूबर 2025 को खड़गे ने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि, "अगर आपका भाई, बहन, प्रेमिका (गर्लफ्रेंड) या आपके घर का कोई अन्य व्यक्ति आरएसएस में काम कर रहा है, तो उनसे अपना रिश्ता खत्म कर लें।"

अन्य नेताओं के बयान: शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि इसके दो दिन बाद विधायक दिनेश गुंडू राव ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। वहीं, शांतिनगर के विधायक हारिस के बेटे मोहम्मद हारिस नलापाद ने अपने यूट्यूब चैनल पर आरएसएस को लेकर टिप्पणी की थी कि 'आरएसएस में कोई ताकत नहीं है।'
इन बयानों से आहत होकर शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों प्रमुख नेताओं (प्रियांक खरगे और नलापाद) को 21 जुलाई 2026 तक कोर्ट में हाजिर होने के लिए समन जारी कर दिया है। राजनीतिक हलकों में इस अदालती कार्रवाई के बाद से बयानबाजी तेज होने की उम्मीद है।

खड़गे का आरएसएस पर फिर हमला, फिर पूछे सवाल

इस घटनाक्रम के बाद प्रियांक खड़गे ने पत्रकारों से कहा, "हम कानून का पालन करेंगे। हमारी सबसे पहली ज़िम्मेदारी है कि कोर्ट के किसी भी आदेश का पालन करें। मामला चाहे जो भी हो, हम कानूनी तरीके से इसका सामना कर रहे हैं। हमने वे सवाल हल्के-फुल्के या गैर-ज़िम्मेदाराना ढंग से नहीं पूछे थे।" यह कहते हुए कि उन पर दबाव बनाने की कोशिशें होंगी, उन्होंने कहा, "यह सब स्वाभाविक है। वे (RSS) हर संभव तरीके से दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। हम उसका जवाब देंगे। जब संविधान और कानून हमारे साथ हैं, तो किसी बात से डरने की ज़रूरत नहीं है।" 

उनको बताना होगा चंदा कहां से मिल रहाः खड़गे

पेजावर मठ के विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी की बातों का ज़िक्र करते हुए, जिन्होंने RSS से खुद को रजिस्टर कराने को कहा था, प्रियांक ने कहा, "वे मेरी बात नहीं सुनेंगे। वे आपकी बात नहीं सुनेंगे। वे संविधान की बात नहीं सुनेंगे। कम से कम उन्हें धार्मिक नेताओं की बात तो सुनने दें।" यह सवाल उठाते हुए कि RSS ने खुद को रजिस्टर क्यों नहीं कराया है, उन्होंने कहा, "एक बार जब वे रजिस्टर हो जाएंगे, तो मामला खत्म हो जाएगा। इससे उन लोगों पर रोक लगेगी जो बिना सोचे-समझे बयान देते रहते हैं। दुनिया का सबसे बड़ा संगठन अभी तक रजिस्टर क्यों नहीं हुआ है?" उन्होंने आगे कहा, "उन्हें चंदा कहाँ से मिल रहा है? हिसाब-किताब कौन रख रहा है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है और किसे नुकसान? इन सब बातों का पता चलना चाहिए।"

संघ कानून के दायरे में काम करेः बीके हरिप्रसाद

प्रियांक का समर्थन करते हुए, कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि अगर RSS मंत्री के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई का स्वागत करती है, तो उसे पहले खुद को रजिस्टर कराना चाहिए। हरिप्रसाद ने कहा, "जो कोई भी देश के कानून का सम्मान करता है - अगर RSS इस बात से खुश है कि प्रियांक के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है, तो उन्हें पहले अपने संगठन को रजिस्टर कराना चाहिए। दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे।" इस बात पर ज़ोर देते हुए कि RSS को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए, उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता कोर्ट में अपना पक्ष उस तरह से रखेंगे जैसा उन्हें उचित लगेगा।