तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पूछताछ के लिए समन भेजा। उन्हें आज ही पेश होने को कहा गया है।
CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। तिहाड़ जेल से रिहा होने के अगले ही दिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों नेताओं को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए बुलाया गया है। इस मामले में CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे को भी बुलाया गया है।
यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने और वहां प्रदर्शन करने से जुड़े मामले में की जा रही है। इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ CJP के आंदोलन को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
रिहाई के बाद फिर पुलिस का सामना
सौरव दास और आशुतोष रांका को 21 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया था। दिल्ली पुलिस ने अदालत से उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। दोनों नेताओं की रिहाई के लिए 50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत संबंधी शर्तें पूरी की गई थीं।रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच ने उन्हें एक अन्य मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। पुलिस की जांच का संबंध जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से है। दोनों नेताओं को समन जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं।
13 अक्टूबर को क्या हुआ था जंतर-मंतर पर?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य जंतर-मंतर के उस क्षेत्र में पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। पुलिस का आरोप है कि समूह ने बैरिकेड पार किए और एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर में प्रवेश किया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान समूह ने तिरंगा फहराने और प्रदर्शन करने का प्रयास किया। CJP का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं के विरोध में था। इस घटना के बाद पुलिस ने 14 लोगों को हिरासत में लिया और दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं।दोनों मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच के पास
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटना से जुड़े दोनों मामलों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
- - पहला मामला: कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यालय से जुड़ी शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसमें लोक सेवक के आदेश की अवहेलना, अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोप शामिल हैं।
- - दूसरा मामला: संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर में सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, उन पर हमला करने और पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस अब दोनों मामलों में संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
सात दिन बाद तिहाड़ जेल से मिली थी रिहाई
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। शुरुआत में उन्हें पांच दिन की हिरासत में रखा गया। इसके बाद 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। 21 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता साफ हुआ। रिहाई के लिए दोनों नेताओं ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत संबंधी दस्तावेज जमा किए। अदालत के समक्ष उन्होंने शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का लिखित आश्वासन भी दिया।अदालत में क्या आश्वासन दिया गया?
रिहाई के साथ दोनों नेताओं पर कुछ शर्तें लागू की गईं। उन्होंने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में होने वाले प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में रहेंगे। अदालत ने उन्हें शांति बनाए रखने और निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया। अब क्राइम ब्रांच की ओर से जारी समन के बाद दोनों नेताओं को अलग-अलग दर्ज मामलों में अपने बयान दर्ज कराने के लिए पेश होना है।SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन का मामला
CJP का आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर शुरू हुआ था। पार्टी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते रहे हैं। इससे पहले 10 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने शांति बनाए रखने से संबंधित मुचलके जमा किए और उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस का आरोप है कि 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में प्रवेश की घटना के दौरान पहले दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन हुआ।