CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने चेताया है, 'यदि कल तक हमें सरकार से लिखित समझौता नहीं मिलता है, FIR वापस नहीं ली जाती हैं और प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया जाता है, तो हम दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे...।'
सीजेपी प्रोटेस्ट की चेतावनी
कई राज्यों में छात्रों की गिरफ़्तारी और परेशान किए जाने की आ रही ख़बरों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को हुए समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है। सीजेपी का कहना है कि आंदोलन वापस लेने के बावजूद देश के कई राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द लिखित समझौता नहीं दिया, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं लीं और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया तो वह फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
सीजेपी ने सोमवार को राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, 'यदि कल तक हमें सरकार से लिखित समझौता नहीं मिलता, एफआईआर वापस नहीं ली जातीं और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाता तो हम दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन ख़त्म कराने के लिए जो आश्वासन दिया था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
25 जुलाई के समझौते का ज़िक्र किया
सीजेपी के अनुसार 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत में कुछ प्रमुख सहमतियाँ बनी थीं। संगठन का दावा है कि सरकार ने कहा था कि आंदोलन से जुड़ी सभी पुरानी एफआईआर वापस ली जाएँगी। उन्होंने कहा कि यह भी सहमति बनी थी कि प्रदर्शनकारियों पर कोई नई कार्रवाई नहीं होगी, नीट पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या पीड़ित परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा दिया जाएगा। इसने यह भी कहा कि परीक्षा सुधारों से जुड़े संगठन के पांच सूत्रीय प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इन वादों के बावजूद पुलिस कार्रवाई जारी है।
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कई राज्यों में छात्रों को गिरफ्तार किया जा रहा है और स्वयंसेवकों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित कई जगहों पर आंदोलन से जुड़े लोगों की निगरानी की जा रही है और कुछ स्वयंसेवकों को हिरासत में भी लिया गया है। उन्होंने मांग की कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां और बीजेपी या एनडीए शासित राज्यों की पुलिस आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को तुरंत वापस ले।
कई राज्यों में कार्रवाई का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी की सदस्य रत्ना सिंह ने दावा किया कि असम में प्रदर्शन से जुड़े कई एफ़आईआर दर्ज की गई हैं। कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 10 मुस्लिम बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में 86 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।'सरकार पहले से यही करती रही है'
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन को पहले से आशंका थी कि आंदोलन स्थगित होने के बाद सरकार अलग-अलग छात्रों को निशाना बना सकती है। उन्होंने कहा, 'हमें डर था कि जैसे ही आंदोलन का दबाव कम होगा, सरकार छात्रों के खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई शुरू कर देगी। यही सरकार का तरीका रहा है।'
कपिल सिब्बल ने दी कानूनी मदद की घोषणा
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आंदोलनकारियों को कानूनी सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे इसके लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान देंगे और एक ऑनलाइन कानूनी सहायता मंच तैयार किया जाएगा, जहाँ प्रदर्शनकारी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। सिब्बल ने देशभर के वकीलों से भी अपील की कि वे आंदोलन से जुड़े छात्रों की कानूनी मदद के लिए आगे आएं।सिब्बल ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है और उनको वह टार्गेट करेगी। उन्होंने कहा, 'दिल्ली पुलिस फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल करके उन सभी लोगों को निशाना बना रही है जो विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। वे इसे सांप्रदायिक रंग भी दे सकते हैं।' सिब्बल ने कहा कि वह सांप्रदायिकता फैलाने वालों के ख़िलाफ़ हैं और इसलिए वह क़ानूनी मदद दे रहे हैं।
'साक्षी' नाम से शुरू होगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
सीजेपी ने बताया कि वह 'साक्षी' नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करेगा। इस मंच पर प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो, फोटो और अन्य सबूत अपलोड कर सकेंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके।आंदोलन खत्म होने के बाद फिर बढ़ा तनाव
सीजेपी ने 49 दिनों तक चले अपने आंदोलन को 25 जुलाई को उस समय स्थगित कर दिया था, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई।
लेकिन अब संगठन का कहना है कि सरकार अपने वादों पर अमल नहीं कर रही है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर अगले 24 घंटों पर है। यदि सीजेपी की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो संगठन ने एक बार फिर देशभर में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। इससे सरकार और छात्र संगठन के बीच टकराव दोबारा बढ़ने की संभावना बन गई है।