आशुतोष रांका-सौरव दास कोर्ट कार्यवाही अपडेट

  • सीजेपी के नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका वापस ली
  • आज सुबह याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कई तकनीकी सवाल और तीखी टिप्पणियां की थीं
  • आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में कल सुनवाई होगी
  • ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने आशुतोष रांका और सौरव दास को छोड़ने की मांग की
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ले ली। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को कुछ तकनीकी और कानूनी सवाल उठाए, जिसके बाद दोनों नेताओं ने याचिका वापस लेने का फैसला किया। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद दोनों नेताओं की गिरफ्तारी, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड के कथित उल्लंघन और उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने से जुड़ा है। दोनों नेताओं ने हिरासत के आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि जमानतदार पेश करने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया और उनकी स्वतंत्रता का अधिकार प्रभावित हुआ।

हाईकोर्ट ने सुनवाई में क्या सवाल उठाए?

दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका की सुनवाई के दौरान पूछा कि जब दोनों नेताओं ने 10 अक्टूबर को शांति बनाए रखने का बांड दिया था, तो कथित तौर पर अगले ही दिन 11 अक्टूबर को उसका उल्लंघन कैसे हुआ। अदालत ने यह भी सवाल किया कि जंतर-मंतर पर कथित रूप से बैरिकेड पार करके प्रवेश करने और झंडा लहराने की घटना के बाद अधिकारियों की कार्रवाई को किस आधार पर चुनौती दी जा रही है।
अदालत ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठाया। उसने पूछा कि दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने के लिए उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी रास्ते का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट सामान्यतः निर्णय लेने की प्रक्रिया की समीक्षा करता है, न कि हर मामले में संबंधित प्राधिकारी के निर्णय की दोबारा जांच करता है। हालांकि, यदि निर्णय अत्यंत अनुचित हो और न्यायिक विवेक को झकझोरने वाला हो, तो हस्तक्षेप का सवाल उठ सकता है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसाद ने प्रदर्शन के मुद्दे में आए बदलाव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल किया कि शुरुआत में छात्र आंदोलन के रूप में सामने आए प्रदर्शन में बाद में सत्ता परिवर्तन और चुनावी मुद्दों से जुड़े नारे क्यों प्रमुख होने लगे।
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क्या थी दोनों नेताओं की याचिका?

सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। दोनों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उन्हें जमानतदार उपलब्ध कराने के बावजूद हिरासत में रखा गया और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उनकी याचिका में जमानतदारों को खारिज किए जाने के आधार पर भी सवाल उठाए गए थे। मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसार, एक जमानतदार के फोटो और आधार कार्ड में अंतर पाया गया था, जबकि दूसरे जमानतदार के पास सौरव दास के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी नहीं थी। दोनों नेताओं की ओर से दलील दी गई थी कि जमानतदारों की जांच के नाम पर उनकी रिहाई में देरी करना उचित नहीं है। उन्होंने हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन से कैसे जुड़ा है मामला?

यह विवाद सीजेपी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी के नेता चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने की स्थिति में बदलाव के बाद वहां प्रवेश को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद हुआ। पुलिस का आरोप था कि दोनों नेताओं ने प्रतिबंधों के बावजूद बैरिकेड पार करके जंतर-मंतर में प्रवेश किया और पहले दिए गए शांति बांड का उल्लंघन किया। इसी मामले में उन्हें हिरासत में लिया गया था। दूसरी ओर, दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए अदालत का रुख किया था। 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन बढ़ा दी थी और पेश किए गए जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई कल

AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई कल गुरुवार सुबह 10:30 बजे होगी। उनके वकील अभिक चिमनी, जिन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका का भी प्रतिनिधित्व किया था, ने कहा कि उन्हें एसईएम अदालत में सुनवाई के लिए जल्दी जाना पड़ा। इसलिए कल की तारीख मिली है। हाईकोर्ट में बोरा की उस याचिका पर सुनवाई होनी थी जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है जिसमें उन्हें एक मार्च में भाग लेने के बाद 10,000 रुपये का निजी मुआवज़ा और "जांच के दौरान शांति बनाए रखने" के लिए एक ज़मानतदार पेश करने को कहा गया था।

ममता बनर्जी ने इसे राज्य और पुलिस प्रायोजित आतंकवाद बताया

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दास और सौरभ दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद केंद्र पर "राज्य प्रायोजित आतंकवाद" और "पुलिस प्रायोजित अत्याचार" का आरोप लगाया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीजेपी संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास को प्रताड़ित किया जा रहा है। एक्स पर एक पोस्ट में बनर्जी ने आरोप लगाया कि दोनों की हिरासत बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं और युवाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को "लोकतंत्र के लिए खतरा" बताया। बनर्जी ने कहा, "मैं आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे के हताश मकसद को समझ सकती हूं। यह एक खतरनाक वायरस है जिसका इस्तेमाल लोकतंत्र पर हमला करने के लिए रोजाना किया जा रहा है। जेनरेशन जेड के लड़के-लड़कियों को प्रताड़ित करना बंद करो।"

अन्नामलाई ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को 'वास्तविक अन्याय' बताया

तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हालिया कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "वास्तविक अन्याय" बताया और दबाव समूह के आलोचनात्मक प्रश्न उठाने के लोकतांत्रिक अधिकार का बचाव किया। यह स्वीकार करते हुए कि वे समूह की सभी रणनीतियों या विरोध के तरीकों से सहमत नहीं हो सकते हैं, अन्नामलाई ने कहा कि वे उनके द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों की वैधता का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और मानते हैं कि सरकार को उनका जवाब देना चाहिए। "वी द लीडर्स" आंदोलन के संस्थापक अन्नामलाई ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा- "दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा रहा यह कृत्य वास्तव में अन्यायपूर्ण है।" उन्होंने कहा, "मैं उनकी हरकतों या विरोध के तरीके से सहमत नहीं हो सकता, लेकिन सीजेपी द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों के संदर्भ में मैं उनका पूरी तरह से समर्थन करता हूं। उन्हें गिरफ्तार करना और जेल में घसीटना केवल उनके नेताओं को और मजबूत बनाएगा।"