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चीन की हिमाकत, अरुणाचल में बसा लिया गांव!

एक ओर भारत सरकार कहती है कि उसने चीन को लद्दाख में मुंहतोड़ जवाब दिया है और अब वह कभी भी भारत की सरहद में घुसपैठ की कोशिश नहीं करेगा। वहीं, दूसरी ओर चीन अरुणाचल में भारत की सीमा के अंदर घुस आया है और उसने एक पूरा गांव बसा लिया है। 

एनडीटीवी के मुताबिक़, इस गांव में 101 घर हैं और यह भारतीय सीमा के 4.5 किमी. अंदर है। यह गांव सुबनसिरी जिले के त्सारी चू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस नदी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच 1959 के बाद से कई बार झड़प हो चुकी है। यह इलाक़ा भारत और चीन के बीच लंबे वक़्त से विवादित रहा है और सैन्य संघर्ष वाला क्षेत्र रहा है। 

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पिछले साल जून में चीन ने पूर्वी लद्दाख में भारत की सीमा में घुसपैठ की कोशिश की थी। गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद से अब तक दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। 

एनडीटीवी ने कहा है कि जो ताजा सैटेलाइट तसवीरें मिली हैं, वे 1 नवंबर, 2020 की हैं जबकि इससे पहले की तसवीरें 26 अगस्त, 2019 की हैं और उसमें किसी तरह का निर्माण नहीं दिख रहा है। मतलब साफ है कि यह गांव पिछले साल बसाया गया है। 

चीन एक ओर बातचीत का नाटक करता है, दूसरी ओर वह सीमा पर घुसपैठ की कोशिश करता है और निर्माण कार्य जारी रखता है। चीन का भारतीय सीमा में गांव बसा लेना चिंता का विषय है।
एनडीटीवी की ओर से भारत के विदेश मंत्रालय को ये तसवीरें भेजी गयी हैं और मंत्रालय ने कहा है कि वास्तव में पिछले कुछ सालों में इस तरह का निर्माण हुआ है। सरकार का कहना है कि वह भी सीमा पर रोड, पुलों आदि का निर्माण कर रही है। 
China intrusion in arunachal pradesh constructed village - Satya Hindi

बीजेपी सांसद ने चेताया था 

नवंबर, 2020 में अरुणाचल प्रदेश से बीजेपी के सांसद तापिर गाव ने लोकसभा में चीन की राज्य में घुसपैठ को लेकर चेताया था। उन्होंने कहा था कि चीन ऊपरी सुबनसिरी जिले में घुसपैठ कर रहा है। उन्होंने सोमवार को एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘वहां निर्माण कार्य जारी है। चीन ऊपरी सुबनसिरी जिले में 60-70 किमी अंदर आ चुका है। वह नई डबल लेन की सड़क भी बना चुका है। वह सुबनसिरी नदी के साथ सड़क बना रहा है।’ 

सर्वेयर जनरल ऑफ़ इंडिया के एक नक्शे के मुताबिक़, यह साफ पता चलता है कि चीन का यह गांव भारत की सीमा में है। चीन का भारतीय सीमा में गांव बनाना दोनों देशों के बीच हुए कई समझौतों का उल्लंघन है।

चीन की नापाक हरक़तों पर देखिए विश्लेषण- 

अरुणाचल पर दावा 

ड्रैगन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है। विस्तारवाद की मंशा के कारण ही तिब्बत और ताइवान पर कब्जा करके बैठा चीन लगातार भारत की सीमाओं में अशांति के हालात बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि वह सीमा पर शांति की वकालत करता है लेकिन रक्षा मामलों के जानकार कहते हैं कि उसकी बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। 

मोदी सरकार को शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि ड्रैगन कितनी तेज़ी से भारत की सीमा के पास निर्माण कर रहा है।

पिछले साल दिसंबर में भी ऐसी सैटेलाइट तसवीरें सामने आई थीं, जिनसे पता चला था कि भारत-चीन और भूटान के बॉर्डर के मिलने वाली जगह से 5 किमी. की दूरी पर चीन ने तीन गांव बसा लिए थे। यह अरुणाचल प्रदेश का पश्चिमी इलाक़ा है, जहां चीन लगातार इस तरह की हरक़तें करता रहा है। 

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विस्तारवाद की इसी मंशा के कारण चीन ने गलवान घाटी, पैंगॉन्ग त्सो, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक, फाइव फिंगर्स में घुसपैठ की और एलओसी को बदलने की कोशिश की। यही काम वह चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान में भी कर रहा है और बलोचिस्तान और पीओके में उसके द्वारा किए जा रहे निर्माण के कारण वहां के बाशिंदे इमरान सरकार और उसका विरोध कर रहे हैं।
चीन और भारत के बीच विवाद का मुख्य कारण चीन का सीमांत इलाक़ों में लगातार ढांचागत काम करते रहना भी है। इसके जवाब में भारत ने भी सीमाई इलाक़ों में बेहतर सड़कें और जवानों के लिए ज़रूरी सुविधाओं का विस्तार किया है। 
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