मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने छत्तीसगढ़ का अपना प्रस्तावित दो दिवसीय दौरा स्थगित कर दिया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर 2026 को होना था। उनके साथ चुनाव आयोग के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी छत्तीसगढ़ जाने वाले थे। चुनाव आयोग ने दौरा टालने के पीछे “अपरिहार्य कारणों” का हवाला दिया है। नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी।

दंतेवाड़ा, बस्तर और कवर्धा जाने का था कार्यक्रम

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक CEC ज्ञानेश कुमार को छत्तीसगढ़ में कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का दौरा करना था। इनमें दंतेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी माता मंदिर, बस्तर का चित्रकोट वॉटर फॉल (जलप्रपात- झरना) और कवर्धा जिले का भोरमदेव मंदिर शामिल थे। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की ओर से मंगलवार को जारी एक पत्र में उनके दौरे के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। ज्ञानेश कुमार को उनके दौरे की अवधि के लिए राजकीय अतिथि (State Guest) घोषित किया गया था।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि चुनाव आयोग ने CEC ज्ञानेश कुमार और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का छत्तीसगढ़ दौरा अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया है। पत्र के मुताबिक, दौरे की संशोधित तारीख चुनाव आयोग से प्राप्त होने के बाद अलग से सूचित की जाएगी। हालांकि, आयोग ने दौरा टालने का कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
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ज्ञानेश कुमार के कार्यक्रम लगातार स्थगित होने पर सवाल

CEC का छत्तीसगढ़ दौरा ऐसे समय टला है जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज है। इससे पहले सितंबर में उत्तर प्रदेश में ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी के युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी स्थगित किए गए थे। इन कार्यक्रमों में उन्हें Electoral Literacy Clubs और ECINET से जुड़े कार्यक्रमों में छात्रों, शिक्षकों और बूथ लेवल अधिकारियों से बातचीत करनी थी।
मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रमों के स्थगन के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव कई कारणों से हो सकता है, जिनमें स्थान की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और अन्य परिस्थितियां शामिल हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक उन कार्यक्रमों को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था।

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद

छत्तीसगढ़ दौरा ऐसे समय स्थगित हुआ है जब Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर राजनीतिक और न्यायिक सवाल उठ रहे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस और सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण तथा पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में अपील दायर किए जाने सहित कई मुद्दे शामिल थे।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने जुलाई में कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र भी लिखे थे और एक कार्य-वितरण आदेश को लेकर 2023 के कानून की धारा 18(1) और 18(2) के उल्लंघन का आरोप लगाया था। बाद में दोनों ने संयुक्त रूप से उस नए कार्य-वितरण को अलग कर दिया था।

विपक्ष ने CEC के इस्तीफे की मांग तेज की

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने अपने निशाने को व्यापक रूप से पूरे चुनाव आयोग से हटाकर विशेष रूप से CEC ज्ञानेश कुमार पर केंद्रित किया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की है। विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर तक चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च आयोजित किया, इसमें 300 से ज्यादा सांसद थे। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा ने आयोग से 100 मीटर की दूरी पर आकाशवाणी भवन पर धरना दे दिया। पुलिस ने रात 11 बजे के क़रीब राहुल, प्रियंका और अन्य सांसदों को हिरासत में लेकर वो जगह खाली कराई। इसी तरह 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार विरोधी मार्च आयोजित किया है।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच और SIR प्रक्रिया को रोकना शामिल है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई हो रही है। ऐसे माहौल में छत्तीसगढ़ का प्रस्तावित दौरा अचानक स्थगित होना राजनीतिक और चुनावी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, दौरा स्थगित करने के कारण के रूप में चुनाव आयोग ने केवल “अपरिहार्य कारण” बताया है।