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कोरोना की देसी वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल को अब मिली मंजूरी

देश में ही विकसित जिस कोरोना वैक्सीन को 15 अगस्त तक लोगों को उपलब्ध कराने का शोर मचाया गया था उसके तीसरे चरण का ट्रायल अब शुरू होगा। आईसीएमआर यानी इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा विकसित की जा रही कोरोनावायरस वैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण के लिए मंजूरी मिल गई है। अब कहा जा रहा है कि सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल फ़रवरी तक यह टीका लोगों को लगाने के लिए उपलब्ध हो सकता है। 

भारत बायोटेक के अलावा Zydus Cadila द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन भी ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे चरण में है। दुनिया भर में ऐसे 100 से ज़्यादा टीकों पर काम चल रहा है और इसके लिए उनमें से कई विदेशी कंपनियों के साथ भारत की कंपनियों ने क़रार भी किया है। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन भी उनमें से एक है जिसके साथ भारत के सीरम इंस्टिट्यूट ने क़रार किया है। 

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भारत बायोटेक के 'कोवाक्सिन' ने पहले और दूसरे चरण के ट्रायल के आँकड़ों के साथ जानवरों पर किए गए ट्रायल के आँकड़ों को पेश किया था। कंपनी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया यानी डीसीजीआई को दो अक्टूबर को तीसरे चरण की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। उसमें कहा गया है कि कंपनी 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 28500 लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल करना चाहती है। यह ट्रायल 10 राज्यों के 19 स्थानों पर किया जाएगा। इसी आवेदन पर डीसीजीआई ने मंजूरी दी है। 

भारत बायोटेक की कोवाक्सिन वही टीका है जिसको लेकर शुरुआत में यह योजना बनाई गई थी कि इसको 15 अगस्त तक बाज़ार में लॉन्च किया जाएगा। इस पर काफ़ी विवाद उठा था। आईसीएमआर के इस दावे पर कि वह 15 अगस्त तक कोरोना की वैक्सीन को लांच कर सकती है, वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए थे। वैज्ञानिकों ने कहा था कि इसे जल्द लाने की डेडलाइन की वजह से इसकी सुरक्षा और इसके प्रभाव के साथ समझौता हो सकता है। 

दिल्ली एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि इस दवा को इतनी जल्दी लाना बहुत मुश्किल और चुनौती भरा होगा। जाने-माने वायरोलॉजिस्ट शहीद जमील ने 15 अगस्त तक की डेडलाइन को हास्यास्पद बताया था।

ख़ुद भारत बायोटेक को भी इस बात का भरोसा नहीं था कि वह 15 अगस्त तक इसे तैयार कर लेगी। भारत बायोटेक ने कहा था कि क्लीनिकल ट्रायल के फ़ेज एक और दो के परिणाम अक्टूबर तक आ पाएँगे। इसके बाद कई तरह के अप्रूवल लेने होंगे और फिर फ़ेज 3 का ट्रायल होगा।

बाद में सरकारी अधिकारियों ने एक संसद की स्थायी समिति को बताया कि इस तरह की दवा कम से कम अगले साल तक संभव नहीं होगी। और अब ऐसा ही होता हुआ दिख रहा है। 

बता दें कि दुनिया भर में 100 से ज़्यादा वैक्सीन ट्रायल के दौर में हैं। उम्मीद की जा रही है कि जितनी जल्द यह दवा आएगी उतनी ही संक्रमण को नियंत्रित करने में आसानी होगी। फ़िलहाल कोरोना का संकट कम होता नहीं दिख रहा है। जिन यूरोपीय देशों में कोरोना नियंत्रित होता हुआ दिखने लगा था वहाँ अब संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो गई है। कई देशों में फिर से लॉकडाउन शुरू हो गया है। पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले 4 करोड़ 18 लाख से ज़्यादा हो गए हैं। 11 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो गई हैं। सिर्फ़ अमेरिका में ही 86 लाख से ज़्यादा, भारत में 77 लाख से ज़्यादा और ब्राज़ील में 53 लाख से ज़्यादा संक्रमण के मामले आ चुके हैं। 

वीडियो परिचर्चा में देखिए, आख़िर कब आएगी कोरोना वैक्सीन?
ऐसे में वैक्सीन पर ही लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। लेकिन इस मामले में ही एक निराशाजनक ख़बर आई। कोरोना टीका में सबसे आगे रहने वालों में से एक ऑक्सफोर्ड कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में भाग लेने वाले ब्राज़ील के एक नागरिक की मौत हो गई है। हालाँकि अब मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि मृतक व्यक्ति को अब तक ट्रायल वाली वैक्सीन नहीं लगाई गई थी। इस बीच वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने साफ़ किया है कि ट्रायल जारी रहेगा। जबकि पहले इस वैक्सीन के ट्रायल में एक व्यक्ति के सिर्फ़ बीमार पड़ने पर ही ट्रायल को रोक दिया गया था। तब कंपनी की ओर से कहा गया था कि उस प्रक्रिया की पूरी समीक्षा के बाद ही ट्रायल को आगे जारी रखा जा सकता है। हालाँकि ताज़ा मामले में ट्रयाल को नहीं रोका गया है। इन कारणों से यह काफ़ी उलझता हुआ मामला लगने लगा है।

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