जंतर-मंतर पर कथित अतिक्रमण और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड के उल्लंघन से जुड़े मामले में जमानत मिलने के कुछ दिनों बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अशुतोष रांका, अजिंक्य और सौरव दास ने शुक्रवार को संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होकर जमानतदारों (Sureties) का सत्यापन कराया। सत्यापन की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी हो गई, लेकिन इन नेताओं की कानूनी मुश्किलें अभी समाप्त नहीं हुई हैं। मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय है। तीनों नेता दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने भी पेश हुए।

जेल में रहें या बाहर, आंदोलन जारी रहेगा: अशुतोष रांका

CJP नेता अशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि नेताओं की गिरफ्तारी या जेल जाने से आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनसे पूछा गया कि अगर आंदोलन के नेताओं को हिरासत में ले लिया जाता है, तो आंदोलन कैसे आगे बढ़ेगा? इस पर रांका ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम नेता नहीं हैं, बल्कि उस मंच के संरक्षक हैं, जो इस देश के लोगों ने हमें दिया है। हम सिर्फ अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहे हैं। हम जेल में हों या जेल से बाहर, आंदोलन जारी रहेगा।”
रांका ने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें अपने बारे में और यह समझने का अवसर मिला है कि मौजूदा सत्ता व्यवस्था किस तरह काम करती है।
उन्होंने कहा, “हमने अपने बारे में और इस बात को लेकर बहुत कुछ सीखा है कि सत्ता व्यवस्था किस तरह काम करती है। जरूरत के मुताबिक हम निश्चित रूप से खुद को बदलेंगे और विकसित करेंगे।” रांका के इस बयान को आंदोलन की रणनीति में संभावित बदलाव और नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद इसे जारी रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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सौरव दास ने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की

CJP नेता सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही कार्यवाही का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठन ने इन कार्यवाहियों से जुड़ी जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं की है और जिन लोगों की ओर से इस प्रक्रिया से संबंधित सूचनाएं लीक की जा रही हैं, उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता समझनी चाहिए। सौरव दास ने कहा, “मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि वे कार्यकारी अदालत में चल रही कार्यवाही का सम्मान करें। हम इन कार्यवाहियों के बारे में मीडिया के साथ कोई जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। जो लोग जानकारी लीक कर रहे हैं, उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर संगठन भी कार्रवाई कर सकता है। दास ने कहा, “उन्हें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि जरूरत पड़ने पर हम भी कार्रवाई कर सकते हैं। सभी को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब CJP नेताओं से जुड़ी कानूनी कार्यवाही और आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है।

भविष्य की रणनीति सामूहिक रूप से तय होगी

आंदोलन की अगली रणनीति के बारे में पूछे जाने पर सौरव दास ने कहा कि यह फैसला अकेले CJP नहीं करेगी। उनके मुताबिक, इस आंदोलन से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं और आगे का रास्ता सभी की सामूहिक चर्चा के बाद तय किया जाएगा। दास ने कहा, “हमारी भविष्य की योजनाओं के बारे में फैसला सभी लोग मिलकर करेंगे। यह ऐसा निर्णय नहीं है, जो सिर्फ CJP को लेना है। इस आंदोलन से बहुत से लोग जुड़े हैं। आगे की रणनीति पर सभी चर्चा करेंगे और उसके बाद फैसला लिया जाएगा।”
हालांकि, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर कड़ा रुख अपनाया। सौरव दास ने कहा, “ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अपरिहार्य है।” इस बयान से संकेत मिलता है कि कानूनी कार्यवाही के बीच भी CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में बनी हुई है।

3 नवंबर को अगली सुनवाई, आंदोलन की दिशा पर नजर

CJP नेताओं की पेशी और जमानतदारों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मामला अभी कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी। इस बीच, संगठन के नेताओं ने संकेत दिया है कि आंदोलन का भविष्य किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत पर निर्भर नहीं करेगा। अशुतोष रांका ने आंदोलन को जनता की ओर से सौंपे गए मंच की जिम्मेदारी बताया, जबकि सौरव दास ने अगली रणनीति सामूहिक रूप से तय किए जाने की बात कही। साथ ही, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को दोहराकर उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन अपने राजनीतिक उद्देश्य से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। फिलहाल, इस मामले में अगली सुनवाई और CJP की सामूहिक बैठक के बाद आंदोलन की रणनीति क्या होगी, इस पर नजर रहेगी।