ITBP के DG शत्रुजीत कपूर के अरुणाचल प्रदेश में झड़प वाले बयान और विपक्ष के हमले के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने अब बयान जारी किया है। कपूर की टिप्पणियां और अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग में तनाव की खबरें भारत-चीन वार्ता के एक महीने बाद आई हैं।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना से झड़प को लेकर ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान और विपक्ष के हमलों के बीच अब विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीनी सेना के तय गश्त पैटर्न के उल्लंघन के कारण सीमा पर तनाव की स्थिति बनती रही है।
विदेश मंत्रालय यानी एमईए का यह बयान तब आया है जब अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की गतिविधियों और भारतीय सैनिकों की गश्त में कथित रुकावट को लेकर विवाद गहरा गया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के एक बयान के बाद यह विवाद और बढ़ा। कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारतीय और चीनी पक्ष के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी थी और यह स्थिति अभी भी जारी है। कपूर के इस बयान पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। विपक्ष ने उन ख़बरों पर चिंता जताई जिनमें दावा किया गया है कि चीन की सेना अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भारतीय सैनिकों को गश्त करने से रोक रही है।
विवाद बढ़ने के बाद विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त पैटर्न से अलग हटकर गतिविधियाँ करती है तो भारत-चीन सीमा पर स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और किसी गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। हालाँकि, विदेश मंत्रालय ने ITBP प्रमुख के बयान में बताए गए विशिष्ट घटनाक्रमों पर विस्तृत जानकारी देने के बजाय इस मामले में रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।
ITBP प्रमुख ने क्या कहा था?
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में बल के जवानों को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश में हालात का ज़िक्र किया। यह ITBP कर्मियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित होने वाला वार्षिक कार्यक्रम है। इसी दौरान कपूर ने कहा कि हाल में अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारतीय और चीनी पक्ष के बीच आमने-सामने की स्थिति पैदा हुई थी और यह स्थिति अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि ITBP की नई गठित शौर्य कमांडो टीमों ने इन परिस्थितियों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। कपूर ने यह भी बताया कि बल ऊँचाई वाले पहाड़ी इलाक़ों में विशेष अभियान चलाने की अपनी क्षमता को मज़बूत कर रहा है।कपूर का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तनाव को लेकर किसी वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की ओर से आया सार्वजनिक बयान था। इससे पहले तक तक्सिंग क्षेत्र में तनाव की ख़बरें सामने आई थीं, लेकिन इस बयान ने कई स्थानों पर झड़प की स्थिति होने की बात को चर्चा के केंद्र में ला दिया। हालांकि, कपूर ने अपने बयान में इन स्थानों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया और न ही यह साफ़ किया कि तनातनी या झड़प की स्थिति किन घटनाओं के कारण पैदा हुई।
तक्सिंग क्षेत्र में तनाव और भारत-चीन सैन्य बातचीत
क़रीब एक महीने पहले अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में तनाव की खबरें सामने आने के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत हुई थी। सितंबर में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई। यह बैठक भारतीय क्षेत्र में वाचा-दमाई सीमा बैठक बिंदु पर आयोजित की गई थी। वाचा, किबिथू सेक्टर में स्थित भारत का पूर्वी छोर का बिंदु है।हालाँकि, भारत-चीन वार्ता के बाद भी ITBP प्रमुख के बयान ने सीमा पर जारी स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। उनके बयान में कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति होने और उसके जारी रहने की बात कही गई, लेकिन घटना के स्थानों और परिस्थितियों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया।
कांग्रेस ने मोदी सरकार से मांगा जवाब
ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी ने शुक्रवार को कहा कि गलवान के बाद अब अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ऐसी खबरें हैं कि चीन अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है जो भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर तत्काल जवाब देने की मांग की। कांग्रेस ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण मांगा जिनमें दावा किया गया है कि चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों की गश्त को रोकने की कोशिश की।
विदेश मंत्रालय ने क्या जवाब दिया?
विपक्ष के हमले के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त पैटर्न से अलग हटकर गतिविधियां करती है तो भारत-चीन सीमा पर स्थिति समय-समय पर प्रभावित होती है। जायसवाल ने कहा, 'सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर किसी गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ दोनों देश एलएसी के कुछ क्षेत्रों में उसकी समझ बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं, ताकि सीमा प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। हालाँकि, मंत्रालय ने ITBP प्रमुख के बयान में बताए गए विशिष्ट घटनाक्रमों पर सीधे विस्तृत जवाब नहीं दिया। प्रवक्ता ने इस संबंध में सवालों के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।
शौर्य कमांडो टीमों को मजबूत कर रहा है ITBP
बहरहाल, ITBP प्रमुख ने अपने संबोधन में बल की विशेष अभियान क्षमता बढ़ाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ITBP को चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी 2004 में दी गई थी और बल को अपने मूल दायित्व पर ध्यान बनाए रखना चाहिए। कपूर के मुताबिक़ ITBP अब पारंपरिक गुरिल्ला युद्ध के बजाय ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में लड़ाई और विशेष अभियानों के लिए प्रशिक्षित बल तैयार करने पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रत्येक बटालियन में एक शौर्य कमांडो टीम बनाई गई है। इसके अलावा दो और टीमों का गठन किया गया है। योजना के अनुसार, आगे चलकर प्रत्येक बटालियन में एक पूरी कंपनी के स्तर पर शौर्य कमांडो उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।कपूर ने कहा कि ITBP जल्द ही शौर्य कमांडो की एक पूरी बटालियन तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। यह बटालियन ऊंचाई वाले इलाकों में विशेष अभियानों के लिए बल की विशिष्ट इकाई होगी। इसका मक़सद कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने और सीमा पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
चीन का मुकाबला करने के लिए ड्रोन पर जोर
ITBP प्रमुख ने अपने संबोधन में चीन की सैन्य क्षमता और आधुनिक हथियारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट ने आधुनिकीकरण और निवेश के मामले में काफी प्रगति की है। ऐसे में पारंपरिक तरीकों से उसका मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कपूर ने ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों को भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन के इस्तेमाल से अपेक्षाकृत छोटी ताकतें भी बड़ी सैन्य शक्तियों को चुनौती दे सकती हैं।उन्होंने बताया कि ITBP ने अपने 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन पर खर्च किया है। उनके अनुसार, सीमा की सुरक्षा करने वाली सभी बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बनाई गई हैं। ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और बल अपने स्तर पर भी ड्रोन तैयार कर रहा है। कपूर ने कहा कि आधुनिकीकरण की एक अन्य योजना के तहत 3,500 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये तक का प्रावधान है, जिसमें से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन के लिए निर्धारित किए गए हैं। उनके मुताबिक, बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक में निवेश बढ़ाना जरूरी है।
पुराने हथियारों के आधुनिकीकरण की भी जरूरत
ITBP प्रमुख ने बल में हथियारों के आधुनिकीकरण की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मियों को यह अनुभव हो सकता है कि बल में इस्तेमाल होने वाले हथियारों में बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ है। कपूर ने माना कि हथियारों में कुछ बदलाव किए गए हैं, लेकिन बल को आधुनिक ज़रूरतों के अनुरूप और अधिक संसाधनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण की योजना में इसके लिए बड़ा प्रावधान किया गया है।
यह बयान तब आया है जब ITBP को चीन से लगी कठिन और ऊंचाई वाली सीमा पर निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होती है। बल की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विशेष कमांडो, ड्रोन और आधुनिक उपकरणों पर जोर दिया जा रहा है।