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न्यायपालिका में महिलाओं के लिए हो 50% आरक्षण: सीजेआई रमना

न्यायपालिका में ज़्यादा महिलाओं की भागीदारी की पैरवी करते रहे सीजेआई एनवी रमना ने कहा है कि भारत की न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश भर के लॉ कॉलेजों में भी इतने ही आरक्षण का समर्थन किया है।

सुप्रीम कोर्ट की महिला वकीलों ने सीजेआई और 9 नव नियुक्त न्यायाधीशों के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था। सीजेआई इसी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'यह आपका अधिकार है... आप न्यायपालिका और लॉ कॉलेजों में आरक्षण की मांग करने के हकदार हैं।'

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बता दें कि मौजूदा सीजेआई के कार्यकाल में एक साथ तीन महिला न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त की गई हैं और इसके साथ ही इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक साथ चार महिला जज- जस्टिस इंदिरा बनर्जी, हेमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत हों। हालाँकि, इस संख्या पर भी सीजेआई ने तब कहा था कि आज़ादी के 75 साल बाद भी शीर्ष अदालत में महिलाओं को सिर्फ़ 11 फ़ीसदी प्रतिनिधित्व ही मिला है। 

सीजेआई एनवी रमना ने इस बार जिन तीन महिला जजों को सिफ़ारिश की थीं और जिनको सरकार ने भी मंजूर कर लिया उनमें शामिल हैं- कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, तेलंगाना हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस हिमा कोहली और गुजरात हाई कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना भारत की पहली महिला सीजेआई बन सकती हैं।

सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के अलावा हाई कोर्ट में महिला जजों की नियुक्ति को भी तवज्जो देते रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाले सुप्रीम कॉलिजियम ने हाल में जिन 68 नामों को भेजा है उनमें 10 महिलाएँ शामिल हैं। 

बहरहाल, रविवार को महिला वकीलों को संबोधित करते हुए सीजेआई एनवी रमना ने कहा,

हमें न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की ज़रूरत है... यह हज़ारों वर्षों के उत्पीड़न का मुद्दा है। न्यायपालिका के निचले स्तरों में 30 प्रतिशत से कम न्यायाधीश महिलाएँ हैं... उच्च न्यायालयों में यह 11.5 प्रतिशत है। सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ़ 11-12 फ़ीसदी हैं।


सीजेआई एनवी रमना

उन्होंने कहा, 'देश में 17 लाख अधिवक्ताओं में से केवल 15 प्रतिशत महिलाएँ हैं। राज्य बार काउंसिल में केवल दो प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएँ हैं। मैंने यह मुद्दा उठाया कि बार काउंसिल ऑफ़ द इंडिया नेशनल कमेटी में एक भी महिला प्रतिनिधि क्यों नहीं है।' मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इनमें तत्काल सुधार की ज़रूरत है। 

उन्होंने कहा, 'आज बेटी दिवस है। आप सभी को बेटी दिवस की शुभकामनाएँ। बेशक... यह एक अमेरिकी परंपरा है, लेकिन हम दुनिया भर से कुछ अच्छी चीजों का जश्न मनाते हैं।'

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मुख्य न्यायाधीश ने असहज कामकाजी माहौल, कामकाजी माँओं के लिए महिला वॉशरूम और क्रेच जैसे बुनियादी ढाँचे की कमी सहित महिला वकीलों के सामने आने वाली दूसरी चुनौतियों का भी ज़िक्र किया। सीजेआई ने कहा, 'मैं बुनियादी ढांचे के मुद्दों को हल करने की कोशिश कर रहा हूँ... कार्यपालिका को बदलाव करने के लिए मजबूर कर रहा हूँ।' 

सीजेआई रमना पहले कह चुके हैं कि भारत को नेशनल ज्यूडिशियल इंफ्राटक्चर कॉरेपोरेशन की आवश्यकता है। सीजेआई ने पहले कहा था कि मैंने अपने हाई कोर्ट के दिनों में देखा था कि महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं थे।

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