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आजम को बड़ी राहत, जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन वापसी आदेश पर रोक

यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन के मामले में सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को बड़ी राहत मिली।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस यूनिवर्सिटी को आवंटित भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगा दी। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सी.टी. रवि कुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया। आजम खान इस समय अन्य मामलों में जेल में बंद हैं। वो समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में शामिल हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। 2005 में यूनिवर्सिटी को रामपुर में 500 एकड़ जमीन दी गई थी। हालांकि, विश्वविद्यालय उन शर्तों का पालन करने में विफल रहा, जिन पर जमीन दी गई थी, इसलिए राज्य सरकार ने जमीन वापस मांग ली।  

Big relief to Azam, stay on Jauhar University land return order - Satya Hindi
आजम खान, सपा नेता, इस समय सीतापुर जेल में हैं
आज एक संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, भारत के सॉलिसिटर जनरल ने यूनिवर्सिटी द्वारा दायर याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि शिक्षा के लिए भूमि का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

अदालत ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और अगस्त में मामले की सुनवाई होने की संभावना है। सॉलिसिटर जनरल ने अपनी दलीलों में जल्द सुनवाई की तारीख की मांग करते हुए दावा किया कि सरकार ने जमीन लौटाने का काम शुरू कर दिया है।

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समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान और उनके परिवार के सदस्य विश्वविद्यालय के ट्रस्टी हैं। 2005 में जब विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, तब राज्य सरकार ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को धारा 154 (2) के तहत जमीन की अनुमति दी थी। यह जमीन जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए दी गई थी। आरोप है कि 12.5 एकड़ (5.0586 हेक्टेयर) जमीन की जगह आजम खान ने 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया।

योगी की जिद

यूपी में योगी आदित्यनाथ की 2017 में सरकार आते ही यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई थी। सपा ने उस समय आरोप लगाया था कि योगी सरकार एक तरह से इसे राजनीतिक बदले की भावना के तहत कार्रवाई कर रही है। योगी सरकार ने आजम के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए।
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क्या कहा था हाईकोर्ट ने

जौहर यूनिवर्सिटी को दी गई जमीन पर रोक लगाते हुए उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था दलितों की यह जमीन बिना जिलाधिकारी की मंजूरी के यूनिवर्सिटी को गलत तरीके से दी गई। इसे पढ़ाई के काम के लिए दिया गया था। लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस में एक मस्जिद बनाई जा रही थी। योगी सरकार ने आरोप लगाया कि नदी के किनारे की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। किसानों से जबरन बैनामा करा लिया गया। कुछ किसानों ने आजम खान के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी पांच साल में बननी थी लेकिन उसकी भी रिपोर्ट नहीं दी गई।
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