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ब्लैक फंगस: अस्पतालों में इसके इंजेक्शन की किल्लत, भटक रहे लोग

कोरोना संक्रमण से अभी लोग उबरे भी नहीं थे कि ब्लैक फंगस के नाम पर एक नई आफ़त लोगों के मुंह के सामने आ खड़ी हुई है। यह ब्लैक फंगस जानलेवा होता जा रहा है। महाराष्ट्र में अब तक इससे 90 और मध्य प्रदेश में 31 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा भी कई राज्यों में कुछ मौतें होने की ख़बर है और कई राज्यों में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। 

राजस्थान और तेलंगाना की सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। कोरोना संक्रमण से उबर रहे मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं।

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लेकिन यहां भी पहले जैसे ही हालात हैं। दूसरी लहर में जब कोरोना का संक्रमण तेज़ी से फैला तो लोग दवाइयों के लिए अस्पतालों और दुकानों में पहुंचे लेकिन वहां ज़रूरी दवाइयां नहीं थीं। रेमेडिसिवर इंजेक्शन की बात हो या फिर फैबी फ्लू सहित बाक़ी कुछ ज़रूरी दवाएं और इंजेक्शन, लोगों को नहीं मिले। लोग सरकारों पर ग़ुस्सा उतारते रह गए कि वह जमाखोरी और कालाबाज़ारी करने वालों पर कार्रवाई करे लेकिन कुछ नहीं हुआ और हज़ारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। 

अब दिल्ली के अस्पतालों में ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की जबरदस्त किल्लत हो गई है और मध्य प्रदेश, राजस्थान में भी लोग इस इंजेक्शन के लिए परेशान होकर एक शहर से दूसरे शहर के चक्कर लगा रहे हैं।
सर गंगा राम अस्पताल के चेयरपर्सन डीएस राणा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हमारे अस्पताल में अभी ब्लैक फंगस के 70 मरीज हैं। ब्लैक फंगस के लक्षण उन मरीजों में ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं, जिन्हें डायबिटीज और कैंसर है। दिल्ली के मैक्स, इंद्रप्रस्थ अपोलो और वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल में भी ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती हैं।”

ब्लैक फंगस के इलाज में बेहद उपयोगी इस इंजेक्शन की कमी से जहां पहले छोटे अस्पताल और फ़ॉर्मेसी कंपनियां जूझ रही थीं, वहीं अब बड़े अस्पतालों में भी इसकी किल्लत होने लगी है। 

डॉ. राणा ने कहा, “पूरा देश ब्लैक फंगस के इलाज के लिए ज़रूरी इंजेक्शन की कमी का सामना कर रहा है। हमने इस बारे में सरकार को लिखा है। हमारे डॉक्टर्स भी इसका इंतजाम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है।” 

दिल्ली सरकार ने बनाई कमेटी 

इस मुश्किल को देखते हुए दिल्ली सरकार ने तीन तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी बना दी है, जो एम्फोटेरिसिन बी को बांटे जाने के मामले को सुव्यवस्थित करेगी। कोरोना के लिए नोटिफ़ाई किए गए अस्पतालों को इस कमेटी के सामने अपनी मांग रखनी होगी और इसकी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक अस्पताल के प्रतिनिधियों को एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन देंगे। 

लोगों का कहना है कि वे सुबह से शाम तक इस इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं लेकिन इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। लोग इसे ब्लैक में तक ख़रीदने के लिए तैयार हैं लेकिन फिर भी यह नहीं मिल रहा है। 

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केंद्र और राज्य सरकारों को इस इंजेक्शन की पहुंच, जल्द से जल्द आम लोगों तक कैसे हो, इस ओर ध्यान देना होगा क्योंकि ब्लैक फंगस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और लोगों को अपने परिजनों के लिए यह ज़रूरी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है।  

क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण?

म्यूकोमायकोसिस एक तरह का फंगल इन्फेक्शन है। इससे संक्रमित लोगों में चेहरे का सुन्न होना, नाक में रुकावट, आंखों या गालों में सूजन और नाक में काली सूखी पपड़ी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। चिंता की बात यह है कि अब यह जानलेवा होता जा रहा है और इसका इंजेक्शन बाज़ार से लगभग ग़ायब है।

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