संसद मार्च के दौरान जंतर मंतर और सीपी में पैलेट गन इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने सीआरपीएफ की जांच के हवाले से बताया है कि सुरक्षा बल ने 7 राउंड पैलेट गन से फायरिंग की थी। संसद में यह मामला उठने जा रहा है।
राहुल गांधी ने पेलेट गन से घायल युवक को साथ लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी । फाइल फोटो
20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन (Pellet Gun) चलाए जाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की आंतरिक जांच में सामने आया है कि कनॉट प्लेस (Connaught Place) इलाके में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने अपने पैलेट गन से कम से कम 7 राउंड फायरिंग की थी।
- एक खास ध्यान देने लायक बात है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले को उठाया था। उन्होंने कहा था कि वो संसद में इस मामले को उठाने जा रहा है। रविवार को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस बारे में पत्र लिखकर पूछा था कि पैलेट गन से फायरिंग के लिए कौन ज़िम्मेदार है। इसी बीच इंडियन एक्सप्रेस ने आज सोमवार को यह जांच रिपोर्ट प्रकाशित कर दी है। अब यह मामला ठंडा पड़ सकता है। क्योंकि अगर राहुल गांधी यह मामला उठाते हैं तो सत्ता पक्ष आरोप लगाएगा कि कांग्रेस सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ रही है। ऐसे में पैलेट गन चलाने के औचित्य का सवाल ठंडा पड़ सकता है।
इंडियन एक्सरप्रेस ने सीआरपीएफ सूत्रों के अनुसार बताया है कि लॉग एंट्री और आंतरिक समीक्षा से पता चला है कि इन 7 राउंड में से 5 छर्रे (pellets) सीधे प्रदर्शनकारियों को लगे, जबकि 2 राउंड जमीन पर टकराए।
सीआरपीएफ जांच रिपोर्ट की खास बातें
CRPF सूत्रों के अनुसार, यह फायरिंग तब हुई जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया और पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में कम से कम तीन लोग पैलेट गन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनका अस्पतालों में इलाज कराया गया।
कौन कौन घायल हुआ
गुड़गांव में जॉब करने वाले इरशाद शेख (25 वर्ष) को चेहरे, गर्दन और आंख के पास छर्रे लगे। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्र साहिल लोचब (19 वर्ष) के दाहिने हिस्से में छर्रे लगे और आंख की रोशनी प्रभावित होने का खतरा है। 28 वर्षीय खेल पत्रकार के शरीर में 30 से अधिक छर्रे धंसे थे। खेल पत्रकार आउटलुक मैगज़ीन में काम करते हैं।
शुरुआती इनकार और जांचः 20 जुलाई को हुए इस प्रदर्शन के बाद जब घायलों की तस्वीरें सामने आईं, तो दिल्ली पुलिस ने किसी भी तरह से पैलेट गन के इस्तेमाल से साफ इनकार किया था और इसे भ्रामक बताया था। आरएएफ भी चुप रही। आरएएफ सीआरपीएफ का हिस्सा है। लेकिन बाद में आरएएफ ने कहा कि वो जांच कर रही है। उसके बाद अब यह जांच रिपोर्ट सामने आ गई।
रिपोर्ट के मुताबिक CRPF (जिसके तहत दंगारोधी दस्ता RAF काम करता है) ने अपने स्तर पर घटनाओं के क्रम की जांच शुरू की। RAF के जवानों की ड्यूटियों और लॉग बुक्स की जांच के बाद यह बात आधिकारिक रूप से सामने आई कि RAF के जवान द्वारा पैलेट गन से 7 राउंड फायर किए गए थे।
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए CRPF को निर्देश दिए हैं कि जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से परहेज किया जाए।
मामला ठंडा पड़ेगा या विपक्ष इसे उठाएगा
पैलेट गन इस्तेमाल का मामला शुरू से विवादित रहा है। इसराइल ने इसका इस्तेमाल फिलिस्तीनी युवकों पर किया। न जाने कितने युवकों की जिन्दगियां ग़ज़ा में इसराइल की सनक ने बर्बाद कर दीं। इसराइल ने फिर यह गन भारत को बेचा। भारत में इसका पहला इस्तेमाल कश्मीर में, फिर मणिपुर में इसके बाद पंजाब के किसानों पर शंभू बॉर्डर पर किया गया। दुनिया में इसराइल के बाद भारत ही ऐसा दूसरा देश है जो पैलेट गन का इस्तेमाल कर रहा है। किसानों और दिल्ली में निहत्थे शांत प्रदर्शनकारियों पर इसके इस्तेमाल ने पूरे भारत को हिला दिया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाया है। लेकिन सीआरपीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद नई स्थिति पैदा हो गई है।