CBSE की पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों और विसंगतियों को लेकर छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 12वीं क्लास के कई छात्रों की शिकायतें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। जिनमें वे बता रहे हैं कि बोर्ड द्वारा पुनर्मूल्यांकन के तहत अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की लिखावट उनकी मूल लिखावट से बिल्कुल अलग है। इस खुलासे के बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दूसरी तरफ लीपापोती भी शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद मंत्रालय का कर्तव्य पूरा हो गया है।
CBSE ने इस साल कक्षा 12 की परीक्षाओं के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली शुरू की। इस नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का मकसद देशभर में परीक्षा की सेफ्टी में और सुधार करना और मैन्युअल गिनती की गलतियों को कम करना था। हालांकि, तकनीकी खामियों और छात्रों की शिकायतों की वजह से अब यह भी विवादों के केंद्र में है।

वेदांत और संजना की शिकायतें

यह पूरा विवाद तब सामने आया जब दिल्ली के कक्षा 12वीं के छात्र वेदांत का सोशल मीडिया (X) पर किया गया एक पोस्ट वायरल हो गया, जिसे करीब 29 लाख लोगों ने देखा। वेदांत ने पोस्ट में लिखा, "फिजिक्स (Physics) में उम्मीद से बहुत कम नंबर मिलने के बाद हमने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। आज जब हमें कॉपी मिली, तो मैं पूरी तरह टूट गया हूं क्योंकि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका मेरी नहीं है।" उसके बाद संजना और करीब 11 और छात्रों ने इसी तरह की शिकायतें एक्स पर कीं।
संजना नाम की एक अन्य छात्रा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी केमिस्ट्री (Chemistry) की उत्तर पुस्तिका को लेकर यही शिकायत की। संजना को केमिस्ट्री थ्योरी में 70 में से केवल 11 अंक मिले थे। उसने आरोप लगाया कि पहली शीट जिस पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी है, वह तो उसकी है, लेकिन अंदर का एक भी पेज उसकी लिखावट से मेल नहीं खाता। संजना ने सबूत के तौर पर अपनी अंग्रेजी की कॉपी भी साझा की। संजना के बाद कई अन्य छात्रों ने भी धुंधली स्कैनिंग, गायब पेज और नंबरों की गड़बड़ी की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
ताज़ा ख़बरें
तमाम छात्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई उत्तर पुस्तिका की लिखावट, अक्षरों की बनावट, शब्दों के बीच का अंतर और वाक्य प्रवाह उनके अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस और कई अन्य विषयों के पेपर तथा उनके हाथ से लिखे नोट्स से बिल्कुल अलग हैं। अलग अलग छात्रों ने अलग-अलग विषयों को लेकर शिकायत की है। ऐसे छात्रों के सवाल भी एक ही थे कि अगर यह कॉपी उनकी नहीं है, तो उनके रोल नंबर के तहत किस छात्र की कॉपी जांची गई?

वेदांत को ट्रोलर्स ने 'पाकिस्तानी' कहा

इधर, सोशल मीडिया पर छात्रों की शिकायतें बढ़ रही थीं और उधर इस सवाल को उठाने वाले वेदांत को ट्रोल किया जा रहा था। वेदांत को 'एंटी-नेशनल' और 'पाकिस्तानी' तक कह डाला गया। इस पर वेदांत के भाई सिद्धांत श्रीवास्तव ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वेदांत पढ़ाई में व्यस्त रहने के कारण पहले ट्विटर (X) पर नहीं था, लेकिन अपनी जायज समस्या को उठाने के लिए परिवार ने यह नया अकाउंट बनाया है। लेकिन ट्रोलर्स शांत नहीं हुए। यहां बताना ज़रूरी है कि इन दिनों एक्स और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर सरकार विरोधी मुद्दा उठाने वालों को फौरन पाकिस्तानी और देशद्रोही करार दे दिया जाता है। वेदांत का मामला सबसे ताज़ा है। कुछ ट्रोलर्स ने इसे कॉकरोच जनता पार्टी का फर्जी अभियान तक कह डाला। साथ में यह भी जोड़ा कि सीजेपी का संबंध पक्की तौर पर पाकिस्तान से है।

सीबीएसई के कामकाज में खामियां

छात्रों की शिकायतें सामने आने के बाद यह साबित हुआ कि सीबीएसई के कामकाज में गंभीर खामियां हैं। उसके पोर्टल तक में तकनीकी खामियां हैं, जिन पर लाखों छात्रों का भविष्य निर्भर है। 19 साल के युवक निसर्गा अधिकारी ने 22 मई को ट्वीट किया। जिसमें उसने लिखा- मैंने फरवरी में CBSE के OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल) को हैक कर लिया था और CERT.In को इसकी खामियों की सूचना दी थी, लेकिन वे उनमें से अधिकांश को ठीक नहीं कर पाए। मैंने इस बारे में एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट लिखा है।
निसर्गा अधिकारी ने ब्लॉग पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए खोजी गई हर सुरक्षा खामी का विस्तृत वर्णन किया है, जिसमें शामिल हैं:
  • मास्टर पासवर्ड लीक किया जा सकता है
  • क्लाइंट-साइड 2fac/OTP सत्यापन का वैकल्पिक समाधान
  • डमी ब्राउज़र मान सेट करके संपूर्ण आंतरिक ऐप (डैशबोर्ड, मूल्यांकनकर्ता विवरण आदि) तक टोकन रहित पहुंच
  • पुराना पासवर्ड जाने बिना किसी भी पासवर्ड को बदलना
  • एक ऐसी सुरक्षा खामी जो किसी भी यूजर को परीक्षा के मार्क्स को संपादित (editing) करने की अनुमति देती है

लोग इस पोस्ट पर बहुत जबरदस्त प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा है- एक जेन ज़ी ने वह खोज निकाला जिसे संस्थान कई साल से अनदेखा करते रहे। यह महज़ सुरक्षा में चूक नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है। लाखों छात्रों की सुरक्षा कभी भी भाग्य पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

गुड़गांव के सुमीत शाह ने एक्स पर लिखा है- इसीलिए शिक्षा मंत्री मज़ाक के पात्र बनते जा रहे हैं। पेपर लीक, हैक की गई वेबसाइटें और भी बहुत कुछ। देश भर में लाखों-करोड़ों छात्र एनटीए और सीबीएसई जैसी एजेंसियों की अक्षमता का खामियाजा भुगत रहे हैं। इस बीच,
धर्मेंद्र प्रधान आराम से शीर्ष पर बैठे हैं। कोई जवाबदेही नहीं। किसी भी उच्च पदस्थ अधिकारी को बर्खास्त नहीं किया गया है।
बहुत सारे लोग अब निसर्गा अधिकारी की सुरक्षा को लेकर चिन्ता जता रहे हैं। 

सरकार और सीबीएसई का बयान

विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि आईआईटी-मद्रास (IIT-Madras) और आईआईटी-कानपुर (IIT-Kanpur) के तकनीकी विशेषज्ञ इस साल शुरू की गई परीक्षा-पश्चात पुनर्मूल्यांकन सेवाओं में आ रही सभी तकनीकी दिक्कतों की जांच करेंगे। साथ ही सीबीएसई को एक त्रुटिहीन (Glitch-free) प्रक्रिया सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।
सीबीएसई सूत्रों के अनुसार, बोर्ड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आ रही शिकायतों पर सक्रियता से काम कर रहा है और छात्रों व अभिभावकों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कुछ मामलों में समस्याओं का समाधान भी कर दिया गया है।
देश से और खबरें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक दिन पहले मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला था। राहुल गांधी ने कहा था- "मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया। दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी, और एक हफ़्ते से OSM, ग़लत मार्किंग और जाँच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।" राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन मदद के बजाय बीजेपी के आईटी सेल द्वारा उसे 'देशद्रोही', 'सोरोस एजेंट' और 'डीप स्टेट' का हिस्सा बताकर प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं और 'जेन जी' (Gen Z) से डरती है क्योंकि वे सवाल पूछ रहे हैं।