मुंबई के शिवाजी पार्क में बड़े प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अब दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर को आंदोलन की घोषणा की है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर से लोग दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा और पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो जहां रोका जाएगा, वही जगह जंतर-मंतर बन जाएगी। उन्होंने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित बर्बरता को दोहराया नहीं जाना चाहिए।

सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गड़बड़ियाँ हुई हैं और इस मामले में चुनाव आयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। दिपके ने कहा कि प्रदर्शन महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर शांतिपूर्ण तरीके से होगा।

देशभर से दिल्ली आएंगे लोग: दिपके

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से सीजेपी के समर्थक और प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि जो लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं वे लोकतंत्र को बचाने के इस आंदोलन में शामिल हों।
उन्होंने आगे कहा कि अगर दिल्ली पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है तो पुलिस जिस जगह रोकेगी, वही जगह प्रदर्शनकारियों का जंतर-मंतर बन जाएगी।

दिल्ली पुलिस को 20 जुलाई की घटना याद दिलाई

दिपके ने अपने बयान में 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन का विशेष रूप से ज़िक्र किया। उन्होंने सरकार और दिल्ली पुलिस से कहा कि उस दिन प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित बर्बरता को दोहराया न जाए।

उन्होंने कहा, 'हम महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलेंगे। यह सरकार और दिल्ली पुलिस पर निर्भर करता है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के हमारे अधिकार का सम्मान करते हैं या 20 जुलाई को देखी गई बर्बरता को दोहराते हैं।'
ताज़ा ख़बरें
20 जुलाई की घटना का ज़िक्र इसलिए अहम है क्योंकि उस दिन संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हजारों छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। बाद में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कुछ प्रदर्शनकारियों के शरीर पर छर्रों से चोट लगने के निशान दिखाई देने के दावे किए गए। इसके बाद आरोप लगे कि छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया था।

इस घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई और बल प्रयोग पर सवाल उठे थे। मामला अगस्त में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हिंसा और पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई। सीजेपी अब इसी घटना का हवाला देकर दिल्ली पुलिस को चेतावनी दे रही है कि 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग क्यों?

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जोड़ा है। इस आंदोलन को तेज करने की तत्काल वजह इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का खुलासा होने की बात कही गई थी।

CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हुई हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हुए हैं। इसी आधार पर पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।

दिपके ने अपने बयान में आंदोलन को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की।

मुंबई में 10 हजार लोगों के जुटने का दावा

दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का ऐलान मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए बड़े आंदोलन के बाद किया गया है। CJP के मुताबिक, मुंबई के प्रदर्शन में 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। इस सभा में अभिनेत्री शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और गायक-संगीतकार विशाल ददलानी सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया।

मुंबई में प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक नारों के साथ रचनात्मक तरीके से भी विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शन स्थल पर ‘Gyanu Must Go’ और ‘Democracy Saaf’ जैसे पोस्टर दिखाई दिए। बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों को भी विरोध के नारों में बदला गया। एक नारे में कहा गया, 'वोट चुराया मेरा, किसने ओ सनम? ज्ञानेश ने।' इस तरह प्रदर्शन में संगीत, पोस्टर और युवा संस्कृति के जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जताया गया।

ज्ञानेश कुमार के बाद किसकी बारी?

मुंबई की सभा में अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में Gen Z यानी युवा पीढ़ी के मार्च आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने अपने भाषण में कहा, 'अगर ज्ञानू इस्तीफा नहीं देते तो नंदू को इस्तीफा देना पड़ेगा, क्योंकि वास्तव में वही चुनावों में गड़बड़ी करवा रहे हैं।' दिपके ने आंदोलन को केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया।

जंतर-मंतर पर दूसरी बार आंदोलन की तैयारी

सीजेपी इससे पहले भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर लगभग एक महीने तक आंदोलन कर चुकी है। संगठन का दावा है कि उस आंदोलन के दबाव के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा था।
देश से और खबरें
अब पार्टी ने चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। 10 अक्टूबर का प्रस्तावित प्रदर्शन इस आंदोलन का अगला चरण होगा। सीजेपी ने साफ किया है कि उसकी मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है और मांग पूरी नहीं होने पर देशभर से लोगों को दिल्ली बुलाया जाएगा।

सीजेपी का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को जहाँ रोका जाएगा, वे वहीं अपना विरोध जारी रखेंगे। ऐसे में 10 अक्टूबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की व्यवस्था और SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।