चुनाव आयोग की ओर से देश में कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के खिलाफ विरोध का दायरा बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party–CJP) ने केरल के कोच्चि में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। शनिवार, 7 नवंबर को आयोजित इस प्रदर्शन में अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मोर्चे की अगुवाई की। आयोजकों के मुताबिक, रैली में काफी लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेना और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। प्रदर्शन को ‘जंतर-मंतर एट कोच्चि’ नाम दिया गया। इसके जरिए CJP ने दिल्ली में अपने आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाने की कोशिश की है।

मरीन ड्राइव से राजेंद्र मैदान तक निकला मार्च

CJP की ओर से आयोजित यह विरोध मार्च शनिवार को कोच्चि के मरीन ड्राइव से शुरू हुआ। अभिनेता प्रकाश राज ने इसकी अगुवाई की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। रैली का समापन राजेंद्र मैदान में हुआ, जहां CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने रैली को संबोधित किया।
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इस प्रदर्शन में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की केरल इकाई की अध्यक्ष चिंथा जेरोम भी शामिल हुईं। इससे प्रदर्शन को युवा संगठनों का समर्थन मिलने का संकेत मिला। पुलिस ने मार्च के रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की थी। यातायात नियंत्रित करने और सड़क जाम जैसी स्थिति रोकने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव पर भरोसा नहीं: अभिजीत दिपके

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शनिवार सुबह कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना हमला जारी रखा। दीपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में होने वाले चुनावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उनका दावा था कि चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल एक राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था सुनिश्चित होने तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन जारी रहेगा।
दीपके के मुताबिक, देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र चुनाव प्रणाली बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में गड़बड़ी के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। हालांकि, ये दीपके और CJP के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें चुनावी प्रक्रिया में धांधली साबित करने वाले किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केरल में CJP के सबसे ज्यादा सदस्य होने का दावा

अभिजीत दिपके ने कोच्चि में बड़ी संख्या में युवाओं के समर्थन की उम्मीद जताई। उन्होंने दावा किया कि CJP के पंजीकृत सदस्यों की सबसे बड़ी संख्या केरल में है। उनका कहना था कि केरल का युवा वर्ग लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में सामने आएगा। प्रदर्शन के आयोजकों ने इससे पहले राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों, सांस्कृतिक संगठनों, छात्र संगठनों, महिला संगठनों और युवा संगठनों से समर्थन मांगा था। इस आयोजन में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया अभियान भी चलाया गया था। कोच्चि के अलग-अलग इलाकों में स्थानीय आयोजन समितियां बनाई गई थीं। कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया था। इनमें त्रिशूर के करिंथलक्कूट्टम की संगीत प्रस्तुति, नाट्टक थिएटर ग्रुप का नाटक और लोकगीत शामिल थे।

दिल्ली में CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कोच्चि में आंदोलन

कोच्चि का यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले महीने दिल्ली में CJP के आंदोलन के दौरान पार्टी नेताओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस स्थान को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, दास और रंका ने प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश कर राष्ट्रीय ध्वज लहराया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों करीब एक सप्ताह जेल में रहे और बाद में इस शर्त पर रिहा हुए कि जंतर-मंतर के अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं रहने तक वहां दोबारा प्रदर्शन आयोजित नहीं करेंगे। इसके बाद CJP ने दिल्ली में तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की थी। मार्च से पहले अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भी राष्ट्रीय राजधानी में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में CJP नेताओं से पूछताछ की थी।

CJP पर विदेशी फंडिंग के आरोप, पार्टी ने मांगे सबूत

CJP के कोच्चि प्रदर्शन से पहले पार्टी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद भी सामने आया था। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि CJP के कार्यकर्ताओं को देश और विदेश में सक्रिय भारत-विरोधी संगठनों से आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने अभिजीत दीपके को भी कथित तौर पर अनधिकृत स्रोतों से धन मिलने का आरोप लगाया था। इन आरोपों पर CJP नेताओं ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी को लेकर ऐसे संदेह थे तो NEET से जुड़े आंदोलन के दौरान केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत क्यों की गई थी?
CJP नेता सौरव दास ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि पार्टी शुरुआत से ही आरोपों के समर्थन में सबूत मांग रही है। उनके मुताबिक, 3 जून को हुई पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही संगठन इस सवाल का जवाब मांग रहा है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का आधार क्या है। इस तरह कोच्चि का प्रदर्शन केवल SIR के खिलाफ आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ CJP और केंद्र सरकार के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का मुद्दा भी जुड़ गया।

दिल्ली से केरल तक आंदोलन ले जाने की रणनीति

CJP का कोच्चि आंदोलन इस लिहाज से अहम है कि संगठन अब अपने विरोध को दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय देश के अन्य हिस्सों में भी ले जाने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने, नेताओं की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद केरल में ‘जंतर-मंतर एट कोच्चि’ का आयोजन प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। आयोजकों का उद्देश्य SIR के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन जुटाना और मतदाता सूची तथा मतदान के अधिकारों से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना है।