केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 24 मई 2026 को समाप्त होने वाला था। बुधवार को जारी सरकारी आदेश के अनुसार यह फैसला लिया गया। हालांकि नेता विपक्ष राहुल गांधी सीबीआई डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया में मोदी सरकार द्वारा अपनाए गए तरीके पर विरोध जता चुके हैं।
कार्मिक मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, “नियुक्ति समिति ने चयन समिति की सिफारिश पर कर्नाटक कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद (61 वर्ष) को सीबीआई निदेशक के पद पर 24 मई 2026 के बाद एक वर्ष के लिए कार्यकाल बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।”
यह फैसला मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में लिया गया। समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे। राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक के चयन प्रक्रिया पर जोरदार आपत्ति जताई और इसे “पहले से तय” बताया। उन्होंने लिखित असहमति नोट में कहा कि वे “ऐसी पूर्वाग्रही चयन समिति” का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
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राहुल गांधी की आपत्ति क्या है

राहुल गांधी ने अपने दो पेज के असहमति नोट में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सीबीआई का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों की महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रखा गया, जिससे प्रक्रिया का मजाक उड़ाया गया। उन्हें स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट (self-appraisal reports) या 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट्स पहले से उपलब्ध नहीं कराई गईं। बैठक के दौरान ही 69 उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड्स देखने को कहा गया। उन्होंने लिखा, “हर उम्मीदवार के इतिहास और परफॉर्मेंस का विस्तृत मूल्यांकन ज़रूरी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया को सरकार के पसंदीदा उम्मीदवार को चुनने के लिए डिजाइन किया गया है।
राहुल गांधी ने यह भी याद दिलाया कि विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल करने का मकसद संस्थागत कब्जे (institutional capture) को रोकना है, लेकिन उन्हें कोई सार्थक भूमिका नहीं दी गई। उन्होंने पहले 21 अक्टूबर और 5 मई (पिछले वर्ष) को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए सुझाव दिए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

प्रवीण सूद का कार्यकाल दूसरी बार बढ़ा

प्रवीण सूद को 25 मई 2023 को दो वर्ष के लिए सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। पिछले साल मई में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उनका कार्यकाल एक साल बढ़ाया था। यह उनका दूसरा विस्तार है। 2021 के कानून (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 में संशोधन) के प्रावधानों के तहत यह विस्तार दिया गया है।

कारण और उपलब्धियां:

सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने सीबीआई में नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखने और भ्रष्टाचार-विरोधी गतिविधियों को प्रभावित न होने देने के लिए यह फैसला लिया। सूद को सीबीआई में लंबित जांच मामलों को काफी कम करने का श्रेय दिया जाता है। 2020 में 1,695 लंबित मामले थे, जो 2025 में घटकर 1,048 रह गए। वर्ष 2025 में 1,022 मामलों में मुकदमों की सुनवाई पूरी हुई।

कई नियुक्तियों में सरकार के फैसले विवादित रहे

सीबीआई प्रमुख के चयन में राहुल गांधी की असहमति ऐसे समय में आई है जब मोदी सरकार ने विभिन्न संवैधानिक और महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति नियमों में बदलाव किए हैं। जिसमें नेता विपक्ष और न्यायपालिका की भूमिका को सीमित कर दिया गया।
चुनाव आयुक्तों (Chief Election Commissioner और Election Commissioners) की नियुक्ति: 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश (समिति में पीएम, नेता विपक्ष और सीजेआई शामिल थे) को बदलते हुए सरकार ने कानून बनाया। नई व्यवस्था में चयन समिति में सीजेआई की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। इससे सरकार को नियुक्तियों में अधिक नियंत्रण मिला।
सीबीआई निदेशक: लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम के तहत नियुक्ति अभी भी पीएम, सीजेआई और लीडर ऑफ ऑपोजिशन की समिति से होती है। लेकिन सरकार हर बार अपनी चलाती है। राहुल गांधी ने अब जो मुद्दा उठाया है, वो यही है।
अन्य पद (जैसे CIC - Chief Information Commissioner आदि): कई अन्य संस्थानों (सीवीसी, एनएचआरसी, लोकपाल आदि) की नियुक्तियों में भी चयन समिति में बदलाव या सरकार के प्रभाव को बढ़ाने वाले कदम उठाए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बदलाव संस्थागत स्वतंत्रता को मजबूत करने के बजाय सरकार के पक्ष में झुकाव बढ़ाते हैं, जबकि सरकार इन्हें संसद की सर्वोच्चता और सुधार बताती है। सरकार की प्रक्रिया के तहत नियुक्त अधिकारी या उस संस्था का प्रमुख कठपुतली बनकर सरकार के लिए काम करता है। तमाम सुरक्षा और जांच एजेंसियों का विपक्षी दलों, पत्रकारों, सोशल एक्टिविस्टों के मामले में ऐसा ही रवैया सामने आया है।