बीजेपी की Gen Z outreach टीम में नितिन नवीन और स्मृति ईरानी के शामिल होने पर CJP ने पूछा कि बीजेपी अध्यक्ष ने तो अभी हाल में ही युवाओं को वायरस, कॉकरोच कहा था और स्मृति ईरानी ने रोहित वेमुला आत्महत्या मामले में क्या किया था, ये सब जानते हैं।
स्मृति ईरानी और नितिन नवीन
बीजेपी की नई जेन ज़ी आउटरीच टीम में नितिन नवीन और स्मृति ईरानी जैसे चेहरों को शामिल करने पर कॉकरोच जनता पार्टी ने पूछा है कि युवाओं को जोड़ने वाली टीम में ऐसे लोग क्यों हैं जिन्होंने युवाओं को वायरस और कॉकरोच कहा था। जाहिर तौर पर उन्होंने सवाल उठाया है कि वे आखिर नई पीढ़ी का भरोसा कैसे जीतेंगे।
CJP ने खास तौर पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को टीम में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बीजेपी की नई टीम पर तंज कसते हुए लिखा कि युवाओं तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने जिन चेहरों को चुना है, वे खुद पहले युवाओं के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में देश के युवा प्रदर्शनकारियों को 'वायरस' और 'कॉकरोच' कहा था तथा उन्हें 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का हिस्सा बताया था।
स्मृति ईरानी पर भी साधा निशाना
सीजेपी प्रवक्ता ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाया गया था और उनके कार्यकाल के दौरान कई विश्वविद्यालयों को लेकर विवाद सामने आए थे। दास ने रोहित वेमुला आत्महत्या मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस पूरे घटनाक्रम में स्मृति ईरानी की भूमिका पर लंबे समय तक सवाल उठते रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'युवाओं को सीख देने से पहले यह भी याद रखना चाहिए कि शिक्षा मंत्रालय के उनके कार्यकाल को लेकर कैसी बहस हुई थी।'
सौरव दास ने ईरानी का नाम इसलिए लिया है क्योंकि हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोधार्थी रोहित वेमुला की 2016 में आत्महत्या के बाद तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी विवादों में घिरी थीं। दरअसल, वेमुला की आत्महत्या से पहले बीजेपी सांसद बंडारू दत्तात्रेय ने विश्वविद्यालय को ‘जातिवादी-अतिवादी’ बताते हुए मंत्रालय को पत्र लिखा था। इस बीच मंत्रालय ने कई रिमाइंडर भेजे, जिन्हें दबाव माना गया। इससे रोहित समेत पांच छात्रों का निलंबन हुआ। आरोप लगा कि स्मृति ईरानी के हस्तक्षेप से यह कार्रवाई हुई। उन्होंने संसद में कहा कि डॉक्टर को वेमुला के पार्थिव शरीर के पास नहीं आने दिया गया और यह जाति मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक साज़िश है। ये बयान डॉक्टर और पुलिस रिपोर्ट से अलग निकले, जिससे विपक्ष ने संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया। परिवार और छात्रों ने भी ईरानी की भूमिका पर सवाल उठाए।
बीजेपी ने बनाई जेन जी आउटरीच टीम
बीजेपी ने जेन ज़ी आउटरीच कार्यक्रम के लिए एक विशेष टीम का गठन किया। पार्टी के अनुसार, इसका मक़सद देशभर के युवाओं, खासकर जेन ज़ी के साथ सीधा संवाद बढ़ाना और उनकी आकांक्षाओं, समस्याओं तथा सुझावों को समझना है।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने ट्रिब्यून की जिस ख़बर को साझा करते हुए बीजेपी पर यह तंज कसा है उसमें कहा गया है कि बीजेपी की जेन ज़ी आउटरीच टीम में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी, छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। एएनआई ने भी सूत्रों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है।
युवाओं से लगातार संवाद पर जोर
नई टीम की पहली बैठक में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी पदाधिकारियों से 'युवा संवाद' को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी को युवाओं के साथ लगातार बातचीत करनी चाहिए और उनकी अपेक्षाओं को समझना चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पार्टी मुख्यालय में नवगठित टीम से मुलाकात की। बीजेपी की ओर से घोषित 65 सदस्यीय टीम में 51 नए चेहरों को जगह दी गई है। इनमें कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, मनोज टिग्गा और संदीप पाठक जैसे नेताओं के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और वसुंधरा राजे को भी जिम्मेदारी दी गई है।
बीजेपी का कहना है कि पार्टी का यह आउटरीच कार्यक्रम युवाओं के साथ नियमित संवाद, चर्चा और विभिन्न गतिविधियों के जरिए संगठन और नई पीढ़ी के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जेन ज़ी आउटरीच कार्यक्रम क्यों?
कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर आंदोलन के बाद बीजेपी जेन ज़ी आउटरीच में इसलिए जुटी है क्योंकि यह आंदोलन युवाओं के गुस्से और असंतोष को सामने लाया। जून-जुलाई 2026 में सीजेपी ने नीट सहित परीक्षाओं में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर बड़ा धरना दिया। शुरुआत में बीजेपी के कई नेताओं और संघ के नेताओं तक ने इस आंदोलन में शामिल युवाओं के लिए वायरस, कॉकरोच, टुकड़े-टुकड़े गैंग, देश विरोधी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
लेकिन युवाओं का यह आंदोलन सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा, हजारों युवा शामिल हुए और अंत में प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इसे ‘जेन ज़ी आंदोलन’ कहा गया। बीजेपी को लगा कि युवा वर्ग से उनका संपर्क कमजोर पड़ गया है। इसके बाद पार्टी के नेताओं का रुख बदला। संघ तक ने जेन ज़ी आउटरीच कार्यक्रम शुरू किया। माना गया कि युवा बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर नाराज हैं। इसी बीच अब ख़बर आई है कि बीजेपी ने जेन ज़ी आउटरीच के लिए खास टीम बनाई। मकसद साफ है कि युवा वोट बैंक को वापस जोड़ना और भविष्य के चुनावों में इस असंतोष को कम करना।
बीजेपी का यह अभियान तब शुरू किया जा रहा है, जब आने वाले महीनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि पार्टी पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, सीजेपी ने बीजेपी की इस पहल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बीजेपी केवल नई टीम बनाकर युवाओं का भरोसा नहीं जीत पाएगी।