कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली में 'झंडा फहराने के लिए' प्रोटेस्ट करने वालों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों की तैनाती, मैथ्यू वैनडाइक मामले और चीन सीमा तनाव को लेकर केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साधा।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसकी प्राथमिकता दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को रोकना है, न कि चीन सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटना। उन्होंने 'तिरंगा फहराने' के ख़िलाफ़ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति और अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ तनाव के मुद्दे उठाए। दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इसको लेकर तंज कसा।
दिपके ने आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर रही है, जबकि चीन सीमा पर तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दूसरे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दिपके की यह टिप्पणी तब आई है जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की स्थिति बने रहने की बात कही है। दूसरी ओर, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
दिपके ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के मामले को भी उठाया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि वैनडाइक का मामला सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता नहीं है, क्योंकि वह भारत का झंडा फहराने नहीं आया था, बल्कि कथित तौर पर आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रहा था। उनका यह बयान वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति दिए जाने के संदर्भ में था।
'कोई दिल्ली में प्रोटेस्ट न करे, यही प्राथमिकता है'
अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बजाय दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को रोकने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उनके मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली में कोई प्रदर्शन न करे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग न उठाए।
दिपके ने कहा, 'मैथ्यू वैनडाइक कोई बड़ी प्राथमिकता नहीं हैं, भारत-चीन सीमा की सुरक्षा कोई बड़ी प्राथमिकता नहीं है। प्राथमिकता क्या है? दिल्ली में कोई प्रदर्शन न करे, दिल्ली में कोई ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग न करे।' यह दिपके की ओर से सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर की गई राजनीतिक आलोचना है। सरकार ने इन आरोपों पर इस रिपोर्ट में शामिल सामग्री के आधार पर कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी है।
झंडा फहराने के लिए प्रदर्शन पर तंज
दिपके ने अपने बयान में भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रस्तावित प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने मैथ्यू वैनडाइक के मामले से इसकी तुलना करते हुए तंज किया कि अगर वैनडाइक भारत का झंडा फहराने आया होता तो शायद उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जाता। उन्होंने तंज में कहा कि वैनडाइक तो कथित तौर पर कुछ आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहा था, इसलिए यह कोई बड़ी बात नहीं है।
दिपके की इस टिप्पणी का मकसद सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाना था। हालांकि, मैथ्यू वैनडाइक के ख़िलाफ़ लगे आरोप और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को लेकर सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताएं अलग-अलग मामले हैं। दोनों के बीच तुलना दिपके ने अपने राजनीतिक बयान में की है।
मैथ्यू वैनडाइक कौन है और मामला क्या है?
मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने मार्च में उसे और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे मिजोरम के रास्ते म्यांमार में दाखिल हुए और वहां जातीय सशस्त्र समूहों के सदस्यों को ड्रोन युद्ध, सैन्य अभियानों, ड्रोन जोड़ने और जामिंग तकनीक का प्रशिक्षण दे रहे थे।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति दे दी। अदालत ने उनके साथ मामले में आरोपी छह यूक्रेनी नागरिकों को भी भारत से बाहर रहने की अनुमति 24 फरवरी 2027 तक बढ़ा दी। वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति मिलने के बाद दिपके ने सवाल उठाया कि सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है। उन्होंने इसे चीन सीमा की सुरक्षा और दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के साथ जोड़कर सरकार की प्राथमिकताओं पर तंज कसा।
ITBP प्रमुख ने क्या कहा था?
दिपके ने ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर के बयान का हवाला देते हुए चीन सीमा पर सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठाए। कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में ITBP के वार्षिक ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारत और चीन के पक्ष के बीच झड़प की स्थिति पैदा हुई थी और यह स्थिति जारी है। उन्होंने चीन की सैन्य क्षमता और उसके आधुनिकीकरण से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया था।दिपके ने सवाल उठाया कि जब सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां मौजूद हैं तब देश की राजधानी में प्रदर्शन रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती क्यों बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बलों और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सरकार की प्राथमिकताएँ सवालों के घेरे में हैं।
'चीन उन्हें लाल आंखें नहीं दिखाने दे रहा...'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए दिपके ने कहा कि चीन उन्हें 'लाल आंखें' नहीं दिखाने दे रहा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन्हें कुछ कहने नहीं दे रहे। यह टिप्पणी चीन के साथ सीमा विवाद और अमेरिका के साथ भारत के संबंधों के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर राजनीतिक कटाक्ष थी। दिल्ली में 273 कंपनियों की तैनाती बढ़ी
दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। इकोनॉमिक टाइम्स ने आधिकारिक सूत्रों के के हवाले से ख़बर दी है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह फ़ैसला दूसरी बार लिया है। इन बलों की तैनाती का कारण राजनीतिक और दूसरे समूहों की ओर से अचानक प्रदर्शन किए जाने की आशंका बताया गया है। इसके लिए ‘फ्लैश प्रोटेस्ट’ यानी कम समय के नोटिस पर अचानक होने वाले विरोध प्रदर्शनों की संभावना का हवाला दिया गया है।
इस महीने की शुरुआत में कॉकरोच जनता पार्टी और दूसरे समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर किए जा रहे थे। SIR चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इससे मतदाताओं के नाम हटने और मताधिकार प्रभावित होने का खतरा है। केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के पीछे संभावित प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला दिया है। वहीं, दिपके ने इसी तैनाती को सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का आधार बनाया।
SIR और ज्ञानेश कुमार पर विवाद
दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों का एक प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी समेत कुछ समूहों ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। इन समूहों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम अनुचित तरीके से नहीं हटना चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर आधिकारिक सूत्रों ने संभावित विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया है। दिपके का आरोप है कि सरकार विरोध की आवाजों को रोकने पर अधिक ध्यान दे रही है।