प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए शिक्षक और स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी ने बी जे पी को फिर हरा दिया। 2020 में भी बी जे पी ये सीटें हार गयी थी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के गोरखपुर- फैजाबाद सीट पर दल बदल के नुस्खे के ज़रिए इस बार बी जे पी को जीत मिल गयी और योगी ने अपनी प्रतिष्ठा बचा ली। 2020 के चुनाव में बी जे पी ये सीट भी हार गयी थी। इन चुनावों में समाजवादी पार्टी असली विजेता बन कर उभरी है। उसकी सीटें 3 से बढ़कर 5 हो गयी हैं।
विधान परिषद के इन चुनावों को अगले साल के विधान सभा चुनावों का पूर्वाभास माना जा रहा था। क्या इस का असर विधान सभा चुनावों पर पड़ेगा? लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में सरकार विरोधी लहर लंबे समय से दिखाई दे रही है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों में उसकी ही एक झलक मिलती है। 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को जबरदस्त सफलता मिली थी। अखिलेश यादव ने पी डी ए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठबंधन के ज़रिए अपनी स्थिति मज़बूत की है।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुए। इनमे 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटें हैं। 2020 के चुनाव में भाजपा को 6, समाजवादी पार्टी को 3 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिली थीं। 2026 में भी बी जे पी को फिर से 6 सीटें मिली लेकिन एस पी की सीटें बढ़ कर 5 हो गयीं । असल में एक पुरानी सीट पर बी जे पी को हार का सामना करना पड़ा लेकिन पिछले चुनाव में जीते एक निर्दलीय को पार्टी के पाले में लाकर बी जे पी ने जीत का पुराना आंकड़ा कायम रखा। एक बात और है कि इस बार कोई नया उम्मीदवार नहीं जीता। दो पुराने निर्दलीय उम्मीदवार इस बार बी जे पी और एस पी के टिकट पर लड़े और फिर जीते।
आगरा शिक्षक सीट पर 2020 में आकाश अग्रवाल निर्दलीय जीते थे। इस बार वो एस पी के उम्मीदवार बन कर जीत गए। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से 2020 में ध्रुव कुमार त्रिपाठी निर्दलीय जीते थे और इस बार बी जे पी के उम्मीदवार के रूप में जीते। लखनऊ स्नातक सीट पर 2020 में कांति सिंह ने बी जे पी के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी और इस बार समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार बन कर जीतीं।
इस रूप में बी जे पी को एक सीट का नुक़सान हुआ लेकिन एक निर्दलीय के पाला बदलने के कारण पिछले चुनाव का आंकड़ा बरक़रार रहा। मेरठ स्नातक सीट पर बी जे पी के दिनेश गोयल, मेरठ शिक्षक क्षेत्र से श्रीचंद शर्मा, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र में हरि सिंह ढिल्लों और आगरा स्नातक क्षेत्र में डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत को बरकरार रखा।
वाराणसी शिक्षक क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव और स्नातक क्षेत्र से आशुतोष सिन्हा की जीत राजनीतिक तौर पर अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्षेत्र है। लेकिन विधान परिषद की सीट बी जे पी नहीं जीत पाती है। पत्रकार प्रदीप कपूर बताते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री की जीत का अंतर 2019 के मुकाबले कम हो गया। मोदी के आने के बाद बी जे पी वाराणसी में जबरदस्त विकास का दावा करती है। इसके बावजूद पार्टी की लोकप्रियता में कमी चिंता की बात है। स्नातक और शिक्षक दोनों पढ़े लिखे मतदाताओं के क्षेत्र होते हैं। क्या शिक्षित लोगों के बीच मोदी और बी जे पी की लोकप्रियता में कमी आई है।
प्रदीप कपूर कहते हैं कि शिक्षित युवा वर्ग में बेचैनी साफ़ देखी जा सकती है। 2027 के अप्रैल मई में उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनाव है। 2017 और 2022 के चुनावों में मोदी लहर के साथ साथ राम मंदिर का मुद्दा भी अहम था। राम मंदिर बनने के बाद ये बड़ा मुद्दा नहीं रहा। इसका असर 2024 के लोकसभा चुनावों पर दिखाई दिया। बी जे पी की लोकसभा सीटें घट गईं। विधान परिषद के चुनाव बताते हैं कि बी जे पी जोड़तोड़ करके अपनी प्रतिष्ठा बचाने पर मजबूर हैं।