सीजेआई चंद्रचूड और जस्टिस संजीव खन्ना
मौजूदा चीफ जस्टिस ने अपना पत्र कानून मंत्रालय को भेजा है। जस्टिस खन्ना को लेकर कोई विवाद नहीं है। वैसे भी चीफ जस्टिस बनने के बाद वो भी 6 महीने बाद रिटायर हो जायेंगे। केंद्र सरकार मौजूद चीफ जस्टिस के प्रस्ताव को इसलिए मान लेगी। कई बार जजों की वरिष्ठता को दरकिनार करके सरकार ने नियुक्तियां की हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कम ही विवाद हुआ है। लेकिन तमाम हाईकोर्टों में ऐसे विवाद भरे हुए हैं।
चीफ जस्टिस की बातें दिल से निकल रही हैं। वो जो बोल रहे हैं, उसके संकेत समझे जा सकते हैं। हालांकि जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन का फैसला, चुनावी बॉन्ड की जांच न होने देने का फैसला, राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पांच वर्षों से बिना मुकदमा चलाये जेलों में रखा जाने का मामला, फादर स्टेन स्वामी की मौत, प्रोफेसर जीएन साई बाबा की मौत का मामला, जाकिया जाफरी को इंसाफ न मिलने जैसे केस जब याद किये जायेंगे तो सुप्रीम कोर्ट या देश की न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर बात तो जरूर होगी।