चीन ने भारत की आपत्तियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराया है। उधर, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं और मोदी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, जिसकी कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार और बीजेपी का दोहरा स्टैंड सामने आ गया है।

शक्सगाम घाटी पर चीन का दावा और भारत की आपत्ति

चीन ने 12 जनवरी 2026 को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उसकी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं "बिल्कुल" हैं। यह हमारा क्षेत्र है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह क्षेत्र चीन का हिस्सा है और 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ सीमा समझौते के तहत यह वैध है। उन्होंने भारत की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान को संप्रभु देशों के रूप में सीमा निर्धारण का अधिकार है।

शक्सगाम घाटी कश्मीर, भारत के इस हिस्से को चीन अपना बता रहा

भारत ने 9 जनवरी को चीन की इन गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता अवैध और अमान्य है। भारत ने यह भी कहा कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों से 5,180 वर्ग किमी भूमि चीन को सौंप दी थी, जिसे भारत कभी नहीं मानता।

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सीपीसी प्रतिनिधिमंडल भाजपा मुख्यालय में 

इसी बीच, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा और 12 जनवरी को भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय नेताओं से मिला। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप-मंत्री सन हाइयान ने किया, और इसमें भाजपा महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के प्रभारी विजय चौथाईवाले शामिल थे। बैठक में दोनों पार्टियों के बीच संचार बढ़ाने पर चर्चा हुई। चीन के राजदूत शू फेइहोंग भी मौजूद थे।


दिल्ली में बीजेपी के मुख्यालय में चीनी प्रतिनिधिमंडल

यह मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली आधिकारिक पार्टी-टू-पार्टी बैठक है, जो भारत-चीन संबंधों में नरमी का संकेत देती है। प्रतिनिधिमंडल 13 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी मिलने वाला है। द इकोनॉमिक टाइम्स और न्यूज18 ने बताया कि सीपीसी ने भाजपा नेताओं को चीन आने का निमंत्रण दिया है।

कांग्रेस का जबरदस्त हमला

कांग्रेस ने इस मुलाकात पर भाजपा को घेरा है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जब चीन शक्सगाम घाटी पर दावा कर रहा है और अरुणाचल में गांव बसा रहा है, तब भाजपा का सीपीसी से गले मिलना सैनिकों के बलिदान का अपमान है। उन्होंने इसे "राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक" बताया और मोदी सरकार पर सरेंडर करने का आरोप लगाया।

इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया कि कांग्रेस ने इसे गलवान और लद्दाख तनाव के बीच चीन के प्रति "समर्पण" करार दिया। कांग्रेस ने चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाने की कथित योजना पर भी सवाल उठाए। 
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन शक्सगाम घाटी में सड़क और सैन्य बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, जो सीमा विवाद को और गहरा सकता है। यह गतिविधियां लद्दाख में तीन साल से अधिक समय से चल रहे सीमा गतिरोध के बीच हो रही हैं। भारत ने लगातार चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी अस्वीकार किया है, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से गुजरता है। एक्स पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज है। 
यह घटनाक्रम भारत-चीन संबंधों में नए मोड़ को दर्शाता है। 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी-शी की मुलाकात के बाद संबंधों में सुधार आया, लेकिन शक्सगाम जैसे मुद्दे तनाव बरकरार रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीमा विवाद को और जटिल बना सकता है, खासकर जब चीन सीपीईसी को विकास गलियारा बताकर वैध ठहरा रहा है।