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आधी रात को चाँद की सतह पर उतरेगा भारत का चंद्रयान-2

शुक्रवार रात 1.30 से 2.30 के बीच का समय। पूरी दुनिया की निगाहें टिकी होंगी भारत के चंद्रयान-2 पर जब उसका लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर सॉफ़्टलैन्डिंग करेगा। और उसके बाद सुबह 5.30 से 6.30 के बीच लैंडर से निकलेगा रोवर प्रज्ञान। इसरो के लिए यह ख़ास क्षण होगा क्योंकि उसने अब तक पहले कभी 'सॉफ्टलैन्डिंग' नहीं कराई है। 
उससे भी बड़ी बात यह है कि क्या चंद्रयान -2 चंद्रमा पर पानी के कणों का पता लगा लेगा और उनके बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठी कर लेगा? क्या चंद्रयान-2 सौर प्रणाली के उद्भव के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने में कामयाब रहेगा?
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चाँद के गड्ढों के बीच प्रयोग

इसरो ने कहा है कि ‘चंद्रयान-2' अपने लैंडर को 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश में दो गड्ढों- ‘मैंजिनस सी' और ‘सिंपेलियस एन' के बीच ऊँचे मैदानी इलाके में उतारेगा। अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि प्रस्तावित ‘सॉफ्ट लैंडिंग' दिलों की धड़कन थाम देने वाली साबित होने जा रही है क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है। सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग' से भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। 
लैंडर में तीन पे लोड हैं, जो चंद्रमा की सतह और उसकी सतह के नीचे के कुछ वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। 
भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थानी (इसरो) ने इस पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए एक एनीमेटेड वीडियो जारी किया है। 
इसरो ने बताया है कि रोवर  प्रज्ञान में तीन कैमरे होंगे, लैंडर पोजीशन डीटेक्शन कैमरा, लैंडर हॉरीजंटल वेलोसिटी कैमरा और लैंडर हैज़रडस डीटेक्शन एंड अवॉयडन्स कैमरा। ये तीनों कैमरे इसलिए लगाए हैं कि लैंडर सही तरीके से सॉफ़्टलैंडिंग कर ले। 

वैज्ञानिक प्रयोग

इसके अलावा दो ख़ास किस्म की मशीनें होंगी, केए बैंड अल्टीमीटर-1 केए बैंड अल्टीमीटर-2 और लेज़र अल्टीमीटर यानी लासा भी होंगी। ये मशीनें चंद्रमा की धरातल का अध्ययन करेंगी। 
इस सॉफ़्टलैन्डिंग से चाँद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश भारत बन जाएगा।
रोवर प्रज्ञान अपने परिचालन के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। यह लैंडर विक्रम को जानकारी भेजेगा और विक्रम बेंगलुरु के पास ब्याललु स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क को जानकारी प्रसारित करेगा। इसरो के अनुसार लैंडर में तीन वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं जो चाँद की सतह और सतह के नीचे वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। रोवर के साथ दो वैज्ञानिक उपकरण हैं जो चाँद की सतह से संबंधित समझ में मजबूती लाने का काम करेंगे। इसरो के मुताबिक़, चाँद का दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र बेहद दिलचस्प है क्योंकि यह उत्तरी ध्रुव क्षेत्र के मुकाबले काफी बड़ा है और अंधकार में डूबा रहता है। 
लैंडर विक्रम के चंद्रमा की सतह पर उतरने और रोवर प्रज्ञान के बाहर निकलने की पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो के ट्रैकिेंग एंड कमान्ड नेटवर्क केंद्र पर इसे देखेंगे। उनके साथ 60-70 स्कूली बच्चे होंगे। 
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क़मर वहीद नक़वी
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