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अफ़वाहों पर न जाएं, कोरोना इलाज के लिये क्लोरोक्वीन न लें

क्या मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन से कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज भी किया जा सकता है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि दिल्ली समेत देश के कई बाज़ारों से यह दवा गायब हो चुकी है, ढूंढने पर भी नहीं मिलती है। तो क्या लोग कोरोना से बचने के लिए क्लोरोक्वीन ले रहे हैं? यदि आप ऐसा कर रहे हैं तो इसे तुरन्त रोक दीजिए।

ट्रंप के ट्वीट पर बवाल!

दरअसल सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म वॉट्सऐप पर एक मैसेज वायरल हो गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप यह कहते हुए दिखते हैं कि उन्होंने अमेरिकी फूड्स एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) से कहा है कि वह कोरोना के इलाज के लिए क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल की अनुमति जल्दी से दे दे। 
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पर इसके तुरन्त बाद एफ़डीए ने सफ़ाई देते हुए इससे इनकार कर दिया। 
एफ़डीए की ओर से यह इनकार ज़रूरी इसलिए है कि अब तक ऐसा कोई प्रयोग नहीं हुआ है जिससे यह साबित होता हो कि क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से कोरोना ठीक हो सकता है।
हालांकि इस पर प्रयोग कुछ प्रयोग हुए हैं या हो रहे हैं, पर अब तक कोई नतीजा नहीं आया है, जिससे इस दावे की पुष्टि होती हो कि इस दवा से कोरोना का इलाज किया जा सकता है।

क्लोरोक्वीन पर प्रयोग

फ़्रांस में एक छोटे समूह में हुए प्रयोग के बाद स्पेसएक्स कंपनी के प्रमुख एलन मस्क ने ट्वीट किया कि कोरोना के इलाज में क्लोरोक्वीन पर विचार किया जा सकता है। फ्रांस में 20 लोगों के एक समूह पर क्लोरोक्वीन का प्रयोग किया गया। 
दरअसल हुआ यह कि कुछ लोगों को 200 मिलीग्राम हाइड्रोक्लोरोक्वीन सल्फ़ेट 10 दिन तक दी गई। इसमें से 70 प्रतिशत लोगों को राहत मिली। लेकिन छह लोगों को हाइड्रोक्लोरोक्वीन सल्फ़ेट के साथ-साथ एज़ीथ्रोमाइसिन भी दिया गया है। ये सभी पूरी तरह 6 दिन में वायरस से ठीक हो गए। 
लेकिन शोधकर्ताओं ने ख़ुद कहा है कि उन्होंने इतने कम लोगों पर यह प्रयोग किया है कि उसके नतीजे को भरोसेमंद नहीं माना जा सकता है।

डब्लूएचओ की मुहर नहीं

इस प्रयोग को  पाइलट तो माना जा सकता है, पर इसके नतीजे को अंतिम नहीं माना जा सकता है। एफ़डीए ने इसे सही नहीं माना। इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी इसकी पुष्टि नहीं की है। 
क्लोरोक्वीन पर दूसरी जगहों पर भी प्रयोग हुए हं। मिनेसोटा विश्वविद्यालय ने भी इस पर शोध किया है, पर उसका नतीजा अभी नहीं पता चला है। इसलिए फ़िलहाल, क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना के इलाज के रूप में नहं करना चाहिए।

पेरू में सदियों पहले इस्तेमाल

पर दिल्ली में ठीक इसका उल्टा हुआ। दिल्ली में लोग दवा दुकानों पर टूट पड़े और बड़ी मात्राा में क्लोरोक्वीन खरीद लिया। दरअसल क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल सदियों पहले लातिन अमेरिकी देश पेरू में बुखार ठीक करने के लिए किया जाता था।
भारत में अंग्रेजों ने इससे मलेरिया का इलाज शुरू किया और सफल रहे। यह सिनकोना की छाल से बनाया जाता है, जिसकी खेती पश्चिम बंगाल के दुआर के इलाक़ों में बहुतायत और आसानी से की जाती है। यह सस्ता है और आसानी से उपलब्ध भी है।

दिल्ली और दूसरी जगहों से जो लोग यह दवा खरीद ले गए, उनके ऊपर इसका क्या असर पड़ा, यह पता चल जाए तो बड़ी बात है। 

पर फिलहाल, क्लोरोक्वीन को कोरोना की दवा न माना जाए और इसका इस्तेमाल आप न करें।

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