जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई व राम मंदिर चंदा मुद्दे के लिए अमित शाह को घेरते आ रहे इंडिया गठबंधन को अब बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए झारखंड में पुलिस कार्रवाई पर राहुल गांधी के ख़िलाफ़ उतर आया है। एनडीए और विपक्षी सांसदों के बीच नारेबाजी हुई।
संसद परिसर में एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन
जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई को लेकर घिरी बीजेपी ने क्या अब झारखंड प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई को ढाल बना लिया है? जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई व राम मंदिर चंदा मुद्दे के लिए अमित शाह को घेरते आ रहे इंडिया गठबंधन को अब बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए झारखंड में पुलिस कार्रवाई पर राहुल गांधी के ख़िलाफ़ उतर आया है। एनडीए सांसदों ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ नारे लगाए। इधर, इंडिया गठबंधन के सांसदों ने जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह से जवाब मांगा और राम मंदिर से कथित चंदा चोरी के मामले में मोदी सरकार को घेरा।
दरअसल, संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। संसद के मकर द्वार के बाहर एनडीए और इंडिया गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नारे लगाए और हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षा कर्मियों ने दोनों पक्षों के बीच मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें अलग रखा। इस राजनीतिक टकराव का केंद्र दो मुद्दे रहे- दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस कार्रवाई और झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई। इसके अलावा विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर भी संसद में चर्चा की मांग कर रहा है।
दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है। वहीं, अब NDA ने झारखंड में हुई पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
मकर द्वार पर आमने-सामने आए सांसद
एनडीए सांसद मंगलवार को सांसद संसद की लाइब्रेरी की ओर से मकर द्वार की तरफ मार्च करते हुए पहुंचे। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। एनडीए सांसदों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर राहुल गांधी से जवाब मांगा गया था।
वहीं विपक्षी सांसद भी मकर द्वार के पास प्रदर्शन कर रहे थे। वे दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी तेज हुई तो सुरक्षा कर्मियों ने बीच में आकर दोनों समूहों को अलग किया। इस तरह संसद के भीतर चल रहा राजनीतिक गतिरोध अब संसद भवन के बाहर भी आमने-सामने की राजनीतिक लड़ाई में बदलता दिखाई दिया।
एनडीए ने पूछा- राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए?
बीजेपी और एनडीए सांसदों ने राहुल गांधी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। बीजेपी सांसदों का कहना था कि राहुल गांधी दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन झारखंड में जब प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया तो उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ उसी तरह सवाल क्यों नहीं उठाए। एनडीए सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान ‘राहुल गांधी जवाब दो’ और ‘राहुल गांधी भागो मत’ जैसे नारे लगाए।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में आंदोलन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि झारखंड के युवाओं के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब मांग रही है और दूसरी तरफ़ झारखंड में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर चुप है। उनका कहना था कि जब गृह मंत्री संसद में जवाब देने के लिए तैयार हैं तो राहुल गांधी और कांग्रेस को चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने बीजेपी सांसदों को दिया जवाब
मकर द्वार पर बीजेपी सांसदों के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां पहुंचीं। एक बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के झारखंड नहीं जाने को लेकर नारे लगाए और सवाल किया कि राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए। प्रियंका गांधी कुछ देर रुकीं और बीजेपी सांसद के पोस्टर की ओर देखा। इसके बाद उन्होंने जवाब दिया कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मिल चुके हैं।
इसके बाद प्रियंका गांधी विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल हो गईं। बाद में पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने सरकार के सांसदों को इस तरह प्रदर्शन करते देखा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सरकार को इस स्थिति तक पहुंचाया है कि अब उसके सांसद भी प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर मांग की कि अमित शाह संसद में आकर बयान दें।
विपक्ष ने पूछा- झारखंड की जिम्मेदारी राहुल गांधी की कैसे?
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झारखंड में जो हुआ उसकी जिम्मेदारी झारखंड सरकार की है, जबकि दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी न तो झारखंड के मुख्यमंत्री हैं और न ही वहां के गृह मंत्री। उनका तर्क था कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए दिल्ली में पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगना स्वाभाविक है।कांग्रेस नेता ने अमित शाह पर संसद की कार्यवाही से बचने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि गृह मंत्री संसद परिसर में मौजूद होते हैं, लेकिन सदन में आकर विपक्ष के सवालों का सामना नहीं कर रहे हैं।
राहुल पहले ही झारखंड पुलिस कार्रवाई की निंदा कर चुके हैं
बीजेपी के आरोपों के बीच कांग्रेस के लिए एक अहम तथ्य यह है कि राहुल गांधी खुद झारखंड में छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की आलोचना कर चुके हैं। राहुल गांधी ने सोमवार को कहा था कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत से ही किया जा सकता है। उन्होंने झारखंड सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की अपील की थी। इस बयान के ज़रिए राहुल गांधी ने यह साफ़ करने की कोशिश की कि कांग्रेस किसी भी सरकार द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का समर्थन नहीं करती।
झारखंड में क्या हुआ था?
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। 10 अगस्त को प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से आँसू गैस के इस्तेमाल की भी बात सामने आई।रांची में झारखंड के छात्रों का आंदोलन जारी है
प्रदर्शनकारी जेपीएससी की 14वीं परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल समेत दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जाँच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार और छात्रों के बीच इस मुद्दे पर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार ने कुछ मांगों को स्वीकार किया है, लेकिन छात्रों की सीबीआई जांच समेत कुछ प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
अमित शाह के बयान की सरकार ने की थी पेशकश
केंद्र सरकार ने एक दिन पहले सोमवार को संसद में दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की पेशकश की थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का जवाब देंगे। लेकिन सरकार ने यह भी कहा था कि विपक्ष को चर्चा के दौरान सदन में व्यवधान पैदा नहीं करना चाहिए और गृह मंत्री का जवाब सुनना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार ने गृह मंत्री के जवाब के लिए सहमति दे दी है और अब विपक्ष को चर्चा में सहयोग करना चाहिए।
राहुल बोले- भाषण नहीं, सीधे सवाल का जवाब चाहिए
सरकार की इस पेशकश के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को सामान्य मुद्दों पर अमित शाह की राय सुनने में दिलचस्पी नहीं है। उनका कहना है कि असली सवाल यह है कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आँसू गैस और कथित तौर पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने गृह मंत्री से सीधे जवाब की मांग की कि कार्रवाई का आदेश उन्होंने दिया था या नहीं। यही मांग अब संसद के गतिरोध का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है।
राम मंदिर चंदे का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में
एनडीए और इंडिया के बीच टकराव केवल छात्र आंदोलनों तक सीमित नहीं है। विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी या चोरी के आरोपों पर भी संसद में चर्चा चाहता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकार पर इस मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा, परीक्षा और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने झारखंड के मामले में भी कहा कि छात्रों के साथ लगातार संवाद किया जाना चाहिए।
संसद में गतिरोध का नया दौर
मानसून सत्र अब अंतिम दौर में है। इसके बावजूद लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामा जारी है। सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलनों पर चर्चा और गृह मंत्री के जवाब के लिए तैयार है। विपक्ष का कहना है कि केवल सामान्य चर्चा से काम नहीं चलेगा और उसके सवालों का साफ़ जवाब मिलना चाहिए।
अब एनडीए ने झारखंड को सामने रखकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है, जबकि इंडिया ब्लॉक दिल्ली की पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के आरोपों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अमित शाह के बयान और छात्र आंदोलनों पर चर्चा से संसद का गतिरोध टूटता है या झारखंड और दिल्ली के प्रदर्शन राजनीतिक टकराव को और बढ़ाते हैं।