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प्रतीकात्मक तसवीर।

कोरोना ड्यूटी पर स्वास्थ्य कर्मियों की मौत वाला बीमा क्यों हटाया?

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए जो बीमा योजना की घोषणा पिछले साल की थी उसको वापस लेने का फ़ैसला किया है। उस बीमा योजना के तहत कोरोना ड्यूटी पर किसी स्वास्थ्य कर्मी की मौत होने पर 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था। 

पिछले साल जब कोरोना संक्रमण फैल रहा था तब पीपीई किट, एन-95 मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों की कमी की शिकायतों के बीच स्वास्थ्यकर्मी भी तेज़ी से कोरोना से संक्रमित हो रहे थे। तब अस्पतालों में सेवा देने में कुछ स्वास्थ्य कर्मियों में हो रही हिचकिचाहट और विरोध के उठते स्वर के बीच सरकार ने कुछ घोषणाएँ की थीं। प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण पैकेज के तहत कोरोना ड्यूटी पर स्वास्थ्य कर्मियों की मौत को लेकर एक स्वास्थ्य योजना की घोषणा की गई थी। यह योजना इसलिए थी कि कोरोना इलाज में लगे किसी स्वास्थ्य कर्मी की मौत हो जाती है तो उसके परिवार की अच्छी देखरेख हो पाएगी। अब इसी योजना को वापस लिया गया है।

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इस संबंध में केंद्र सरकार ने राज्यों को पत्र भी लिखा है। पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राज्यों को भेजे गए उस पत्र में कहा गया है कि वह योजना 24 मार्च को बंद हो गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने पत्र में कहा है कि 'योजना ने एक बहुत प्रभावी सुरक्षा के रूप में काम किया है और कोरोना के कारण अपनी जान गँवाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को राहत देने में सक्षम रहा है। लेकिन इसे अब ख़त्म किया जाना होगा, इसी दिन।'

अब स्वास्थ्य सचिव के इसी दिन का मतलब 24 मार्च से है। उस पत्र में भी कहा गया है कि 24 मार्च की आधी रात तक जो दावे किए गए उनको ही उस बीमा योजना का लाभ मिलेगा। हालाँकि रिपोर्ट में अब कहा जा रहा है कि सरकार उसकी जगह पर नयी बीमा योजना लाएगी।

तो सवाल है कि देश में अब तक कितने स्वास्थ्य कर्मियों की कोरोना संक्रमण के कारण जानें गईं। केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई ऐसी सूची जारी नहीं की गई है।

आधिकारिक तौर पर कोई आँकड़ा भी नहीं दिया गया है। लेकिन राज्यों को जो पत्र भेजा गया है उसमें कहा गया है कि 287 दावे की प्रक्रिया की गई है। 

हालाँकि, केंद्र के इस आँकड़े पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर सवाल उठाते हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार वह कहते हैं, 'गौरतलब है कि 736 मृतकों में से केवल 287 डॉक्टरों को 50 लाख रुपये दिए गए हैं।'

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बता दें कि इस योजना की घोषणा निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले साल 26 मार्च को किया गया था और तब इसे 90 दिनों के लिए लागू किया गया था। लेकिन बाद में इसे एक साल तक के लिए बढ़ा दिया गया था। अब जो केंद्र ने पत्र भेजा है उसमें भी इसी का ज़िक्र किया गया है कि इस एक साल की बढ़ाई हुई अवधि ख़त्म हो गई है। 

लेकिन इस पत्र में इस तरह का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है कि पिछले साल कोरोना संक्रमण की पहली लहर से कहीं ज़्यादा तेज़ी से यह दूसरी लहर फैल रही है। भारत में पिछले साल 30 जनवरी को पहली बार कोरोना संक्रमण का मामला आया था। हर रोज़ संक्रमण के मामले घटते-बढ़ते रहे, लेकिन पहली बार एक दिन में एक लाख से ज़्यादा केस आने में 1 साल दो महीने लगे। यानी क़रीब 425 दिन। हर रोज़ अब एक लाख से दो लाख के पहुँचने में सिर्फ़ दस दिन लगे।

centre withdraws insurance for healthcare workers who died on covid duty - Satya Hindi

14 अप्रैल को 2 लाख केस आए थे जो पाँचवें दिन बढ़कर 2 लाख 73 हज़ार से ज़्यादा हो गए। संक्रमण कितनी तेज़ी से फैल रहा है यह इससे ही पता चलता है कि 4 अप्रैल को पहली बार एक दिन में 1 लाख से ज़्यादा केस आए थे और 14 अप्रैल को एक दिन में 2 लाख से ज़्यादा केस हो गए। पहली लहर में एक दिन में सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले क़रीब 97 हज़ार आए थे, लेकिन इस बार यह 2 लाख 73 हज़ार से ज़्यादा हो गए।

इस बार कोरोना नयी क़िस्म का भी आ गया है। संक्रमण को ज़्यादा घातक बताया जा रहा है। अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमित हो रहे हैं। 

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